ईवीएम मशीनों से कराए गए चुनाव का काला सच....





यह वायरल विडियो बताता है कि ईवीएम मशीनों का काला सच क्या है...

देश को ईवीएम मशीनों के जरिए लाया गया लोकतंत्र नहीं चाहिए....

ऐसे मतदान पर कैसे भरोसा हो, जिसमें सत्ताधीशों की नीयत खराब हो...

ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी करके भारतीय लोकतंत्र के साथ साजिश की जा रही है....

आखिर जनता कब जागेगी और इस नाजायज हरकत का विरोध कब करेगी...

भारतीय लोकतंत्र में ऐसे बुरे दिन कभी नहीं आए...यह इमरजेंसी से भी बुरा दौर है...

जिन राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करना चाहिए था...वे घरों में सो रहे हैं....यहां तक कि जिस पार्टी ने सबसे पहले ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी करके चुनाव जीतने का आरोप लगाया था, उस पार्टी के नेता व वर्कर भी सो रहे हैं...उनमें जरा भी साहस नहीं है कि वे सड़कों पर आकर इसका खुला विरोध करें...

चुनाव में ईवीएम मशीनों के दुरुपयोग की कहानी सामने आने लगी है। यूपी चुनाव नतीजों के बाद जब भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले बाकी राजनीतिक दलों की सीटें बहुत कम आईं तो इन मशीनों पर सवाल उठे। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया...तब सहसा मुझे और मेरे जैसे तमाम लोगों को मायावती के आरोप पर विश्वास नहीं हुआ ...लेकिन जिस तरह से महाराष्ट्र और अब मध्य प्रदेश में यह गड़बड़ी पकड़ी गई है, उससे यह शक विश्नवास में बदल गया कि ईवीएम के जरिए यूपी चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।

आखिर ऐसा कैसे हुआ कि मध्यप्रदेश की ईवीएम मशीनों में किसी भी बटन को दबाने पर भाजपा की पर्ची निकलती थी। इन मशीनों को वीवीपीटी मशीन से जोड़ कर ऐसा किया गया। चुनाव आयोग ने 19 अफसरों पर एक्शन लिया है और कई मध्य प्रदेश के कई आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है लेकिन यह सवाल रहस्य ही रहेगा कि आखिर किन लोगों के कहने पर ये गड़बड़ियां की गईं।








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