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Showing posts from December, 2020

अटल बिहारी वाजपेयी को ज़बरन स्वतंत्रता सेनानी बनाने की कोशिश

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  यूसुफ किरमानी मोदी सरकार ने 25 दिसम्बर 2020 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मनाते हुए उन्हें फिर से स्वतंत्रता सेनानी स्थापित करने की कोशिश की। भाजपा शासित राज्यों में अटल के नाम पर सुशासन दिवस मनाया गया। इसलिए इस मौक़े पर पुराने तथ्यों को फिर से कुरेदना ज़रूरी है। भाजपा के पास अटल ही एकमात्र ब्रह्मास्त्र है जिसके ज़रिए वो लोग अपना नाता स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ते रहते हैं।  यह तो सबको पता ही है कि भाजपा का जन्म आरएसएस से हुआ। भाजपा में आये तमाम लोग सबसे पहले संघ के स्वयंसेवक या प्रचारक रहे। 1925 में नागपुर में अपनी पैदाइश के समय से ही संघ ने अपना राजनीतिक विंग हमेशा अलग रखा। पहले वह हिन्दू महासभा था, फिर जनसंघ हुआ और फिर भारतीय जनता पार्टी यानी मौजूदा दौर की भाजपा में बदल गया। कुछ ऐतिहासिक तथ्य और प्रमाणित दस्तावेज हैं जिन्हें आरएसएस, जनसंघ के बलराज मधोक, भाजपा के अटल और आडवाणी कभी झुठला नहीं सके।  आरएसएस  संस्थापक गोलवरकर ने भारत में अंग्रेज़ों के शासन की हिमायत की। सावरकर अंडमान जेल में अंग्रेज़ों से माफ़ी माँगने के बाद बाहर आये। सावरकर के चेले नाथूराम गोडसे ने

मदर आफ डेमोक्रेसी+टू मच डेमोक्रेसी=मोदीक्रेसी Mother of Democracy+Too Much Democracy=Modicracy

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  नीति आयोग के प्रमुख अमिताभकांत ने 8 दिसम्बर को कहा कि भारत में इतना ज्यादा लोकतंत्र (टू मच डेमोक्रेसी) है कि कोई ठीक काम हो ही नहीं सकता। इसके दो दिन बाद 10 दिसम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में नए संसद भवन का शिलान्यास करते हुए कहा कि पूरी दुनिया बहुत जल्द भारत को 'मदर आफ डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र की जननी) कहेगी। उसके बाद मैं इन कल्पनाओं में खो गया कि आखिर दोनों महानुभावों की डेमोक्रेसी को कैसे शब्दों में अमली जामा पहनाया जाए। अमिताभकांत उस नीति आयोग को चलाते हैं जो भारत सरकार का थिंक टैंक है। जहां योजनाएं सोची जाती हैं, फिर उन्हें लागू करने का तरीका खोजा जाता है। भारत की भावी तरक्की इसी नीति आयोग में तय होती है। नरेन्द्र मोदी भारत नामक उस देश के मुखिया हैं जो नीति आयोग को नियंत्रित करता है, और बदले में मोदी के विजन को नीति आयोग लागू करता है। आइए जानते हैं कि दरअसल 'टू मच डेमोक्रेसी' और 'मदर आफ डेमोक्रेसी' के जरिए दोनों क्या कहना चाहते होंगे। शायद वो ये कहना चाहते होंगे कि देश की जीडीपी में भारी गिरावट के लिए टू मच डेमोक्रेसी जिम्मेदार है। मोदी भक्त