Friday, February 2, 2018

फिक्सर्स के देश में बिलबिलाते लोग


देश को फिक्सर्स चला रहे हैं...

वह कोई भी देश हो सकता है। अपना भी हो सकता है। पड़ोस हो सकता है। सात समंदर पार हो सकता है। मतलब कि वह कोई देश है जिसे सब लोग फ़िक्स करने में जुटे हैं।...जी हाँ, वही देश महाराज, जिस आप कहा करते हैं कि यह भी कोई देश है महाराज...

...तो यक़ीन मानिए यहां सब कुछ फ़िक्स है। यह देश फिक्सर्स के क़ब्ज़े में है।... क्रिकेट मैचों के फिक्सर्स के वक़ील उन्हें सरकार में डिफ़ेंड (बचाव) करते हैं। यही फिक्सर्स इंश्योरेंस लॉबी के गेम को बजट में फ़िक्स करते हैं...यही फिक्सर्स अदालत में खड़े होकर आवारा पूँजीवाद के झंडाबरदारों का केस फ़िक्स करते हैं...आप फँस चुके हैं। फिक्सर्स आपको भागने नहीं देगा।...आप कहाँ तक भागोगे।....

कहीं भी चले जाओ हर जगह छोटा मोटा फिक्सर आपको मिल जाएगा। रेलवे आरक्षण केंद्र पर जाओ फिक्सर हाज़िर मिलेगा। बच्चे का एडमिशन सरकारी स्कूल तक में कराना हो तो फिक्सर की सेवाएँ उपलब्ध हैं। हर मंत्री के दफ़्तर के बाहर तो फिक्सर बाक़ायदा तैयार किए जाते हैं। ...हद तो तब हो गई जब मैं अपने ताऊ जी का मृत्यु प्रमाणपत्र लेने नगर निगम गया तो वहाँ का क्लर्क बिना फिक्सर बात करने को तैयार ही नहीं था। ...कहते हैं कि ज़िला लेवल पर कोर्ट के बाहर सड़क पर फिक्सर खड़े रहते हैं जहाँ आप पहुँचे नहीं कि जेब कटी नहीं।...




...पंजाब में मेरा एक आईपीएस दोस्त था। काम के लिए कहा तो उसने पूरा आदर्शवाद झाड़ दिया। ...उसके दफ़्तर के बाहर मैं एक दरोग़ा को अक्सर मँडराते देखता था। उससे कहा। उसने फ़िक्सिंग की फ़ीस बताई। ...तीन घंटे बाद सब फ़िक्स था। ...मैंने अपने उस आईपीएस दोस्त को कभी नहीं बताया कि वह फिक्सर्स के रिंग में है।...वह झेंप जाता और फिर आगे से क्रांति की बातें नहीं करता।
...अब देखिए एक दरोग़ा किसी राज्य का डीजीपी बनने के लिए जनता के बीच मंदिर बनाने का मामला फ़िक्स कर रहा है। यह दरोग़ा भी उसी रिंग का हिस्सा है जिस रिंग का हिस्सा मेरा वह आईपीएस मित्र था। 

...मैंने कई फुलटाइम कामरेडों को फिक्सर बनते देखा...और देखा कि ट्रेड यूनियनों को उन्होंने कैसे फ़िक्स कर दिया।...

मैंने एक बड़े लेखक को फिक्सर बनते देखा...कई महिला लेखकों को फ़िक्स करते हुए वह अजर अमर हो गया। जिसकी अमर बेलें आज तमाम तरह की फ़िक्सिंग में लगी हुई हैं।

...आप तमाम तरह के फ़िक्सरों से अगर निकल भागना चाहें तो आगे एक बड़ा फिक्सर आपको हाँककर वहीं पहुँचा देगा फिर से फ़िक्स होने के लिए...

...क्योंकि आगे मीडिया बैठा है इनकी तरफ़ से फ़िक्स करने को...सबसे बड़े फिक्सर ने मीडिया की ड्यूटी इसी काम पर लगाई है...कि तुम हमारी फ़िक्सिंग का मुखौटा हो।

मीडिया तमाम फ़िक्सरों का मुखौटा है।

...एक दो दिन में फिक्सर मीडिया फ़र्ज़ी प्रायोजित पोल लेकर आता ही होगा। जिसमें बताया जाएगा कि ख़राब बजट, मिडिल क्लास की नाराज़गी व फलाने राज्य में उपचुनाव हारने के बावजूद फलाना अभी भी बहुत लोकप्रिय है। अगर अभी चुनाव हो तो फलाने फिक्सर की सरकार बनना तय है...उसे इतने फ़ीसदी फ़िक्स वोट मिलेंगे। 

...आइए चलें फ़िक्सिंग करते हैं। जय फ़िक्सिंग जय फिक्सर!!!!!


(फिक्सर का मतलब दलाल से है...यानी वह शख़्स जो सबकुछ किसी भी तरह किसी ख़ास ग्रुप के लिए हालात को अनुकूल बना दे...सेट कर दे)

1 comment:

Satish Saxena said...

देशभक्तों ने किया खाली,खजाना देश में !
धनकुबेरों को बिका, शाही घराना देश में !

बेईमानों और मक्कारों की छबि अच्छी रहे,
जाहिलों पर मीडिया का,मुस्कराना देश में !
http://satish-saxena.blogspot.in/2016/09/blog-post_10.html