Thursday, November 28, 2019

गोडसे को गाली दे चुके हों तो मैं कुछ अर्ज करूं



अगर आप लोग भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर का आतंकवादी नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने पर रो-धो चुके हैं, उसे सोशल मीडिया पर खूब गाली दे चुके हों तो मैं कुछ अर्ज करूं।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि इस महिला ने गोडसे को देशभक्त बताया हो। उसे जब-जब भाजपा और चालाक जातियों वाले सांस्कृतिक गिरोह का इशारा होता है वह गोडसे को देशभक्त बता देती है।...

यह सब जानबूझकर किया जा रहा है। आप लोगों को शिकारी अपनी जाल में फंसा रहा है। महाराष्ट्र का राजनीतिक युद्ध हारते ही गोडसे को विवाद के केंद्र में लाया जा रहा है ताकि उसके माफी गुरु को इस बार गणतंत्र दिवस पर जब भारत रत्न देने की घोषणा हो तो मराठियों का सीना गर्व से फूल उठे। महाराष्ट्र में दो या ज्यादा से ज्यादा तीन साल में विधानसभा चुनाव होना तय है। अगर मराठियों के वोट की कीमत माफी गुरु को भारत रत्न और गोडसे को देशभक्त की उपाधि है तो भगवा गिरोह के हिसाब से सौदा उतना बुरा नहीं है।

आप देखेंगे कि संसद में जब उस शाप देने वाली महिला ने गोडसे को देशभक्त बताया तो इसे पहले टीवी चैनलों पर चलवा दिया गया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई घंटे बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इसे सदन की कार्यवाही से निकालने का आदेश दिया। लेकिन तब तक सत्ताधारी दल और उसके चालाक जातियों वाले सांस्कृतिक गिरोह का मकसद पूरा हो चुका था। पूरे देश में गोडसे और उसके माफी गुरु पर चर्चा शुरू हो चुकी है।

याद रखिए...26 जनवरी 2020 तक गुरु-चेले की चर्चा रहेगी और माफी गुरु को भारत रत्न की घोषणा के बाद ही इस चर्चा पर विराम लगेगा। यह सब प्रज्ञा ठाकुर की आड़ लेकर सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। वरना जिस देश का प्रधानमंत्री यह कहे कि गांधी के हत्यारे का महिमामंडन करने वाली को वह दिल से माफ नहीं कर पाएंगे और जिस सत्ताधारी पार्टी का अध्यक्ष यह कहे कि अगले हफ्ते तक उस पर कार्रवाई हो जाएगी, उसके बावजूद आतंक के आरोपों का सामना कर रही महिला फिर से गोडसे को देशभक्त बताने की जुर्रत कर डालती है, उस प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष का आत्मग्लानि से मुंह तक नहीं खुलता है। आप ऐसों से किस जिम्मेदारी की उम्मीद करते हैं।

यह ठीक है कि आप गांधी के विचारों से सहमत नहीं हैं। यह भी ठीक है कि आप गांधी को देश के बंटवारे का जिम्मेदार मानते हैं। यह भी ठीक है कि जिस चालाक जातियों वाले सांस्कृतिक गिरोह ने अंग्रेजों के लिए मुखबिरी की, गांधी ने उन अंग्रेजों को मार भगाया, इसलिए आपकी नाराजगी भी जायज है। लेकिन अब तो आपकी विचारधारा की सरकार है। क्यों नहीं संसद में एक प्रस्ताव पारित कर सबसे पहले गांधी को राष्ट्रपिता की पदवी से मुक्त कर देते, फिर संसद और राष्ट्रपति भवन से गांधी की तस्वीरें हटवा देते, फिर रिजर्व बैंक को आदेश कर सभी करंसी नोट और सिक्कों से गांधी की मुहर हटवा देते यानी जहां-जहां गांधी है, उसे मिटा दो, हटा दो, जला दो। बहुमत है भाई...कर सकते हो। कर डालो गांधी की निशानियां मिटा डालो।

जिन्हें गांधी चाहिए वे साउथ अफ्रीका, अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, चीन, जापान, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस में स्थापित गांधी मूर्तियों से काम चला लेंगे। भारत में गांधी न सही तो न सही।

