Wednesday, June 15, 2016

अमेरिकी सीनेट में तेरे भाषण पर क्या ताली बजाना याद है….




धत्त तेरे की…अमेरिकन कितने मतलबी होते हैं…खबर तो आप लोगों को मिल गई होगी। लेकिन बराक के दोस्त और उनका खानदान इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं…

…उस अमेरिकी संसद ने भारत को अपना खास दोस्त और ग्लोबल स्ट्रैटजिक (वैश्विक रणनीतिक) और डिफेंस फ्रेंड का दर्जा देने वाले बिल को पास करने से मना कर दिया, जिसके पास होने पर भारत-अमेरिका और करीब आ जाते।

…ये वही अमेरिकी संसद है, जिसके बारे में भारतीय मीडिया और बराक के दोस्त के खानदान वाले उचक-उचक कर बता रहे थे कि देखो आज अमेरिकी सांसद इतनी बार दोस्त के लिए ताली बजाने को अपनी कुर्सी से उठे। किसी भक्त ने 16 बार बताया तो एक भक्त ने 66 बार ताली बजाने की बात बता डाली। भक्तों ने ये भी बताया कि इतनी तालियां तो पंडित जवाहर लाल नेहरू के भाषण पर अमेरिकी संसद में नहीं बजी थीं। …भक्तों ने कहा कि अटल जी को भी पीछे छोड़ दिया बराक के दोस्त ने…

…मीडिया के एक वर्ग ने अभी चार दिन पहले बराक के दोस्त की यात्रा को लिखा था कि फलाने की डाक्टरिन (DOCTORINE) को आखिर अमेरिका ने मान ही लिया…अब तो बीसो ऊंगली घी में…

….बुधवार अमेरिकी सांसदों ने सारे हवाबाजों और भक्तों की हवा निकाल दी….चंपू तो कहीं मुंह छिपाए बैठे होंगे….

…मि…त्रों…बताइए…अमेरिका ने अपने दोस्त को धोखा दिया की नहीं….दिया की नहीं….दिया की नहीं…

….दोस्त को जब तक अमेरिकी वीजा नहीं मिल रहा था तब तक अमेरिका सबसे बड़ा दुश्मन था…जब बकौल भक्तों के अमेरिका ने नाक रगड़ को दोस्त को वीजा दिया तो अमेरिका को भक्त और चंपू दोस्त मानने की भूल कर बैठे।…चंपू और भक्त शायद ये भूल गए कि अमेरिकी रिलिजियस और फ्रीडम रिपोर्ट का भी कोई मतलब होता है, जहां भारत का नंबर जीरो है। इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले भी अमेरिकी सीनेटर ही होते हैं।

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महंगाई पर घड़ियाली आंसू…

…जब मैं आपके लिए ये सब लिख रहा हूं तो सरकार महंगाई पर चिंता जताते हुए अफसरों-मंत्रियों के साथ बैठक कर रही है। सरकार ने कहा कि बाजार में कोई दाल 120 रुपये किलो से ज्यादा नहीं बिकेगी। अभी तक सरकार के चंपू और भक्तगण 200 रुपये किलो की दाल खाकर खुश थे और जयजयकार की मुद्रा में थे और 200 रुपये के रेट को जायज ठहरा रहे थे…उन्हें बताना होगा कि सरकार की इस पहल पर उनकी क्या राय है…

…हालांकि मुझे संदेह है कि बाजार सरकार की बात मानेगी या सुनेगी…भाई जिन लोगों के चंदे से सरकार चुनी गई है क्या वे लोग 120 रुपये किलो में दाल बेचेंगे…ये सब मीडिया में खबर छपवाने और ध्यान बंटाने की कवायद जान पड़ते हैं…

…क्या आप जानते हैं कि दोस्त का एक दोस्त जो खुदरा व्यापार के धंधे में था, उसे देखकर दूसरा वाला दोस्त भी इस धंधे में उतरा है…जल्दी है उसके स्टोर आपको अपने आसपास दिखाई देंगे…आखिर ये गिरोह किसको मूर्ख बना रहा है…

…अब देखिए इस लिखने के दौरान ही खबर आ गई है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ा दिए हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डीजल के दाम की गई है, जिसका इस्तेमाल किसान करते हैं। पेट्रोल का अंतरराष्ट्रीय दाम बुरी तरह गिर चुका है लेकिन कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए इस रेट को लगातार सेट किया जा रहा है। भारत के रेट में और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रेट में जमीन-आसमान का अंतर है….लेकिन न चंपू कुछ सुनने या लिखने को तैयार हैं और न भक्त….

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हाय…माय डियर…..

मेरे मित्र नाराज हैं…ईरानी जी के डियर पर कुछ रोशनी नहीं डाली….भाई क्षमा…जाहिलों की जमात में मुझे शामिल नहीं करें। अगर कोई कम पढ़ा लिखा है तो इसका ये मतलब नहीं है कि हम लोग उसका मजाक उड़ाएं। बेचारी इतनी मेहनत से मानव संसाधन मंत्री बनी है, अगर उन्हें डियर कहे जाने पर ऐतराज है तो हम लोग बीच में क्यूं तीन-पांच करें। अरे उनको नहीं पसंद तो नहीं पसंद। आप अपनी अंग्रेजी अपने पास रखें….

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