Sunday, May 15, 2016

रहस्यः भगवा आतंकवाद को हिंदू धर्म से कौन जोड़ रहा है


केंद्र में बीजेपी की सरकार बने हुए अब दो साल से ज्यादा हो चुके हैं। पहले दो साल तक तमाम चिंतक, स्तंभकार और लेखक इस बात पर जोर देते रहे कि इतना बहुमत मिला है तो केंद्र सरकार जरूर कुछ करेगी। हमारे जैसे लोग जो किसी भी सरकार को आलोचनात्मक नजरिए से ही देखने की कोशिश करते हैं, इस उम्मीद में रहे कि हो सकता है कि बीजेपी सरकार के तरकश में कोई तीर हो और वो भारत की तमाम बीमारियों का इलाज करने में जुट जाए। लेकिन ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा और सब्र का पैमाना अब छलकने को है।

यह बात धीरे-धीरे साफ होती जा रही है कि बीजेपी सरकार को ऐसे लोगों का समूह संचालित कर रहा है, जिनके इरादे कुछ और हैं। इस समूह ने संघ परिवार तक को प्रभावित कर रखा है। इस समूह ने जो एजेंडा सरकार बनने के वक्त तय किया था, केंद्र सरकार उसी एजेंडे पर पहले दिन से ही चल रही है। यह समूह अपने एजेंडे को लागू कराने की इतनी जल्दी में है कि उसे लगता है कि अगला मौका नहीं मिलेगा।

बात की शुरुआत ताजा घटनाक्रम से करते हैं। मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत तमाम लोगों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने क्लीन चिट दे दी है। ऐसे कदमों से सरकार अब उस तरफ बढ़ रही है, जिस तरफ उसे जाना नहीं चाहिए था। इसके नतीजे बहुत अच्छे नहीं आएंगे। देश के अमन-चैन को पलीता लगाने की कोशिश में सभी लोगों के हाथ बहुत बुरी तरह झुलस सकते हैं। मैं क्या कहना चाहता हूं, उसकी कल्पना या विश्लेषण आप खुद करके देखिए, अगर आप वाकई देशभक्त हैं तो विचलिए हुए बिना नहीं रह सकते।

मालेगांव ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मक्का मस्जिद ब्लास्ट वगैरह के बाद देश को बताया गया कि जिस तरह इस्लामिक आतंकवाद का अस्तित्व है, ठीक उसी तरह भगवा आतंकवाद का अस्तित्व भी है। हालांकि इस्लामिक आतंकवाद शब्द इस्राइल ने गढ़ा और पश्चिमी मीडिया ने उसे अपनाने में देर नहीं लगाई। इस्लाम एक धर्म है और दुनिया का कोई भी धर्म आतंकवाद की शिक्षा नहीं देता है। लेकिन भगवा आतंकवाद को जिस तरह हिंदू धर्म से जोड़ने की नापाक कोशिश की गई, उसके पीछे बहुत गहरी साजिश की बदबू आती है।

 इस देश में कई करोड़ हिंदू रहते हैं और उनके बीच भगवा विचारधारा के लोगों की तादाद मुट्ठीभर हैं। इन मुट्ठीभर लोगों की विचारधारा को भारत के अमनपसंद हिंदुओं की विचारधारा नहीं माना जाना चाहिए। जिस तरह अबू बकर बगदादी की विचारधारा का इस्लाम और कुरान से कोई तालमेल नहीं है, ठीक उसी तरह आम भारतीय हिंदूओं का मुट्ठीभर भगवा विचारधारा वालों से कोई संबंध नहीं है।

मैं न तो पहले ये मानने को तैयार था और न आज...कि भारत के तमाम हिंदुओं की आस्था या झुकाव किसी तरह के आतंकवाद में है। पता नहीं किन फर्जी राष्ट्रवादियों के बहकावे में कुछ लोगों ने एक ग्रुप बनाकर ऐसे ब्लास्ट या हमले किए जिनसे भगवा आतंकवाद की बात शुरू हुई।

