बस, दो बच्चे...मुल्लों को टाइट करने का शानदार इंतजाम

 


जनसंख्या नियंत्रण के लिए असम और यूपी सरकार की दो बच्चों की नीति को हमारा पूरा समर्थन...

यहां हमारा से मतलब मेरा नहीं पढ़ें। हमारा से मतलब समस्त मुसलमान, जिनकी ठेकेदारी मेरे पास है, उनकी ओर से मैं इस नीति का समर्थन देने का वचन देता हूं।

यह बहुत अच्छी नीति है, जितनी जल्दी हो सके इसे लागू किया जाना चाहिए।

इस नीति से तो मुल्ले एकदम टाइट होकर जमीन पर आ गिरेंगे। मुसलमानों की चूड़ी कसने के लिए दो बच्चों की नीति से अच्छा कदम और नहीं हो सकता। वैसे मुल्ले चाहें तो आपदा में अवसर समझकर इस योजना को लपककर आत्मसात कर लें और भारत की मुख्य़धारा में न रहने का अपना कथित दाग धो लें।

हालांकि सरकार को यह नीति सिर्फ मुल्लों के लिए लाना चाहिए क्योंकि जल्द ही गैर मुसलमानों के कई समुदाय और राज्य इसका विरोध करेंगे। ऐसे में सरकार को दिक्कत आ सकती है। अभी भी समय है, दो बच्चों की पॉलिसी सिर्फ मुसलमानों के लिए बने।





...जो तथाकथित बुद्धिजीवी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के 7 भाई-बहन, प्रधानसेवक मोदी के 6 भाई-बहन, अमित शाह 7 बहन-भाई, मायावती के 8 भाई-बहन, लालू यादव के 12 बच्चों का उदाहरण दे रहे हैं, वे देशद्रोही हैं। अरे भाई, पुरानी बातों पर मिट्टी डालें।...पुराने जमाने की आनंद फिल्म का आनंद कुछ और था, मौजूदा दौर का आनंद कुछ और है।

हालांकि, हमारे पड़ोसी पंजाबी परिवार के तीन बच्चे, उससे आगे एक और पंजाबी परिवार के पांच बच्चे, उससे भी आगे शर्मा परिवार के चार बच्चों वाले पिता आज दबी जबान से पार्क में इस नीति का विरोध करते नजर आए लेकिन खुलकर कुछ कह नहीं सके।

उनका कहना था कि हमारे तीन-तीन, चार-चार बच्चे तो फिर भी ठीक हैं लेकिन जनसंख्या बढ़ाने में असली योगदान मुल्लों का है। इसलिए यह नीति तो ठीक है लेकिन इससे हम हिन्दुओं को छूट मिलनी चाहिए। ये दो बच्चों वाला कानून सिर्फ मुल्लों के लिए हो।

हो सकता है अखिलेश यादव जैसे इसका विरोध करें, क्योंकि अगर मुल्लों ने इस नीति को समर्थन दे दिया (हालांकि यह तय है कि समर्थन मिलेगा) तो वो बेचारा किस मुद्दे को आधार बनाकर चुनाव लड़ेगा। उसे डर होगा कि मुल्ले इस योजना की आड़ में भाजपा से दोस्ती का हाथ बढ़ा सकते हैं। ऐसे में जो दो-चार फीसदी यादव उसके पास बचे हैं, उनसे भला सत्ता में कैसे वापसी की जा सकेगी।

इस नीति का विरोध अविवाहित राहुल गांधी भी कर सकता है क्योंकि उसे अभी विवाह की कठिन परीक्षा से गुजरना है। वह अभी से फैमिली प्लानिंग कैसे बता दे। उसके खानदान में मोतीलाल नेहरू से लेकर जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी तक बस एक या दो बच्चे पैदा करने का ही सिलसिला रहा है। यानी मोदी, अमित शाह, रामनाथ कोविंद के परदादा जब बच्चों की फौज खड़ी कर रहे थे तो नेहरू खानदान एक या दो बच्चों से काम चला रहा था।
बहरहाल, प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून में कुछ प्रावधान और भी किए जा सकते हैंं...

देश की खातिर जिस तरह मोदी, योगी, मोहन भागवत, मायावती ने विवाह नहीं किया, देश में ऐसे लाखों युवक होंगे जो रोजगार के अभाव में अविवाहित हैं या जिन्होंने आगे विवाह नहीं करने का फैसला लिया है, उन्हें सरकार फ्लैट, गाड़ी वगैरह देकर सम्मानित करे। सरकार के ऐसा करने पर ऐसे लोगों की संख्या बढ़ सकती है और जनसंख्या पर नियंत्रण और प्रभावी तरीके से लागू हो जाएगा। इसमें पकौड़ा तलने वाले युवकों को सिर्फ फ्लैट या कार में से कोई एक चीज देकर उनका सम्मान सीमित किया जा सकता है क्योंकि पकौड़े तल कर वे पैसा तो कमा ही रहे हैं।

तमाम राजनीतिक दल भी चाहें तो मतदाताओं का दिल जीतने के लिए तमाम घोषणाएं कर सकते हैं। जैसे अविवाहित रहने वाले युवक-युवतियों को टिकट देकर प्रोत्साहित कर सकते हैं। एलजीबीटी समुदाय को भी इस योजना का लाभ दिया जा सकता है क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण में उनसे बड़ा योगदान तो कोई दे ही नहीं सकता।

इसी तरह गोदी मीडिया से हाल ही में बेरोजगार किए गए दो-तीन बच्चों वाले पत्रकारों के लिए भी कोई योजना लाई जा सकती है। गोदी मीडिया में मौजूद पत्रकारों की गिनती कराकर उनके बच्चों की सूची प्रकाशित की जानी चाहिए।

लेखकों, कवियों को भी इस योजना के दायरे में लाया जा सकता है। जैसे साहित्य अकादमी पुरस्कार सिर्फ उसी लेखक को मिले अविवाहित हो। अगर वो मंदिर आदि के लिए चंदा देकर अपनी आस्था प्रकट कर चुका हो तो उस लेखक को साहित्य पुलित्जर देने की घोषणा की जा सकती है।
इस संबंध में जनता से भी सुझाव आमंत्रित हैं। अच्छे सुझाव वालों को मैं सरकार से बात करके पुरस्कार आदि की व्यवस्था करा सकता हूं।

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