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Showing posts from May, 2017

चुप रहिए न...विकास हो रहा

कहिए न कुछ विकास हो रहा बोलिए न कुछ विकास हो रहा टीवी-अखबार भी बता रहे विकास हो रहा
झूठी हैं तुम्हारी आलोचनाएं
हां, फर्जी हैं तुम्हारी सूचनाएं
जब हम कह रहे हैं  तो विकास हो रहा देशभक्त हैं वो जो  कह रहे विकास हो रहा गद्दार हैं वो जो  कह रहे विनाश हो रहा
मक्कार हैं वो जो कर रहे गरीबी की बातें चमत्कार है, अब कितनी  सुहानी हैं रातें
कमाल है, तीन साल के लेखे-जोखे पर तुम्हें यकीन नहीं
इश्तेहार में इतने जुमले भरे हैं