...लेकिन जिन लोगों ने जिस मकसद से इस शब्द को गढ़ा था, दरअसल वो बहुत चालाकी से बताना चाह रहे थे कि भगवा आतंकवाद ही हिंदू आतंकवाद है। यह हरकत किसने की, अगर उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स को कोई खंगाले तो पाएगा कि भगवा आतंकवाद शब्द वही लोग लाए जिनके एजेंडे में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण शुरू से शामिल रहा है यानी हिंदू-मुसलमानों को जब तक बांटा नहीं जाएगा तब तक भगवा राजनीति पूरी तरह इस देश को अपने हिसाब से चला नहीं सकती। तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम अति उत्साह में दक्षिणपंथी विचारकों के जाल में फंसते चले गए और दिन-रात भगवा आतंकवाद का राग अलाप कर संघ और बीजेपी को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करते रहे।

 संघ भी यही चाहता था। संघ इस स्थिति से खुश है। उसने यह भी मान लिया है कि आम हिंदू ने उसे हिंदू हितैषी संगठन के रूप में स्वीकार कर लिया है लेकिन यह उसकी भूल है। ...लगता है कि भारत देश के लोगों की नब्ज पर उसका हाथ नहीं है। हालांकि अभी मैं इसके विस्तार में नहीं जाना चाहता लेकिन इस पर अन्य किसी लेख में चर्चा जरूर की जाएगी।

देश की आजादी के बाद से ही संघ की यह कोशिश रही है कि उसे हिंदू हितैषी चेहरा बताकर माना जाए। इसीलिए उसने हर उस कोशिश को नाकाम करने की पहल की, जिन्होंने भारत को एकता या सभी धर्म-जाति-बिरादरी को साथ लेकर चलने की कोशिश की। देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महात्मा गांधी की हत्या की उसने कभी निंदा नहीं की। आजादी की लड़ाई में उसने अंग्रेजों का साथ दिया। याद कीजिए देश की आजादी की लड़ाई में जब हिंदू, मुसलमान, दलित, सिख, ईसाई तमाम लोग धर्म, जाति, बिरादरी से ऊपर उठकर शामिल थे तब दक्षिणपंथियों ने तमाम किताबें लिखकर, पर्चे बांटकर, पत्रिकाएं छपवाकर स्वतंत्रता आंदोलन का विरोध किया था।

बहरहाल, 2014 के आम चुनाव में देश के 33-34 फीसदी लोगों ने तमाम धर्म, जाति और बिरादरी से ऊपर उठकर संघ के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाली बीजेपी को भारी बहुमत से जिता दिया। ध्यान रहे कि उस आम चुनाव में दक्षिण भारत से बीजेपी की सीटें नहीं आई थीं। यानी भारत नामक देश के आधे हिस्से ने बीजेपी या संघ के एजेंडे पर मुहर नहीं लगाई।

उत्तर भारत के सबसे प्रमुख राज्य बिहार ने भी आम चुनाव की गलती 2016 के विधानसभा चुनाव में न दोहराते हुए बीजेपी को धूल चटा दी यानी कांग्रेस जैसी अखिल भारतीयता बीजेपी को लोकसभा में प्रचंड बहुमत के बाद भी हासिल नहीं है। कुछ राज्यों के चुनाव नतीजे फिर आने वाले हैं। उसके बाद हालात और बदलेंगे। यानी संघ या बीजेपी जिस एजेंडे पर देश को चलाना चाहते हैं, देश के लोग उस पर चलने को तैयार नहीं हैं।      

मालेगांव ब्लास्ट में जिन भी लोगों का हाथ रहा हो, महाराष्ट्र पुलिस के जाबांज अफसर हेमंत किरकिरे उन चेहरों को बेनकाब करके सामने लाए। लेकिन मामूली हितों और अपने एजेंडे को लागू करने की जल्दबाजी में आज वही ताकतें हेमंत किरकिरे की शहादत को अपने पैरों तले मसलना चाह रही हैं। जाहिर है कि देश का अधिकांश मीडिया केंद्र सरकार के इशारों पर जब नाच रहा हो तो वो ताकतें अपने मकसद में कामयाब भी हो जाएंगी।

