Saturday, January 5, 2019

अलीबाबा के जैक मा की बातें और अपना देश भारत...

यहां मैं आप लोगों के लिए एक विडियो पोस्ट कर रहा हूं जो पूरा देखने के बाद आपको सोचने को मजबूर कर देगा। हालांकि उसमें कही बातों को मैं अपनी बात के साथ आप लोगों के पढ़ने के लिए यहां दे रहा हूं। लेकिन हो सकता है कि अनुवाद में कुछ कमियां हों, इसलिए अगर आप पूरा विडियो देखेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा।

दुनिया की बड़ी कंपनियों में गिनी जाने वाली अलीबाबा (Alibaba) के मालिक जैक मा (Jack Ma) को हाल ही में हॉगकॉग यूनिवर्सिटी ने पीएचडी से नवाजा है। इस मौके पर जैक मा ने जो बातें कहीं हैं, उसका संबंध भारत से या किसी भी देश से जुड़ता है।...
जैक मा कहते हैं...
तमाम नाकामियों की वजह से मैं यही सोचता था कि कभी मुझे पीएचडी की डिग्री किसी यूनिवर्सिटी से मिलेगी। यह मेरा सपना था। लेकिन मैं हिम्मत नहीं हारा। एक दिन ऐसा भी आता है जब कोई यूनिवर्सिटी आपको पीएचडी की डिग्री देने को बेताब होती है...
एक अच्छा बिजनेसमैन सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं जानता, बल्कि उस पैसे को अच्छी तरह खर्च करना भी जानता है। लेकिन हम सिर्फ पैसा कमाने के लिए जिंदा नहीं रहते।...अगर आपके पास 10 लाख डॉलर हैं, वो आपका पैसा है...जब आपके पास 10 लाख डॉलर होते हैं, दरअसल, तब समस्या खड़ी होती है।...लेकिन जब आपके पास 100 लाख डॉलर होते हैं तो आपको मान लेना चाहिए कि वो आपका पैसा नहीं है।...यह पैसा उस सोसायटी का विश्वास होता है जो पैसे के रूप में आपके पास पहुंचा है। सोसायटी या लोग आपको पैसा इसलिए देते हैं कि उन्हें यकीन है कि वो पैसा आप ठीक से खर्च करेंगे।...असली बिजनेसमैन वही है जो उस पैसे का इस्तेमाल दूसरों की सामाजिक समस्याओं को खत्म करने के लिए करता है। यानी वह ऐसे काम करता है, जिसका फायदा सोसायटी को मिलता है।

(फिर वह विषय बदलते हैं) वह कहते हैं...
मुझे लगता है कि तमाम बड़ी चुनौतियों के बीच सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा के क्षेत्र में है। तमाम बड़ी बड़ी यूनिवर्सटियां इसका सामना कर रही हैं।...हमने अपने बच्चों को पिछले 200 सालों में यही पढ़ाया है कि मशीनें बहुत अच्छा करेंगी। यानी बड़ी बड़ी मशीनों के अविष्कार हमने अपनी जरूरतों के लिए किया।...लेकिन अब हमें सोचना होगा कि हम अपने बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए उन्हें ऐसा क्या पढ़ाएं...मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों को पढ़ाना चाहिए कि वो मशीनों पर कैसे जीत हासिल करें...ना कि मशीनें उन पर हावी हो जाएं या जीत हासिल कर लें।...क्योंकि मशीनों में तो चिप लगी होती है लेकिन इंसान के पास तो दिल है।...
इसलिए हमें अब एजुकेशन सिस्टम को बदलना होगा। भविष्य जानकारी (Knowledge) रखने की प्रतियोगिता का नहीं है। ...भविष्य कुछ सृजन (Creativity) करने और कल्पनाशीलता (Imagination) का है। ...भविष्य की प्रतियोगिता कुछ सीखने और स्वतंत्र सोचने की है।...लेकिन अगर आप एक मशीन की तरह सोचेंगे तो समस्या पैदा होगी।...पिछले 20 वर्षों में हमने इंसान को मशीन बना दिया है।..इसलिए भविष्य जानकारी (Knowledge Driven) रखने वालों का नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता पूर्ण (Wisdom Driven) लोगों का होगा... यह अनुभवी लोगों का होगा... जबकि अतीत में यह जानकारी रखने वालों और निर्माण करने (Manufacturing Driven) वालों का था।...भविष्य सृजन करने (Creativity Driven) वालों का है। ...दुनिया इसी पर खुद को केंद्रित करने वाली है।

