भगवान से भी धंधा...पूजा पाठ की मार्केटिंग का लाइव प्रसारण...

 
तुम्हारे पूजा-पाठ पर सवाल नहीं...तुम्हारी आस्था पर चोट नहीं...

लेकिन यार... क्या तुम्हारी कोई प्राइवेसी नहीं है...ध्यान तो तुम अकेले में ही करोगे, फिर तुम्हें वहां मीडिया की जरूरत किसलिए है...तुम अपना पूजा पाठ देश की जनता को क्यों दिखाना चाहते हो।...सुबह उठकर मंदिर और मस्जिदों में इबादत करने वाले अपनी आस्था का प्रदर्शन यूं तो नहीं करते।

क्या तुमने अमेरिका के राष्ट्रपति...ब्रिटेन की प्रधानमंत्री को लाइव किसी चर्च के मास प्रेयर में देखा है। ...क्या तुमने सऊदी अरब के सुल्तान को कभी मक्का में तवाफ करते लाइव देखा है...क्या तुमने कर्बला में किसी धर्मगुरु के जियारत का लाइव प्रसारण देखा है...
 
हां, तुमने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री का लाइव प्रसारण जरूर देखा होगा जब वह अपनी आस्था को ताक पर रखकर हिजाब बांधकर न्यूजीलैंड के अल्पसंख्यकों के घावों पर मरहम लगाने पहुंच गई थी।...लेकिन फिर भी तुमने शर्म महसूस नहीं की।

तुमने अपनी धार्मिक आस्था के लाइव प्रसारण को बच्चों का बाइस्कोप बना दिया है।

आखिर तुम वहां किस चीज की मार्केटिंग कर रहे हो...क्या संवैधानिक पद पर बैठा तुम्हारे जैसा शख्स प्रधानमंत्री कैमरे के साथ पूजा पाठ करता है...क्या वो अपनी आस्था का लाइव प्रसारण कराता है...


हमने उस सरदार को कभी किसी गुरुद्वारे या दरबार साहिब में मत्था टेकते हुए लाइव नहीं देखा....वह भी तुम्हारी तरह दरबारी मीडिया ले जा सकता था। उसके पास भी सरकारी मीडिया था, लेकिन क्या कभी किसी ने उसकी आस्था का भोंडा प्रदर्शन देखा....

दरअसल, इस पूजा पाठ में तुम्हारा एक खास रंग का प्रदर्शन बता रहा है कि तुम बहुसंख्यक तुष्टिकरण की नीति पर चल रहे हो।

किसी लोकतांत्रिक देश में बहुसंख्यक तुष्टिकरण भी एक तरह का दबंगपन है।

बहुसंख्यक तुष्टिकरण से देश टूट जाते हैं।बहुसंख्यक तुष्टिकण किसी भी देश में अराजकता को बढ़ाते हैं।

बहुसंख्यक तुष्टिकरण की आड़ में किसानों के सवाल, बेरोजगारी के सवाल, महिला सुरक्षा के सवाल, गरीब बच्चों के कुपोषण के सवाल, असंगठित मजदूरों के सवाल खत्म हो जाते हैं।

दरअसल, तुम्हारी आस्था, तुम्हारा पूजा पाठ भी एक धंधा है। तुम वहां भगवान से बिजनेस डील करने गए हो। तुम बहुसंख्यकों के लिए एक ऐसे राष्ट्र की डील करने गए हो जिसे देश के करोड़ों मेहनतकश लोग नामुमकिन बना देंगे।...




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