लेकिन जो चीजें इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी हैं बीजेपी अगर उनका पुनर्लेखन भी करा ले तो उन धब्बों को वो उन पन्नों से नहीं मिटा पाएगी। अगर भगवा आतंकवाद वाकई फर्जी है या था तो भी यह देश याद रखेगा कि कैसे देश को बांटने के लिए इस शब्द को गढ़ा गया, कैसे अमनपसंद मुलमानों और हिंदुओं को डराने के लिए इस शब्द का जमकर प्रचार किया गया।

इस देश के लोग मूर्ख नहीं हैं कि वे इन बातों को समझ नहीं पाएंगे कि गुजरात में पुलिस एनकाउंटर का शिकार हुई इशरतजहां को आप आतंकवादी बताएं और साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को आप बेदाग छूट जाने दें। हिंदू धर्म सहिष्णु है, उसके लोग उससे भी ज्यादा उदारवादी हैं, वे इन हरकतों को पसंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आपको इसलिए नहीं जिताया था कि आप अपनी सारी ताकत इशरतजहां को आतंकवादी बताने में लगा दें....कि आप भगवा आतंकवाद का दाग मिटाने के लिए एक साध्वी को जेल से छुड़ा लाएं....कि आप गांधी परिवार को बेइमान साबित करने के लिए देश की जनता का करोड़ों रुपया इसी पर खर्च कर दें...कि आप स्टूडेंट्स नेताओं को चुप कराने के लिए गुंडों का इस्तेमाल करें...अनगिनत मिसाले हैं इस सरकार की फूहड़ता की, जिन्हें गिनाने पर जगह कम पड़ जाएगी।

आपकी आर्थिक नीति का दिवाला पिट चुका है। कुछ लोगों को सरकारी बैंकों का पैसा लूटने की खुली छूट मिल चुकी है। आपकी विदेश नीति को चीन और पाकिस्तान आए दिन मिलकर पीट रहे हैं। हालत ये है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और उनकी खबर तक न ली गई। मीडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग सुषमा की असली बीमारी पर खबर न छाप सका। स्वच्छता अभियान दफन हो चुका है, अलबत्ता जनता इस अभियान के लिए लगाए गए टैक्स (सेस) को भर रही है। आप चाहे विदेश घूमें या वाराणसी जाकर रोजाना गंगा आरती उतारें या फिर उज्जैन जाकर जुमले उछालें...जनता को काम चाहिए....बातें फिर कर लेना मेरे भाई...




Mystery : Who is implicating Saffron Terrorism with Hindu Religion
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-by Yusuf Kirmani

BJP government at the Centre has made more than two years now. Until two years ago, many thinkers, columnists and authors insist that the government must have won a majority will do so. But it does not see some measure of patience and is now overflowing.

It is gradually becoming clear that the BJP government has been conducting a group of people whose intentions are anything else. The group has influenced by the Sangh Parivar. The group, which was set at the time of forming the government agenda, the Centre operates from the first day on the same agenda. This group is in such a hurry to get his agenda that he will not get the next chance.

Let's start with the latest developments. Malegaon blast accused Pragya Thakur, Col Purohit all people, including the National Investigation Agency (NIA) has given a clean chit. Measures that the government is now increasing that side, the side should not be him. The results will not be very good. Trying to subvert the peace in the hands of all the people can very severely injured.

 What I want to say, his imagination or analysis you see it yourself, if you can not live without Vichlia so patriotic.Malegaon blast, Samjhauta Express blast, Mecca Masjid blast and others were told that the way the country is the existence of Islamic terrorism, just as the existence of saffron terrorism.

 Israel and Western media coined the word Islamic terrorism was quick to adopt her. Islam is a religion and any religion of the world does not teach terrorism. But the way the saffron terrorists were wicked attempt to add Hinduism behind him smelled of very deep conspiracy.

Several million Hindus live in the country and the number of those among them a handful of saffron ideology are. These handful of people peaceable Indian Hindu ideology ideology should not be considered. Abu Bakr Baghdadi way incompatible with the ideology of Islam and the Koran, just a handful of Indian saffron Hindu ideology has nothing to do with those.

I was ready to accept neither before nor today ... all of India's Hindu faith or leaning in any terrorism. Do not know what some people under the influence of nationalists staged a blast or an attack by a group of saffron terrorism that has started talking.

