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मिशेल, तुम क्या जानो मेरा दर्द

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मिशेल के नाम एक भारतीय दासी का खत ............................................................... प्रिय मिशेल,  तुम कितनी खुशनसीब हो। दुनिया के सबसे पुराने लोकतांत्रिक देश से तुम आई और जब मैंने तुम्हारे पति का हाथ तुम्हें पकड़े देखा तो मैं गर्व से फूली नहीं समायी कि अमेरिकी प्रथम महिला का यह सम्मान उसका पति भारत जैसे विकासशील देश में आकर भी बरकरार रखे हुए है, जहां लड़की को ब्याहते समय पति को परमेश्वर मानने की शिक्षा दी जाती है। सचमुच मिशेल तुम सौभाग्यशाली हो, इतना होशियार, समझदार पति पाया है, उसका सीना कितने इंच का है, यह तो मैं नहीं जानती और शायद तुम भी नहीं, लेकिन यहां तो जो अपने पति को परमेश्वर मानती हैं, उन्हें 56 इंच का सीना दिखाने वाले पुरुषों की मर्दानगी भरी बातें दिन-रात जरूर झेलनी पड़ती हैं। मिशेल तुमसे मुझे ईर्ष्या हो रही है। हाय, तुम्हें जरा भी लाज न आई। गाला डिनर में अपने पति के साथ डिनर करते हुए...कितने आंखें तुम्हें निहार रही थीं। यहां तो हम लोग पति परमेश्वर के भरपेट खाने के बाद ही खाते हैं...सास-ससुर होते हैं तो उनसे भी छिपाकर खाते हैं। मिशेल, तुम विकसि