Friday, January 19, 2018

हज सब्सिडी खत्म होने का मुसलमान स्वागत करें, पर क्यों...



नवभारत टाइम्स में आज 19 जनवरी 2018 को हज सब्सिडी पर प्रकाशित मेरा लेख, नीचे मूल लेख भी है
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मेरा मूल लेख
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केंद्र सरकार ने हज सब्सिडी यानी हज यात्रा के दौरान मिलने वाली सरकारी मदद को खत्म करने की घोषणा की है। कांग्रेस शासनकाल से ही कई उलेमा, मुस्लिम थिंकर्स, मुस्लिम संगठन मामूली सब्सिडी की इस मुफ्तखोरी को बंद करने की मांग कर रहे थे लेकिन केंद्र सरकार जबरन इसे दे रही थी। दरअसल, मुसलमानों पर यह थोपी गई सब्सिडी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय से लेकर मोदी राज तक मुसलमानों को खुश करने की नीयत के साथ थी लेकिन इसका असल मकसद बर्बादी की गर्त में डूब रही एयरलाइंस एयर इंडिया को बचाने की चाल भी थी। सरकार एक तीर से दो शिकार कर रही थी। सब्सिडी खत्म होने से अगर कुछ मुसलमान आहत महसूस कर रहे हैं तो उन्हें इसकी बजाय खुश हो जाना चाहिए। उन्हें यह भी कहने या ऐतराज करने की जरूरत नहीं है कि सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आर्थिक सहायता दे रही है तो हज पर भी दे।

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से कहा था कि वह 2022 तक हज सब्सिडी पूरी तरह खत्म कर दे। लेकिन मोदी सरकार ने 2022 का इंतजार किए बिना यह पहल करके एक तरह से एहसान कर दिया है। आइए, सिलसिलेवार सारी बातें जानते हैं कि मुसलमानों को सब्सिडी खत्म किए जाने पर खुश क्यों होना चाहिए।

हज के बारे में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की तमाम हदीसें मौजूद हैं और जिन पर किसी भी मुस्लिम फिरके के बीच कोई विवाद नहीं है। हज सारे मुसलमानों पर वाजिब है। लेकिन आप कर्ज लेकर या घर की बड़ी जिम्मेदारी छोड़कर हज पर नहीं जा सकते। आप अपना लोन चुका नहीं सके और हज पर जाना चाहते हैं तो भी मना है। इसके अलावा और भी बहुत सी शर्ते हैं, जिनका संबंध इस्लाम धर्म से है। सब्सिडी एक तरह का ऐसा पैसा था जो हज यात्रा पर आपके जाने के लिए सरकार खर्च करती थी। आप इसे बेशक कर्ज न कहें लेकिन यह सरकारी मदद तो है ही, जिसकी वजह से आप हज पर जा रहे थे। ऐसी मदद की अनुमति इस्लाम हज के लिए नहीं देता था। लेकिन मुस्लिम धर्म गुरुओं का रुख लचीला था, तो सब्सिडी से की जा रही हज यात्रा पर किसी ने मुखर होकर ऐतराज नहीं उठाया। लेकिन मुसलमानों में कई फिरके ऐसे भी थे जो बिना कोई सब्सिडी लिए हज पर जाते हैं।

अन्य देशों के मुकाबले भारत से हज यात्रा महंगी है। तमाम गरीब मुसलमान इसके लिए अभी भी मनमसोस कर रह जाते हैं। मोदी सरकार को चाहिए कि वह जब सब्सिडी खत्म ही कर रही है तो उसे एक अध्ययन कर पता लगाना चाहिए कि बाकी देशों में हज यात्रा का क्या सिस्टम है। मलयेशिया का उदाहरण देना चाहूंगा। वहां की सरकार ने एक शरिया फंड बनाया हुआ है। हज करने के इच्छुक मुसलमान उस फंड में कुछ न कुछ पैसा डालते रहते हैं। जब वह पैसा इतना हो जाता है कि उससे हज यात्रा की जा सकती है तो मलयेशियन लोग हज के लिए अपने जमा किए गए पैसे से चले जाते हैं। ऐसा सिस्टम भारत में बनाया जा सकता है। सरकार या कोई भी गैर सरकारी संस्था ऐसा शरिया फंड शुरू कर सकती है।

हज पर सब्सिडी खत्म होने से प्राइवेट एयरलाइंस के लिए सुनहरा मौका है। तमाम एयरलाइंस भी इसे व्यवस्थित रूप देकर सस्ता एयर टिकट का प्रस्ताव लेकर आएं, उन्हें बहुत जबरदस्त बिजनेस मिलने वाला है। लेकिन भारत सरकार को प्राइवेट एयरलाइंस के पूरे व्यवहार पर नजर रखनी होगी कि वह अपना कर्टेल बनाकर हज यात्रा का टिकट और महंगा न कर दें। इस पर हम लोगों की भी नजर रहेगी और सरकार को आगाह करने का काम जारी रहेगा। प्राइवेट एयरलाइंस भी चाहें तो आपस में मिलकर शरिया हज फंड स्थापित कर सकती हैं। जिसमें हर मुसलमान कुछ न कुछ पैसा देता रहे। बीच में एयरलाइंस चाहे तो उस पैसे का इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने में लगाए और जब हज यात्री का नंबर आए तो वह ईमानदारी से बताकर सस्ती टिकट पर हज यात्री को ले जाए। लेकिन इसे शुरू करने से पहले एक सरकारी रेगुलेशन का होना जरूरी है।
हज सब्सिडी आज से 40 साल पहले इंदिरा गांधी के वक्त में शुरू की गई थी। 

