दिल्ली जनसंहार में लुटे-पिटे लोग ही अब मुलजिम हैं...

#दिल्ली_रक्तपात या #दिल्ली_जनसंहार_2020 की दास्तान खत्म होने का नाम नहीं ले रही है...
अकबरी दादी (85) के बाद अब सलमा खातून दादी (70) की हत्या ने मेरे जेहन को झकझोर दिया है। मैंने गामड़ी एक्सटेंशन में तीन मंजिला बिल्डिंग में जिंदा जला दी गई 85 साल की अकबरी दादी की कहानी सोशल मीडिया पर लिखी थी...लेकिन अब एक और बुजुर्ग महिला सलमा खातून का नाम भी #दिल्ली_में_हुई_हिंसा या #जनसंहार में सामने आया है।...

सोच रहा हूं कि उन इंसानों का दिमाग कैसा रहा होगा जिसने सलमा खातून और अकबरी की जान ली होगी...क्या हत्यारी #दंगाइयों_की_भीड़ को अपनी मां या दादी का चेहरा याद नहीं रहा होगा...आप लोग मेरी मदद कीजिए कि असहाय, निहत्थी महिला को  एक भीड़ अपनी आंखों के सामने कैसे कत्ल करती होगी...उस भीड़ के दिल-ओ-दिमाग में ऐसा क्या रहता होगा...उत्तेजना के वे कौन से क्षण होते हैं जब भीड़ एक असहाय महिला या पुरुष का कत्ल कर देती है।...कुछ इन्हीं हालात में दंगाइयों ने अंकित शर्मा, दलबीर नेगी और रत्नलाल का कत्ल किया होगा...क्या भीड़ नाम के आधार पर, कपड़ों के पहनावे के आधार पर कत्ल को अंजाम देती है...बताइए...बताइए जरा...
उस हत्यारी भीड़ को उकसाने वालों ने, उन्हें संरक्षण देने वालों ने, उनके नारों को अमल में लाने वालों ने अभी 8 मार्च को महिला दिवस बहुत गर्व और तमाम जुमलेबाजी के साथ मनाया है।...आखिर इन लोगों ने दो बुजुर्ग महिलाओं की हत्या को याद किए बिना कैसे महिला दिवस मनाया होगा...

अभी दो दिन पहले तक सलमा खातून की लाश जीटीबी अस्पताल में दंगे के दौरान लाए गए लोगों के बीच अज्ञात में दर्ज थी। लेकिन उनके शौहर #गालिब खान तमाम जगहों से तलाशते हुए जीटीबी अस्पताल पहुंचे और अपनी बीवी की लाश को पहचाना और तब जाकर सलमा खातून को मिट्टी नसीब हुई...ऐसी न जाने कितनी लाशें होंगी जो मिली ही नहीं...या जो मिलीं, उनसे जुड़ी #दास्तान को हम नहीं जानते...मीडिया भी अब ऐसी कहानियां सामने नहीं लाएगा...उनके लिए सलमा खातून अभी भी अज्ञाात होंगी या उनके बारे में चूंकि ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है तो टीवी चैनलों के लिए यह #मसालेदार_खबर नहीं है।
बहरहाल, देखिए कि #दिल्ली_पुलिस कैसे इंसाफ दिला रही है....
पुलिस अकबरी और सलमा खान के हत्यारों को तलाश नहीं कर पाई है। लेकिन उसने अंकित शर्मा, दलबीर नेगी और रत्नलाल की हत्या के मुलजिमों का पता लगा लिया है।...है न कमाल...
#शिव_विहार में जिन फैसल फारुकी का राजधानी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल जला दिया गया, वही अब दंगों के मुलजिम बना दिए गए हैं। आपका यह सवाल उस पुलिस अफसर की नजर में बचकाना है कि हमारे घर में चोरी हुई और हमे ही चोर कैसे ठहराया जा सकता है...आप समझते नहीं हैं पुलिस वर्दी में है। अब समझ में आता है कि #वेद_प्रकाश_शर्मा ने अपने #उपन्यास का नाम #वर्दी_वाला_गुंडा क्यों रखा होगा...
नेहरू विहार में वही लोग घरों से उठा लिए गए, जो वहां के #मंदिर की रखवाली कर रहे थे। हबीब, उस्मान सैफी और मोहम्मद यामीन #मुस्तफाबाद के नेहरू विहार की गली नंबर 18 में बने #राम_मंदिर की रखवाली इसलिए कर रहे थे ताकि उस #मुस्लिम_बहुल_इलाके में कोई सिरफिरा उस मंदिर पर हमला न कर दे। हालांकि उसी इलाके में सात #मस्जिदें पहले ही शहीद कर दी गई थीं। लेकिन इन तीनों को रविवार को इनके घरों से पुलिस उठाकर ले गई और इन्हें दंगाई बता दिया गया। परिवार वाले दयालनगर पुलिस थाने के चक्कर काटते रहे लेकिन तीनों के बारे में पुलिस वाले जानकारी देने से इनकार करते रहे।

