मेरे समय की कविता

By Himanshu Kumar...

तो , मोदी की जय हो...
 
लो बन जाता हूं मैं भी एक अच्छा नागरिक,
तो , मोदी की जय हो ,
अंकित गर्ग की जय हो ,
चिदम्बरम की जय हो ,
 
मैं कहूँगा ,
मुसलमान गद्दार हैं ,
आदिवासी नक्सली हैं ,
दलित कामचोर और गंदे होते हैं ,
अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं ,
गरीब अपने आलस के कारण गरीब हैं ,
 
तो बोलो , गुजरात के विकास की जय हो,
सलवा जुडूम की जय हो ,
पाकिस्तान को मिटा दो ,
कश्मीरियों को उडा दो,
गुजरात जैसा सबक सारे देश के मुसलमानों को पढ़ा दो ,
सेक्युलरिस्ट बुद्धीजीवियों को जेलों में सड़ा दो ,
 
बाबा रामदेव ,आसाराम बापू की जय हो ,
त्रिशूल की जय हो ,
गोडसे की जय हो ,
 
ब्राम्हणों के शुद्ध् वंश की जय हो,
टाटा की जय हो , अम्बानी की जय हो
फौज की जय हो,
पुलिस की जय हो ,
सरकार की जय हो ,
 
औरतो को सिर चढाने वाले ,
मुसलमानों के सामने हाथ जोड़ने वाले ,
नक्सलियों के एजेंट ,
साले बुद्धिजीवियों को सबक सिखा दो,
 
भाजपा को वोट दो,
संघ से संस्कार सीखो ,
सच्चे भारतीय बनो ,
गो मूत्र पियो ,
मुंह पर गाय का गोबर मलो 
राम मंदिर के निर्माण के लिये खुल कर सहयोग करो ,
 
मोदी को प्रधान मंत्री 
बनाए रखने की 
मुहीम से जुड़ें
और हमारी तरह
देश के अच्छे नागरिक बने .
 
 
नोट - हिमांशु कुमार पालमपुर में संभावना संस्थान चलाते हैं। उनकी फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वह मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं।
 
 

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अच्छी कविता। कविता नहीं आज के समय का हाल।

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