मेरी बात...
जैक मा ने जितनी बातें कहीं हैं, उन पर हम भारतीय संदर्भों में लंबी चौड़ी बातें कर सकते हैं।...लेकिन संक्षेप में कुछ बातें तो की ही जानी चाहिए।...आप लोग जैक मा की शुरू में कही गई बातों पर गौर करिए - वह कहते हैं कि जो अथाह पैसा आपके पास आया है, वह आपको सोसायटी ने दिया है। सोसायटी आपको इस पैसे को सही से खर्च करने के यकीन के साथ देती है...
मैं आपको यहां पर मुकेश अंबानी की बेटी की शादी में खर्च किए 110 करोड़ रुपये (Bloomberg के मुताबिक) का उदाहरण देना चाहूंगा।...मुकेश अंबानी की कंपनियों ने जो भी पैसे कमाए...वह सारे पैसे भारतीय लोगों से यानी हम लोगों से कमाए गए पैसे हैं। हम लोगों ने वो पैसा उन्हें चाहे जियो (Jio) के फोन और सिम खरीद कर दिया हो या विमल शूटिंग (Reliance Industries) के कपड़े खरीद कर दिया हो या उनके पेट्रोल पंप से पेट्रोल खरीद कर दिया हो या उनकी कंपनियों के शेयर खरीद कर दिया हो...लेकिन अंबानी के पास पैसा भारत के लोगों का है।...उस शख्स ने हमारे दिए गए पैसे में से 110 करोड़ रुपये अपनी बेटी की शादी पर खर्च कर दिए।...जैक मा यही कहते हैं कि आप देश के लोगों से अथाह पैसा लेने के बाद आप उस सोसायटी या देश के लिए जवाबदेह हो जाते हैं।...देश के लोगों ने आप पर यकीन किया है। आप उस पैसे को समाज पर खर्च कीजिए...उस यकीन को मत तोड़िए।...लेकिन मुकेश अंबानी की कंपनियों ने जनता को निचोड़ने के बाद जो पैसा अपने मालिक को दिया...उस पैसे में से वह एक शादी में 110 करोड़ उड़ा देता है...वह उस पैसे से एक देश की सरकार को चलाता है। उसके पैसे से राजनीतिक दल पाले-पोसे जाते हैं।...
सोसायटी का यकीन पैसे के रूप में अंबानी को मिला...अंबानी खानदान ने उस पैसे से पूरी सत्ता खरीद ली...अब वो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है।

एक शादी विप्रो (Wipro) कंपनी के मालिक अजीम प्रेमजी ने भी की। अपने बेटे की शादी में उन्होंने कार्ड पर साफ लिखा था कि आपको दूल्हा-दूल्हन को कोई गिफ्ट वगैरह देने की जरूरत नहीं है। आप जो कुछ देना चाहते हैं वह इस एनजीओ को दें, वह देश में लड़कियों का 250 स्कूल खोलने जा रही है। सारा पैसा उसी में लगाया जाना है। करीब 250 करोड़ रुपये उस एनजीओ को मिले। ...यह सारा रेकॉर्ड भारत सरकार के पास है, और वह हैरानी से अजीम प्रेम जी द्वारा की गई कोशिश का अध्ययन कर रही है कि क्या ऐसा भी हो सकता है। जैक मा जो कहना चाहते हैं उस मानक पर अजीम प्रेमजी पूरी तरह खरे उतरे और मुकेश अंबानी....। दोनों ही सफल बिजनेसमैन हैं। लेकिन दोनों की सोसायटी के प्रति जवाबदेही देखने लायक है...

जैक मा की अब अगली बात पर आते हैं। जिसमें उन्होंने नॉलेज और क्रिएटिविटी की तुलना की है और कहा है कि भविष्य क्रिएटिविटी का है। मसलन, यह एक क्रिएटिविटी है, जिसके तहत मैं आपको यह लेख पढ़ा रहा हूं। मैंने जैक मा के संदर्भ में यह लेख लिखा और आपको पढ़ाने की कोशिश कर रहा हूं। यह क्रिएटिविटी मैं सोसायटी के लिए कर रहा हूं ताकि इससे समाज में सकारात्मक या अच्छे विचारों का आदान-प्रदान हो। लेकिन जैक मा ने जो सबसे बड़ी बात इसमें कही वो यह कि पिछले 20 साल में हम लोगों ने इंसान को मशीन बना दिया है। ...जैक मा कहना चाहते हैं कि जबसे इंसान मशीन बना है, उसकी क्रिएटिविटी खत्म होती जा रही है। आइंस्टीन ने अपना फॉर्म्युला बम बनाने के लिए नहीं दिया था...उसे हिरोशिमा नागासकी पर गिराकर कई इंसानी नस्लें खत्म करने के लिए नहीं दिया था...ऐसे तमाम अविष्कार या फॉर्म्युले हैं जिन्होंने इंसानों को मशीनों का गुलाम बना दिया है।...उन्होंने एक बात अनुभव के संदर्भ में भी कही है कि भविष्य अनुभवी लोगों का भी होगा।...लेकिन आज हम लोग क्या देख रहे हैं कि नॉलेज की कीमत तो है लेकिन अनुभव की कीमत खत्म कर दी गई है। अनुभव पर नॉलेज को तरजीह दी जा रही है लेकिन एक अनुभवी आदमी ही नॉलेज का सही इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन अनुभवहीन की नॉलेज खतरनाक रूप ले लेती है। अनुभवहीनता की वजह से नॉलेज होते हुए भी तमाम बड़ी गलतियां सामने आती हैं। 
बहरहाल, जैक मा से आप सहमत हों या न हों...लेकिन उनकी इन बातों पर नाराज तो नहीं होंगे ना। 

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