... But the objective of those who coined the term was, in fact, wanted to tell that he is very clever Hindu saffron terrorism is terrorism. Who was this act, if the media reports at that time will have a Spinning word saffron terrorism that the people who brought the Hindu-Muslim polarization in the agenda has been involved from the beginning until the Hindu-Muslim divide will not be completed until the saffron this country can not run its own way.

The then Home Minister P. Chidambaram moved fallen into the trap of over-excitement-wing thinkers and day and night to sing the melody of saffron terrorism are brought to justice RSS and BJP were trying to do. The association also wanted. Union is happy with the situation. He also assumed that the common Hindu Hindu friendly organization is accepted as it is his mistake. ... It is not his hand on the pulse of the people of India. However, I want to go into detail, but it definitely will be discussed in another article.

Since the country's independence has been the endeavor of the Union to be considered by telling him that Hindu friendly face. That is why he tried to thwart every initiative, that all religion-caste community in India's unity or tried to carry. Segue into the country unity, he never condemned the assassination of Mahatma Gandhi. He sided with the British in the War of Independence.

 Recall, the country's freedom struggle when Hindus, Muslims, Dalits, Sikhs, Christians, all people of religion, caste, community, rising above all the books were written by the wing, distributing pamphlets, magazines Cpwakr opposed the freedom movement.

However, 33-34 per cent of the land in the 2014 general election, all religion, caste and community to rise above the party advancing the agenda of the Union gave a landslide victory. Note that the seats of the BJP in the general elections did not come from South India. Ie half of the country called India or the BJP did not approve of the union agenda. Some states, however the results are coming. After that, things will change. The association or the party would run the country on the agenda of the country, people are not prepared to walk.

Even people who have been involved in Malegaon blasts, the Maharashtra police officer Hemant Kirkire Jabanj brought to expose those faces. But minor interests and in a hurry to implement his agenda today Hemant Kirkire martyrdom of the forces are trying to chafe under his feet. Obviously most of the country when dancing to the tunes of the media if the government forces it will be achieving its objective.

But things have been recorded in history to make the party even if they rewrite those spots that will not wipe out those pages. Saffron terrorism was bogus or even if you will remember the country that coined the term for how to divide the land, how to scare peace-loving Hindus Mulmanon and the term was highly publicized.

The people of this country are not stupid they will not understand these things was the victim of a police encounter in Gujarat Isaratjhan Pragya and Col Purohit and to tell you the terror let you unblemished. Hinduism is tolerant, even more so his people are moderate, they are not like these antics. He had never voted for you so that you plug it into your strength Isaratjhan .... the terrorists to erase the stain of saffron terrorism that a nun .... Get out of jail to prove that you are dishonest Gandhi family for millions of people of the country should be spending money on this ... that you use goons to silence student leaders ... countless Misale the government of vulgarity, which would have to reel in.

Pit your economic policy is bankrupt. Some people have got a free hand to rob money from state-owned banks. Your foreign policy, China and Pakistan have been beating up the day. The condition is that the External Affairs Minister Sushma Swaraj had to be hospitalized and not taken up their news.

A large section of the media reported on the splendor of the real disease could not print. Sanitation campaign has been buried, but a public campaign for the taxes (SASE) is across. Whether you go abroad regularly roam Varanasi Ganga Aarti or by float or phrase Flip Ujjain ... people should work to make things again .... My brother ...



rahasyah:  bhagava aatankavaad ko hindoo dharm se kaun jod raha hai
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-Yusuf Kirmani

kendr mein beejepee kee sarakaar bane hue ab do saal se jyaada ho chuke hain. pahale do saal tak tamaam chintak, stambhakaar aur lekhak is baat par jor dete rahe ki itana bahumat mila hai to kendr sarakaar jaroor kuchh karegee. hamaare jaise log jo kisee bhee sarakaar ko aalochanaatmak najarie se hee dekhane kee koshish karate hain, is ummeed mein rahe ki ho sakata hai ki beejepee sarakaar ke tarakash mein koee teer ho aur vo bhaarat kee tamaam beemaariyon ka ilaaj karane mein jut jae. lekin aisa kuchh hota dikhaee nahin de raha aur sabr ka paimaana ab chhalakane ko hai. 

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aapakee aarthik neeti ka divaala pit chuka hai. 

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