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राहुल गांधी का “हिन्दू” मोदी के “हिन्दुत्व” को नहीं हरा सकता

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जनता को आडंबर पसंद है, मोदी की छवि उसे मोहक लगती है... तमाम प्रश्न अनुत्तरित हैं। यक्ष प्रश्न पूछने वाले नदारद हैं। नेपथ्य से आने वाली आवाज़ें खामोश हैं। कुछ जोकर हिन्दुत्व नाम की रस्सी को अपनी-अपनी तरफ़ खींचने में ज़ोर लगा रहे हैं। जनता धर्म की अफ़ीम चाटकर सारे कौतुक को निर्लज्जता से देख रही है। यह कम शब्दों में भारत के मौजूदा हालत की तस्वीर है।  राहुल गांधी भारत के प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस के ज़िम्मेदार नेता हैं। उनकी पार्टी जयपुर में महंगाई विरोधी रैली करती है। रैली से बढ़ती महंगाई का सरोकार ग़ायब है। राहुल धर्म का मुद्दा छेड़ते हैं। पेट की आग से धर्म बड़ा हो जाता है।  राहुल महंगाई विरोधी रैली में हिन्दू और हिन्दुत्व का फ़र्क़ समझाते हैं। वो गोडसे के हिन्दुत्व को विलेन बनाने की कोशिश करते हैं। राहुल गांधी के भाषण में कुछ भी नया नहीं था। वो पहले भी यही बातें कह चुके हैं। आरएसएस पर हमला कर चुके हैं। लेकिन दो दिन बाद उन्हें हिन्दुत्व के उन पैरोकारों की तरफ़ से जवाब मिलता है जो राहुल के मुताबिक़ गोडसे परंपरा के वाहक हैं। राहुल गांधी के सलाहकार कौन हैं, मुझे नहीं पता। उन्हें कौन सलाह

वर्क फ्रॉम होम के प्रस्तावित कानून में क्या होगा

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 Work from Home क़ानून में किसके मन की बात होगी ? -यूसुफ किरमानी तमाम कंपनियों में घर से काम (वर्क फ्रॉम होम  Work from Home ) करने का  सिलसिला  बढ़ने के बाद भारत सरकार अब इसके मद्देनजर कायदे-कानून बना रही है। इन नियमों के लागू होने के बाद कंपनी मालिकों पर अपने कर्मचारियों या स्टाफ की क्या जिम्मेदारियां होंगी, उसे कानून के जरिए परिभाषित कर दिया जाएगा।  अभी कोई नहीं जानता कि केंद्र सरकार की कानूनी परिभाषा का दायरा क्या होगा। वर्क फ्रॉम होम में स्टेकहोल्डर स्पष्ट तौर पर तो दो ही हैं  –  कंपनी और कर्मचारी। लेकिन कुछ और भी स्टेकहोल्डर हैं जो अप्रत्यक्ष हैं। जैसे कर्मचारी का परिवार। वर्क फ्रॉम होम की परिभाषा के दायरे में कर्मचारी का परिवार होगा या नहीं, इस पर श्रम मंत्रालय की कोई राय अभी तक सामने नहीं आई है। सरकार ने  तमाम मजदूर संगठन से भी इस संबंध में किसी तरह की सलाह नहीं मांगी है। कम से कम उसे सरकार समर्थित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से ही पूछ लेना चाहिए था। घर से काम ( Remotely Working ) पर  प्रस्तावित केंद्रीय  कानून  एक  नए मॉडल  की तरह पूरे देश में लागू होगा।  कोविड -19   (Covid 19)

सुधा भारद्वाज के मामले में एनआईए ऐसे हुई पस्त...

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 7 दिसंबर को आदिवासियों के अधिकार के लिए लड़ने वाली वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की रिहाई का रास्ता साफ़ कर दिया। सुप्रीम अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ एनआईए की अपील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि वकील और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज भीमा कोरेगांव मामले में "डिफ़ॉल्ट जमानत पर रिहा होने के हकदार थे"। #एनआईए ( राष्ट्रीय जांच एजेंसी ) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने तर्क दिया कि बॉम्बे उच्च न्यायालय यह गलत समझ रहा है कि #सुधा_भारद्वाज डिफ़ॉल्ट जमानत की हकदार थीं, और उन्होंने 2020 से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का विरोध किया, जिसके कारण यह निष्कर्ष निकला था। हालांकि, जस्टिस यूयू ललित, एस रवींद्र भट और बेला भाटिया की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एनआईए की दलीलों में कोई दम नहीं पाया और अपील को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें #बॉम्बे_हाई_कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई कारण नहीं दिखता। बहरहाल, सुधा भारद्वाज को अब बुधवार, 8 दिसंबर को मुंबई में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया, जैसा कि बॉम्बे ह

सरकारी बैंकों के प्राइवेट होने में जानिए अपना नफा-नुकसान

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  केंद्र सरकार अगले तीन दो-चार दिनों में सरकारी बैंकों के निजीकण का बिल संसद में पेश करने जा रही है। इस प्रस्तावित विधेयक को लेकर सरकारी बैंक कर्मचारियों में खलबली मची हुई हैं। बैंक यूनियनों ने दो दिन (16-17 दिसम्बर) की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी है। बतौर नागरिक आपको जानना चाहिए कि मोदी सरकार सरकारी बैंकों के निजीकरण ( Bank Privatization ) की तरफ जो कदम बढ़ा रही है, वो सही है या गलत। उससे आप कहां तक प्रभावित होंगे। अभी प्राइवेट बैंकों की जो स्थिति है, क्या आप उससे संतुष्ट हैं। सबसे पहले यह तथ्य जान लीजिए कि अगर सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने का बिल संसद में पास हो गया तो सरकारी बैंकों में अभी सरकार की हिस्सेदारी जो 51 फीसदी है, वह घटकर 26 फीसदी हो जाएगी। ऐसे में अगर वो बैंक डूबता है तो आपके पैसों की जिम्मेदारी सरकार की नहीं के बराबर होगी।    सरकार सिर्फ दो बैंकों सेंट्रल बैंक आफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज को प्राइवेट करने का विधेयक संसद में 6 दिसम्बर को लाने जा रही है। दरअसल, नीति आय़ोग ने निजीकरण के लिए विनिवेश पर सरकारी सचिवों के कोर ग्रुप की बैठक में कहा था कि दो सरकारी बैं