विभिन्न #मीडिया के हमारे साथी क्राइम रिपोर्टरों का कहना है कि समुदाय विशेष के करीब दो हजार युवकों को दिल्ली पुलिस उठाकर ले जा चुकी है। ...लुटे-पिटे लोग ही अब मुलजिम बन गए हैं...जिन हत्याओं के सबूत मौजूद हैं, उनमें से एक भी हत्यारे तक पुलिस नहीं पहुंची है। ...आखिर उसे दलबीर नेगी की हत्या के आरोप में शहनवाज का फुटेज कैसे मिल जाता है और सलमा खातून, अकबरी, अनवर, फैजान, महताब, मुशर्रफ, महरूफ अली, हाशिम अली, इशत्याक, सुलेमान, राहुल ठाकुर, विनोद, दिनेश, नितिन, दीपक...के हत्या आरोपियों के फुटेज क्यों नहीं मिलता।...  


सोचता हूं पुलिस ऐसा क्यों कर रही है...समझ में यही आता है कि पुलिस #सौदेबाजी करेगी।...क्योंकि दिल्ली नरसंहार में उसे क्लीन चिट मिलने से रही। अदालतों में उसे ज़लील होना पड़ेगा, अंतरराष्ट्रीय अदालत में भी मामले जा सकते हैं। उसने ये धरपकड़ इसीलिए की है ताकि इन लोगों से पुलिस के खिलाफ केस वापस कराए जा सकें या फिर पुलिस अपने पक्ष में इन लोगों को अदालत में खड़ा कर सके।...

जिन युवकों को पुलिस ने घरों से उठाया है, अगर इस मामले को राजनीतिक दलों ने गंभीरता से नहीं लिया तो उन सारे लोगों का विश्वास इंसाफ पर से उठ जाएगा, जो इस #साम्प्रदायिक_हिंसा का शिकार हुए और मुलजिम भी ठहराए गए।...खुद को प्रोफेशनल बताने वाली दिल्ली पुलिस के लिए भी आगे चलकर इससे नए तरह के संकट पैदा होंगे। क्योंकि लोगों में जब कानून का डर खत्म हो जाता है तो वहीं से हमारे #समाज_का_ताना_बाना बिखरने का डर पैदा हो जाता है।
उम्मीद है कि दिल्ली जनसंहार से दिल्ली पुलिस की जो छवि खराब हुई है, उसे अभी भी पीड़ित लोगों को इंसाफ दिलाकर  उस पाप को धो सकती है।...जिन सियासी आकाओं के लिए वो यह सब कर रही है, कल वो वहां तख्तनशीं नहीं होंगे...जिल्लत से बचने का मौका अभी भी है...
#DelhiGenocide2020
#DelhiPogrom2020
#DelhiBloodbath2020
#DelhiMayhem2020
#DelhiMassacre2020
#DelhiShaheenBagh
#ShaheenBaghProtest
  











 

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