दरअसल, भगवा और चालाक जातियों के सांस्कृतिक गिरोह को गांधी के विचारों से इसलिए चिढ़ है कि जब तक गांधी के विचार जिंदा हैं, तब तक यह गिरोह भारत में पूरी तरह फल फूल नहीं पाएगा। क्योंकि जब गांधी का जिक्र होगा तो उनके स्वतंत्रता आंदोलन का विरोध करने वालों और अंग्रेजों के लिए मुखबिरी करने वालों का नाम आएगा। गांधी के हत्यारे और आजाद भारत के पहले आतंकवादी का भी नाम आएगा। चालाक जातियों के सांस्कृतिक गिरोह को तकलीफ इसी बात से है। अगर ये लोग भाड़े के लेखकों से स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास फिर से भी लिखवा लेंगे तो भी सोशल मीडिया के जमाने में अंग्रेजों के लिए की गई मुखबिरी और गांधी की हत्या का दाग कैसे धोया जा सकेगा।

शिवसेना ने महाराष्ट्र में अपनी जड़ें छत्रपति शिवाजी का नाम लेकर जमाईं। भाजपा और चालाक जातियों का सांस्कृतिक गिरोह यह काम माफी गुरु और आतंकवादी नाथूराम गोडसे की आड़ में महाराष्ट्र में अपनी पैठ बनाने के लिए करना चाहता है। मराठियों को अब खुलकर बताना होगा कि वो दरअसल गांधी के हत्यारों को कितना सम्मान देने को तैयार हैं।

जो पार्टी हर अवसर का इस्तेमाल वोट के लिए करे, खुद को राजनीतिक रूप से मजबूत करने के लिए करे, उस देश में गांधी की हत्या को सही ठहराने वालों का गिरोह कुछ भी कर सकता है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है कि कब गांधी आपकी जिंदगी में खलनायक के रूप में पेश कर दिए जाएं और आपको पता भी नहीं चले। ताज्जुब है कि गांधी के देश में गांधी के विचारों को मानने वाली पार्टियों, संगठनों, समाजसेवियों से यह तक नहीं हो सका कि गोडसे को देशभक्त बताने वाली के खिलाफ एक-एक एफआईआर हर शहर में विरोधस्वरूप दर्ज करा देते। इसलिए गांधी पर रुदाली बंद करके पहले इन मोहतरमा का न्यायपालिका के जरिए बिस्तर बांधने का इंतजाम करिए।
विशेष नोट ः गांधी और गोडसे सीरिज में इस लेख के जरिए कुछ नए मुहावरे या सांकेतिक शब्द दिए जा रहे हैं, वह हैं -  चालाक जातियों का सांस्कृतिक गिरोह...माफी गुरु। कृपया इन दोनों सांकेतिक शब्दों का इन दोनों संदर्भों में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर इसे लोकप्रिय बनाएं।

#GandhiandGodse
#Gandhi
#Godse
#SafroonTerror
#FirstTerroristofIndia







Friday, November 22, 2019

सतीश मुख्तलिफ की कविता : हत्यारे और बलात्कारी, सब नुमाइंदे बन बैठे

खरोंच-खरोंच कर खा गए, खोखला बना दिया 
चंद गुजरातियों ने मुल्क को ढोकला बना दिया

कहां तो देश सोने की चिड़िया हुआ करता था
जाहिलों ने इसे कौव्वों का घोंसला बना दिया

हत्यारे और बलात्कारी, सब नुमाइंदे बन बैठे
क़ानूनी तौर-तरीकों को ढ़कोसला बना दिया

मीडिया को पोपट और प्रवक्ताओं को जोकर
विपक्ष को गूंगा, जनता को तोतला बना दिया 

विकास के नारे फक़त कुर्सी तक सिमट गए  
चुनावी वादों को फ़क़त जुमला बना दिया 

ज़ुर्म के ख़िलाफ़ बोलना भी अब ज़ुर्म हो गया 
गलत - सही के फ़र्क़ को, धुंधला बना दिया 

अरे अक़्ल के दुश्मनों, ज़रा अक़्ल से काम लो  
अंधभक्ति ने तुम्हारी तुमको दोगला बना दिया 

गर्दन पे लिए फिरते हो अपनी, सैकडों चेहरे
रीढ़ की हड्डी को अपनी, खोखला बना दिया  

सतीश मुख़्तलिफ़

Sunday, November 10, 2019

क्योंकि वे मुसलमान थे...

