Sunday, January 7, 2018

हद है...मेहरम पर भी राजनीति कर डाली !!!!

अब यह राज भी खुल गया कि भारतीय मुसलमानों का हर मुद्दा मौजूदा और इससे पहले रही केंद्र सरकारों के लिए सिवाय वोट बैंक की राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं रहा है।

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात रेडियो कार्यक्रम में मोदी ने हज पर जाने वाली महिलाओं का जिक्र किया और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की देखरेख में चलने वाले अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को बधाई भी दे डाली। मोदी ने कहा था कि भारत सरकार ने इस बार से 45 साल और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को मेहरम के बिना हज पर जाने की इजाजत दी है। इस बार कुल 1320 महिलाओं ने मेहरम के बिना हज पर जाने के लिए आवेदन किया और भारतीय हज समिति ने सभी के आवेदन स्वीकार कर लिए। इनमें से करीब 1100 महिलाएं केरल की हैं।




इस्लाम धर्म में मेहरम उस शख्स को कहते हैं जिसके साथ महिला की शादी नहीं हो सकती। मसलन महिला का बेटा, सगा भाई और पिता मेहरम हुए। 

सरकार के इस फैसले का मैंने ही नहीं तमाम मुस्लिम संगठनों और मुस्लिम विमर्श पर लिखने वालों ने स्वागत किया। लेकिन मोदी के इस बयान और दावे को फौरन ही हैदराबाद के सांसद और एएआईएमआईएम प्रमुख असाउद्दीन ओवैसी ने गलत बताया। ओवैसी ने बगैर मेहरम हज पर महिलाओं के जाने पर प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा का प्रतिवाद करते हुए कहा कि किसी दूसरे देश की सरकार जो काम पहले ही कर चुकी है उसका श्रेय प्रधानमंत्री को नहीं लेना चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि सऊदी हज प्रशासन ने 45 साल से अधिक उम्र की किसी भी देश की मुस्लिम महिला को बगैर मेहरम हज पर जाने की अनुमति दी है।

हमने ओवैसी के बयान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह शख्स हर बात में कूद पड़ता है और सरकार अगर कुछ अच्छा कर रही है तो जबरदस्ती हल्ला मचाता है। ओवैसी अड़े रहे और अपना बयान वापस नहीं लिया।
मैंने और तमाम मुस्लिम थिकंर्स ने ओवैसी के बयान के ऊपर मोदी के बयान को तरजीह दी और उसे सच माना।
लेकिन यह सच नहीं था। इसका भेद जल्द खुल गया। मोदी ने गलत बयानी की और ओवैसी का प्रतिवाद अपनी जगह ठीक था।

इस भेद को खोला जेद्दाह (सऊदी अरब) में भारत के महावाणिज्य दूत रहे अफजल अमानुल्ला ने। अमानुल्ला वही शख्स हैं जो नई हज नीति 2018 लाने वाली समिति के संयोजक थे और उन्होंने ही सरकार से इस तरह की सिफारिशें की थीं। उन्होंने आज एक इंटरव्यू में कहा कि इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है कि मेहरम वाली पाबंदी सऊदी अरब सरकार ने लगाई थी। यह रोक भारत सरकार की तरफ से थी और अब इसे हटाया गया है। इसे मैं बहुत बड़ा कदम मानता हूं। अमानुल्ला ने कहा कि मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि सरकार की तरफ से इतने वर्षों से यह रोक क्यों लगी हुई थी? नई हज नीति का मसौदा तैयार करने के दौरान हमने सऊदी प्रशासन से संपर्क किया तो पता चला कि उनकी तरफ से कोई रोक नहीं है। इस पाबंदी का उल्लेख दोनों देशों के बीच हर साल होने वाले हज संबंधी समझौते में होता था। यह पाबंदी भारत की तरफ से थी। ऐसे में हमने सिफारिश की कि यह रोक हटनी चाहिए और जिन महिलाओं का फिरका अनुमति दे उन्हें बिना मेहरम के हज पर जाने की इजाजत मिलनी चाहिए।

...तो यह बात साफ हुई कि मेहरम वाली रोक केंद्र सरकार की ओर से थी ना कि सऊदी अरब की ओर से। कम से कम इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को सच बयानी करनी चाहिए थी।
भारतीय राजनीति कुल मिलाकर बयानवीरों तक सिमट कर रह गई है। सत्ता पक्ष हो, विपक्ष हो, दोनों तरफ से कोई एक बयान आता है और फौरन राजनीति गरमा उठती है। हाल ही में एक बार में तीन तलाक को लेकर जो गलत बयान केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों ने की है, उससे सरकार ने अपनी विश्वसनीयता ही खोई है। ...और निकल कर क्या आया कि जल्दबाजी में तैयार किए गए इस बिल को सरकार पास नहीं करा सकी। अगर दोनों पक्ष इस पर बयान देने की बजाय ठंडे दिमाग से मिलकर बिल तैयार करते तो यह नौबत नहीं आती और इसी सत्र में यह बिल पास भी हो जाता। लेकिन भाजपा सरकार की मंशा कुछ और है। उसके पास एक सूत्री कार्यक्रम बस यही रहता है कि कभी मेहरम के बहाने तो कभी तीन तलाक के बहाने मुसलमानों को नीचा दिखाया जाए।...ऐसे कब तक चलेगा।...क्या सरकार रोटी-रोजी के मुद्दे भटककर ऐसे बेहूदा और फालतू के मुद्दे पर हिंदू-मुसलमान खेलती रहेगी...आप लोगों के सोचने और जागने का समय है।

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