दरअसल, उससे पहले तक तीन जहाजों के जरिए लोग मुंबई से जेद्दाह और फिर मक्का पहुंचते थे। तब हवाई यात्रा बहुत महंगी थी। लेकिन शिपिंग कंपनियों ने धीरे-धीरे अपने दो जहाजों की सर्विस बंद कर दीं। आखिरी बार बाकी बचे एक जहाज से 5000 लोग 1994 में हज पर गए थे। इसके बाद सिर्फ रईस लोग फ्लाइट से हज पर जाने लगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मांग की गई की गरीब मुसलमानों को हवाई यात्रा में रियायत दी जाए, जिससे वो भी हज पर जा सकें। इंदिरा गांधी को तरकीब सूझी या सुझाई गई। उस वक्त भी एयर इंडिया की हालत पतली थी। उन्होंने कहा कि ठीक है, सरकार एयर टिकट में कुछ सब्सिडी देगी लेकिन यह पैसा सीधे एयर इंडिया को मिलेगा।

हज कमेटी आफ इंडिया के जरिए जाने वाले हाजियों के नाम पर सरकार करीब 700 करोड़ बतौर सब्सिडी एयर इंडिया को देने लगी। एक हज यात्री को करीब 20 से 25 हजार की छूट टिकट पर मिलने लगी। इस सब्सिडी से हज यात्रियों की बजाय एयर इंडिया को ज्यादा फायदा हो रहा था। 2011 में जब 170,162 हज यात्री गए थे तो सरकार को 685 करोड़ रुपये बतौर सब्सिडी देने पड़े थे। इस साल 1.75 लाख लोग भारत से हज के लिए जाएंगे और सारे लोग बिना सब्सिडी वाली हज यात्रा करेंगे। हालांकि एयर इंडिया को जब  मुसलमानों की सब्सिडी के पैसे नहीं मिलेंगे तो उसका घाटा और भी तेजी से बढ़ेगा, ऐसे में केंद्र सरकार उसे बेचने या उसमें 49 फीसदी एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का जब मन बना चुकी है तो उसकी बिक्री या निजीकरण का रास्ता तेजी से हमवार होगा। यानी एक तरह से सब्सिडी खत्म करने की आड़ में एयर इंडिया की बिक्री या निजीकरण का भी रास्ता साफ किया गया है। तमाम हिंदू संगठनों ने हज सब्सिडी खत्म करने का स्वागत किया है लेकिन एयर इंडिया कर्मचारियों के हितों के लिए लड़ने का संकल्प लेने वाले आरएसएस व भाजपा समर्थित श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) व स्वदेशी जागऱण मंच की क्या राय है, वह बहुत हल्के स्वर में विरोध के रूप में आई है। इन दोनों संगठनों ने एयर इंडिया या रिटेल में एफडीआई का विरोध किया है। हालांकि इससे पहले एयर इंडिया को बेचने या निजीकरण की कोशिशों का बीएमएस विरोध करती रही है।

सरकार को अब 700 करोड़ की बचत होगी। सरकार ने कहा है कि है कि इस पैसे को मुसलमानों के सशक्तीकरण पर खर्च किया जाएगा। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी और मुस्लिम थिकर सिब्तैन जहीर का कहना है कि सरकार ने अभी तक ऐसा कोई ब्लूप्रिंट पेश नहीं किया है कि आखिर 700 करोड़ रुपये को मुसलमानों के ऊपर किस मद में खर्च किया जाएगा, क्या उनकी शिक्षा पर या क्या उन्हें स्किल्ड बनाने पर इसे खर्च किया जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की घोषणा के मुताबिक लखनऊ में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में एक कार्यक्रम आयोजित कर मुसलमानों से संबंधित तमाम योजनाओं की घोषणा की जाएगी। जिसमें बताया जाएगा कि किस योजना में कितना पैसा खर्च होगा। यहीं पर सरकार की मंशा पर शक होता है, क्योंकि अब इस पैसे का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी भी राजनीतिक रूप से करेगी। इससे मुसलमानों को वास्तविक रूप से कितना फायदा होगा, यह वक्त बीतने के साथ पता चलेगा। क्योंकि किसी योजना पर अगर आप पैसा खर्च कर रहे हैं तो उसके हानि-लाभ का पता कई साल बाद चलता है। कांग्रेस जो गलती कर रही थी, वही गलती भाजपा सरकार को नहीं दोहरानी चाहिए।


2 comments:

Kavita Rawat said...

जागरूकता लानी जरुरी है एवं समय के साथ बदलना जरुरी है

Yusuf Kirmani said...

@Kavita Rawat जी...आप ठीक कह रही हैं लेकिन यह बदलाव किसी एक वर्ग या समुदाय के बदलने से नहीं आएगा। इसके लिए तमाम पक्षों को भी अपने नजरिए में एक दूसरे के प्रति बदलाव लाना होगा।...