सुनो ऐ अल्लाह वालों...सुनो ऐ मोहम्मद के अनुयायियों सुनो...

आप सभी को ईद मिलादुन नबी बहुत मुबारक हालाँकि मैं खुद 17 रबी उल अव्वल को पैगंबर साहब का जन्मदिन मनाता हूँ। ख़ैर यह कोई मसला नहीं है, जिसका जब दिल करे मनाये।

यह पहली ऐसी मिलादुन नबी है जब आप उदास हैं। हालाँकि आपकी ख़ामोशी ने उन धार्मिक आतंकियों को हरा दिया है, जिनके मंसूबे कुछ और थे।

क्या कोई अदालती फ़ैसला आपका मुस्तकबिल (भविष्य) बदल देगा...

ज़रा अपने हंगामाखेज और गौरवशाली अतीत पर नज़र डालिए...याद कीजिए...

क्या आप भूल गए...जब आपके पास न हवाई जहाज थे, न मिसाइलें थी, ऐसे वक्त में आप अपने घोड़े दौड़ाते हुए रेगिस्तान, पहाड़, नदियों को रौंदते हुए आए और भारत वर्ष पर छा गए। उस वक्त आपके पास गोला बारूद था। आपने धनुष बाण वालों को गोला बारूद का फॉरमूला दिया और बताया कि युद्ध कैसे जीते जाते हैं। आपने ख़ैरात, ज़कात, खुम्स से दूसरों की ग़ुरबत को मिटा दिया। आपने खाने-पीने, जिंदगी जीने का नया हुनर दिया जो तब तक इन मामलों में पिछड़े हुए थे।

आपने यहाँ की धरती को अपना लिया। ख़ून पसीने से सींचने लगे। महल तैयार कर दिये। लाल क़िला खड़ा कर दिया, ताजमहल खड़ा कर दिया, नदियों पर पुल बना डाले, पेशावर तक शेरशाह सूरी मार्ग बना डाला जिसे आज हम गर्व से नैशनल हाईवे के फलाने ढिमाके नंबरों से जानते हैं।...

आप अल्लामा इक़बाल के अशार की उन लाइनों को भूल गए - दश्त तो दश्त हैं दरिया भी न छोड़े हमने, बहरे जुल्मात पर दौड़ा दिये घोड़े हमने..

.आप देवी प्रसाद मिश्र की उस प्रसिद्ध कविता (वो मुसलमान थे) को भी भूल गये।....आपने अशफाकुल्लाह खान और वीर अब्दुल हमीद जैसे अनगिनत सपूत दिये। आपने दो-दो कलाम और ए आर रहमान दिया...

आप भूल गये कि आपने अंग्रेज़ों के खिलाफ इस देश की ख़ातिर युद्ध किया और आपके पुरखों को यहाँ दफ़न करने को दो गज़ ज़मीन भी न मिली...और वो रंगून (म्यांमार) में दफ़न हुए...

...आप के किसी पुरखे ने अंडमान की जेल (कालापानी) से न तो अंग्रेज़ों को माफ़ी वाला ख़त भेजा और न राय बहादुर की पदवी माँगी और न ही किसी ‘गांधी’ नाम को क़त्ल किया। आप भूल गये आपके पुरखों ने यहाँ तक्षशिला के बाद सबसे पहली बड़ी यूनिवर्सिटी (एएमयू) क़ायम की और उसके बाद उसी की तर्ज़ पर हमें बीएचयू भी नसीब हुई। आप मिसाल बन गये- आप बेमिसाल हो गये।

फिर आपकी उदासी का सबब जायज़ नहीं है।

भाजपा के मंदिर राग और कांग्रेस के साफ्ट हिंदुत्व के खेल के बावजूद अगर आप लोग शांत (मुतमइन) हैं तो आप लोगों को इस धैर्य को न खोने देने वाले जज़्बे को कई लाख सलाम...

वोट के लिेए मची जंग का सबसे घिनौना चेहरा अभी आना बाकी है...। वह सब होने वाला है, जिसकी आपने कल्पना नहीं की होगी।...

