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Showing posts from October, 2020

कैसा धर्म है आपका...क्या ये बातें हैं...

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अगर कि सी धर्म के डीएनए में ही महिला अपराध है तो वो कैसा धर्म?    अगर किसी धर्म के डीएनए में ही बाल अपराध है तो वो कैसा धर्म?    अगर किसी धर्म के डीएनए में छुआछूत, ऊंच-नीच, सामाजिक असमानता है तो वो कैसा धर्म ?    इसलिए अपने - अपने धर्म पर फिर से विचार करें... आपके धर्म का डीएनए उस स्थिति में बहुत कमज़ोर है अगर उसके    किसी महापुरुष,    किसी देवी-देवता,    किसी अवतार    का अपमान    किसी कार्टून,    किसी फ़िल्म,    किसी विज्ञापन,    किसी ट्वीट,    किसी फ़ेसबुक पोस्ट से हो जाता है। तो कमज़ोर कौन है...   वो धर्म या उस अपमान को बर्दाश्त न कर पाने वाले आप????    क्योंकि उसके डीएनए में आप हैं। धर्म तभी है जब आप हैं। ...आप हैं तो धर्म है।    -यूसुफ़ किरमानी

मनाली की हसीन वादियों में पहुँचा नीरो

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  रोम के जलने पर नीरो अब बाँसुरी नहीं बजाता वह मनाली की हसीन वादियो को किसी टनल के उद्घाटन के बहाने निहारने जाता है।... वही नीरो मोर को दाना चुगाते हुए अपने चेहरे पर मानवीयता की नक़ाब ओढ़ लेता है।... वह हाथरस कांड पर चुप है। नाले के गैस पर चाय बनाने से लेकर टिम्बर की खेती की सलाह देने वाला शख़्स सोलंग (हिमाचल प्रदेश) में लोकनृत्य पर अहलादित हो रहा है। नीरो के लिए हाथरस एक सामान्य घटना है। उसे यक़ीन है कि उसका फ़ासिस्ट हीरो हाथरस संभाल लेगा। फ़ासिस्ट हीरो ने हाथरस में वो कर दिखाया जो नागपुर प्रशिक्षण केन्द्र से प्रशिक्षित होकर निकले किसी सेवक ने आजतक नहीं किया था। फ़ासिस्ट हीरो ने जब तक चाहा मीडिया के परिन्दों को पर नहीं मारने दिया। मीडिया को हाथरस के उस गाँव में घुसने और गैंगरेप व हत्या की शिकार लड़की के परिवार से मिलने की इजाज़त तब मिलती है जब सारे सबूत मिटा दिए जाते हैं। उसकी लाश परिवार की ग़ैरमौजूदगी में जलाई जा चुकी है। उल्टा पीड़ित परिवार के नारको टेस्ट की इजाज़त दी जा चुकी है। कई फ़र्ज़ी दस्तावेज़ वायरल किए जा चुके हैं। पालतू अफ़सर से पिता को धमकाया जा चुका है। फासिस्ट हीरो विपक्