उनके पास हर तरह की ताक़त है। अब तो अदालत पर भी जज ही सवाल उठा रहे हैं। हर नया दिन साजिशों से शुरू हो रहा है। लेकिन अगर आप लोग किसी उकसावे में नहीं आए तो यक़ीन मानिए बाकी ताक़तें अपने मकसद में नाकाम हो जाएंगी।

अभी आपको शिया-सुन्नी ...अशरफ़-पसमांदा...बरेलवी-देवबंदी-कादियानी-इस्माइली-खोजा-बोहरा, सैयद-पठान जैसे फ़िरक़ों या बिरादरी में बाँटने की हरचंद कोशिशें होंगी।

लेकिन रसूल का पैग़ाम क्या आपको याद है- मैंने अल्लाह की जो किताब तुम लोगों तक पहुँचाई उसमें सिर्फ सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय (Social Equality and Social Justice) की बात लिखी गई है। अल्लाह के लिए न कोई अव्वल है न अफ़ज़ल। सब बराबर हैं। आप सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के  रसूल की उम्मत समझकर एकजुट रहना है।

अभी जब अयोध्या पर फ़ैसला आया तो देश विरोधी, एकतरफ़ा राष्ट्रवाद को पोषित करने वाली उग्रवादी ताक़तों को उम्मीद थी कि आप लोगों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रिया होगी और पूरा माहौल बदल जाएगा। लेकिन आप लोगों की प्रतिक्रियाविहीन खामोशी ने उनका ब्लडप्रेशर बढ़ा दिया है । उनकी पूरी रणनीति पर पानी फिर गया। उन्हें आप से ऐसी उम्मीद नहीं थी।...वो बेचैन हैं और एक बिफरा हुआ इंसान सौ गलतियां करता है। आप बस खामोशी से इस तमाशे को देखिए।

इससे  सामने वाले पर इतना फर्क पड़ने वाला है कि उसकी कई पीढ़ियां याद रखेंगी। यही वजह है कि सामने वालों में बहुत बड़ी तादाद में समझदार लोग इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। लेकिन उनकी कोई सुन नहीं रहा है। आपको हर हाल में खामोश रहना है। यहां तक कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनके साथ भी शामिल नहीं होना है। ...आपको घेरने की हर कोशिश नाकाम हो जाएगी...अगर यह खामोशी बरकरार रही। ...यह उस तरफ के समझदार लोगों को सोचने दीजिए कि वो इन ताकतों का मुकाबला कैसे करेंगे।

...दरअसल, वो लोग जातियों में बंटे हुए हैं और उसी हिसाब से वे अपनी रणनीति बनाते हैं। उनकी जातियों के मसले आपके फिरकों से बहुत ज्यादा टेढ़े हैं। उनमें जो दबे कुचले लोग हैं, वो ढुलमुल यकीन हैं। कभी इस तरफ होते हैं तो कभी उस तरफ होते हैं।

आपकी तरक्की का राज कुरानशरीफ में छिपा है।...इल्म हासिल कीजिए। पढ़ा लिखा इंसान बड़ी से बड़ी दुनियावी ताकत को हरा सकता है। मुझे मालूम है कि आपको नौकरियां नहीं मिल रही हैं। लेकिन अगर आपके पास इल्म है और कोई रोजगार करना चाहते हैं तो बाकी लोगों के मुकाबले आप उस रोजगार बेहतर तरीके से कर सकेंगे।

पैगंबर के नाम पर आज से पूरी दुनिया में अगले एक हफ़्ते तक पैगंबर दिवस मनाया जा रहा है। इस दौरान मैं आप लोगों को सुझाव दे रहा हूं कि आप लोग सारी राजनीति से किनारा करते हुए इस दौरान इन चीजों पर अमल करें।...
-पेड़ पौधे लगाएं और लोगों में बांटें
-जिन पेड़ों को पानी न मिल रहा हो, उन्हें पानी से सींचें
-अपने आसपास की सड़कों और नालियों को साफ करें
-इस पोस्ट का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें
-सबील लगाएं और साधन संपन्न लोग गरीबों को जूस पिलाएं
-अपने आसपास रहने वाले गरीबों और जरूरतमंदों की किसी भी रुप में मदद करें
-किसी यतीमखाने (अनाथालय) और ओल्ड ऐज होम (वृद्ध आश्रम) में जाएं
-अस्पताल और जेलों में जाएं
-वहां गरीबों के बीच खाना, कपड़ा, कंबल बांटें
-अगर हैसियत वाले हैं तो व्हीलचेयर, छड़ी या उनके काम आने वाला सामान बांटें
-स्कूलों में शांति मार्च आयोजित करें
-मुफ्त मेडिकल चेकअप कैंप लगाएं...यह पूरी तरह नॉन कमर्शल हो
-रक्तदान शिविर आयोजित करें
-लोगों को सेहत और सफाई के बारे में जागरूक करें
-सरकारी स्कूलों और स्पेशल बच्चों (मूक बधिर) के स्कूलों में जाएं और वहां स्टेशनरी बांटें
-जिनसे संभव हो सके वो स्कॉलरशिप बांटे...यानी कुछ पैसे गरीबों के बच्चों को दें
-पैगंबर की जिंदगी के बारे में स्कूल के बच्चों को बताएं, उनसे सवाल पूछें
-बच्चों को पढ़ाई और उनके करियर के बारे में जागरूक करें
-पैगंबर के कोट्स या चुनिंदा कही बातों का वितरण करें
-अॉटो, रिक्शा, ईरिक्शा, कैब में बैठी सवारियों को कलम बांटें
-पोस्टर चिपकाएं, बैनर चिपकाएं
-शहर में कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप आयोजित करें
-इस पोस्ट का ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें

वसीयत....
मैं फिर से ईद-ए-मोबाहिला में कही गई रसूल अल्लाह की वसीयत दोहरा रहा हूं जिसे आप लोग भूलते जा रहे हैं...

-अगर कुरान और मेरे अहलेबैत का दामन थामे रहे तो किसी भी दुनिया में तुम लोगों को शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा...तुम लोग जिंदा कौम की एक बेहतरीन मिसाल हो...अपनी ताकत को पहचानो।...

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Friday, November 8, 2019

मुसलमानों के पास खोने को क्या है...

अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या बाबरी मस्जिद को उसकी जगह वापस मिलने का संभावित फ़ैसला आने में अब कुछ घंटे बचे हैं।

सवाल यह है कि अगर फ़ैसला मंदिर के पक्ष में आया तो मुसलमान क्या करेंगे...

मुसलमानों को एक बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि इस सारे मामले में न तो उनका कुछ दाँव पर लगा है और न ही उनके पास कुछ खोने को है। अगर इस मामले में किसी का कुछ दाँव पर लगा है या कुछ खोने को है तो वह हैं दोनों धर्मों के उलेमा, राजनीतिक नेता, उनके दल, महंत, शंकराचार्य, अखाड़ों और बिज़नेसमैन बन चुके बाबा। 

जिस जगह पर विवाद है, वहाँ पाँच सौ साल से विवाद है। अयोध्या में पहने वाले मुसलमानों ने तो वहाँ जाकर एक बार भी नमाज़ पढ़ने की कोशिश नहीं की। फिर बाहरी मुसलमान आज़म खान और अौवैसी ने क्या वहाँ कभी जाकर नमाज़ पढ़ने की कोशिश नहीं की। मेरे वतन के मुसलमान अयोध्या और फ़ैज़ाबाद की मस्जिदों में शांति से नमाज़ पढ़ रहे हैं।

अगर फ़ैसला मस्जिद के पक्ष में भी आ जाता है तो भी अयोध्या में रहने वाले मुसलमान पुरानी जगह पर नमाज़ पढ़ने के लिए नहीं जायेंगे। आज़म या ओवैसी रोज़ाना तो आने से रहे।

इसलिए फ़ैसला जो भी आये, वहाँ मंदिर बनने देना अक़्लमंदी होगी और आप यक़ीन मानिये कि अगर वहाँ मंदिर बना तो इसके नतीजे पूरे भारत के लिए बेहतर होंगे।....इसके बाद यह देश तय कर देगा कि ग़रीबी, बेकारी, भुखमरी, बर्बाद होती खेती के बजाय वह हिंदुत्व का एजेंडा चलने देगा या नहीं।

आपकी आबादी इस देश में महज़ 35 करोड़ है। आप तो जी खा लेंगे। चाहे छोटा काम करके या बड़ा काम करके। आप लोगों के पास हुनर की कमी नहीं है।....आप भी तो तमाशा देखिये कि इस देश का बहुसंख्यक तबक़ा आख़िर कब तक अपने मूल मुद्दों को दरकिनार करके सिर्फ मंदिर बनाकर तरक़्क़ी करना चाहता है।

अगर फ़ैसला आने के बाद बहुसंख्यक समुदाय ख़ुशियाँ मनाता है, आप सिर्फ सब्र रखें। किसी तरह की प्रतिक्रिया या उछलकूद की ज़रूरत नहीं है। आपके ग़ुस्सा करने या चीख़ने चिल्लाने से अदालत का फ़ैसला नहीं बदलेगा।

आपको समझना होगा कि कांग्रेस से लेकर सपा, बसपा, भाजपा ने आपके साथ छल किया है। कुछ उलेमाओं और मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने आपको बहकाया है, आपके जज़्बात के साथ खेला है। यह लंबा विषय है। जिनकी कुछ घटनाओं का मैं भी चश्मदीद हूँ।

बहरहाल, धर्म एक निजी आस्था है। हर एक का मज़हब अच्छा है। ....अगर धर्म के नाम पर किसी देश ने तरक़्क़ी की हो या उस क़ौम ने तरक़्क़ी की हो तो उसका नाम बताइये।...किसी धर्म पुस्तक ने अगर मिसाइल, बम का फ़ॉर्म्युला अपनी किताब में लिखा है तो बताइये। 

पैगंबर साहब और उनके परिवार की हिदायतों पर आपने अमल किया होता तो इतना ज़लील और रुसवा आज नहीं होना पड़ता। आपसे दीन-दुनिया के बीच में बैलेंस बनाने को कहा गया था, अाप नेताओं के बहकावे में आकर सिर्फ दीन से चिपके रहे। अरे भाई दीन आपकी आस्था है, आप उसे इज़्ज़त का सवाल बना रहे हैं। जिसने दीन और किताब भेजी है, वह अपना ख़्याल खुद रखेगा। आपको अल्लाह की ज़रूरत है। उसे आपकी ताक़त से कोई युद्ध नहीं जीतना है। 

क्या आपकी नज़र से वह फोटो और वीडियो नहीं गुज़रा जिसमें मोदी और सऊदी अरब का प्रिंस बिज़नेस डील करते दिखाई दे रहे हैं। खुद को मक्का का कस्टोडियन बताने वाला आले सऊद मोदी के लिए रेड कारपेट बिछा रहा है, मंदिर के लिए ज़मीन दे रहा है।

ख़ैर, कैसा भी फ़ैसला आने पर अगर कहीं कोई उग्रवादी ग्रुप दंगे की शुरुआत करता है या किसी समुदाय को परेशान करता है तो उससे निपटने के लिए सरकार और सरकारी बंदोबस्त है। आपको किसी भी ट्रैप में आने की जरूरत नहीं है। किसी अफवाह को आगे न फैलाने पर डटे रहना है। एक मामूली चिंगारी सब कुछ खाक कर सकती है।...आपका ही घर उस आग में नहीं जलेगा।...

आमतौर पर किसी भी देश में सब कुछ संभालने और सांप्रदायिक सद्भाव बनाये रखने की ज्यादा जिम्मेदारी उस देश के बहुसंख्यक समुदाय की होती है लेकिन आप लोग भी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते।

भाजपा, संघ, तमाम हिंदूवादी संगठनों, मीडिया और तटस्थ कॉरपोरेट ग्रुप्स के पास यह आखिरी मौका है कि आगे इस देश को क्या दिशा मिलने वाली है।

संविधान की कसम लेकर देश चलाने वाले बहुसंख्यक समाज के नेता अगर ‘प्रभावित करने वालों को’ अपने सत्ताबल और ताकत के दम पर प्रभावित कराना चाहते हैं तो समझिये उनके पास खोने को ज्यादा है।

मंदिर बन गया और मुसलमान चुप रहा तो समझिए आपने उन्हें हरा दिया। आपने एक बड़ी लड़ाई जीत ली। आपकी जीत इसी में है कि बिना किसी बाधा के वहां मंदिर बन जाए और आप उफ भी न करें। आपकी एक चुप्पी सारे निजाम पर भारी पड़ेगी। सारे धार्मिक उग्रवादियों पर भारी पड़ेगी।


आपके सब्र का इम्तेहान शुरू होता है अब...