Thursday, December 17, 2015

दोस्तों...अमीरी कैसे बढ़ती है

जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की कलम से
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रिजर्व बैंक एक पत्र लिख कर उस बैंक को देगा जिसमें भारत सरकार का खाता है
मान लीजिये स्टेट बैंक में भारत सरकार का खाता है
तो रिजर्व बैंक से स्टेट बैंक को एक पत्र आएगा कि भारत सरकार के खाते में नब्बे लाख करोड़ लिख दीजिये
तो भारत सरकार मानेगी कि उसके पास अब पैसा आ गया

अब भारत सरकार उस पैसे को
लोहा कंपनियों को देगी जिनसे उसे रेल पटरियां डालने के लिए लोहा खरीदना है
लोहा कंपनी उसे अपने कर्मचारी के खाते में डालेगी
कर्मचारी उस से कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, खरीदेगा
कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, तो देश में बढे नहीं

लेकिन नब्बे लाख रुपया बढ़ गया
जो बढ़ जाता है उसकी कीमत कम हो जाती है
रुपया बढ़ा तो रूपये की कीमत कम हो जायेगी
जो नहीं बढ़ा उसकी कीमत बढ़ जाती है
कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, की कीमत बढ़ जायेगी
साथ में दाल सब्जी मछली दूध की कीमत भी बढ़ जायेगी
जिसे आप कहेंगे कि महंगाई बढ़ गयी

बिना उत्पादन बढ़ाये अगर आप
पैसा बढ़ाएंगे
तो उससे महंगाई बढ़ेगी
चलिए आगे चलते हैं
दाल सब्जी मछली दूध महंगा हो जाएगा तो जनता शोर मचाएगी

सरकार उस रूपये से
दाल सब्जी मछली दूध विदेशों से मंगवायेगी
उससे किसान द्वारा उगाये गए
दाल सब्जी मछली दूध की कीमत फिर से गिर जायेगी
लेकिन किसान के लिए कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, की कीमत तो कम नहीं हुई
तो किसान के पास दाल सब्जी मछली दूध के उत्पादन से अब जो रुपया आएगा उससे उसका जीवन चलाना मुश्किल हो जाएगा

किसान अपने बच्चे को पढ़ा नहीं सकेगा, इलाज नहीं करा सकेगा
किसान इस सब के लिए क़र्ज़ लेगा
लेकिन उसका उत्पादन तो बढ़ा नहीं
महंगाई बढ़ने से खर्च तो बढ़ गया

...लेकिन आमदनी बढ़ी नहीं
किसान घाटे में आ जाएगा
किसान क़र्ज़ चूका नहीं पायेगा
किसान फांसी लगा लेगा

यह अर्थव्यवस्था
उत्पादक के पक्ष में काम ही नहीं करती


Thursday, December 10, 2015

आसमान पर शैतानी पतंगें




आओ पतंग उड़ाना सीखें

कानून के हाथ से पतंग की डोर लंबी होती है

वह डोर बांध लेती है अपने मोहपाश में सभी को

नेता को, अभिनेता को, दलाल को, इंसाफकारों को

उसके पेच में फंस जाते हैं सब

फुटपाथ पर सोने वाले भी दम तोड़ देते हैं इसमें अक्सर फंसकर

उन्हें पता नहीं होता, उड़ाने वाला तो कहीं और बैठा होता है छिपकर

फंसता है जब पतंगबाज तो कानून, नेता बचाने निकल पड़ते हैं मिलकर   

पतंगों की जाल में उलझा है यह देश

तरह-तरह की शक्ल वाली पतंगें हैं आसमान पर

मुद्दों से भटके देश में शैतानी पतंगें हैं आसमान पर

असहनशीलता, नाइंसाफी, दंगाइयों की पतंगें हैं आसमान पर

आखिर किस रहबर पर ऐतबार है हम सब को

क्यों इंसाफ का इंतजार 'यूसुफ किरमानी' है तुमको

   




Wednesday, October 7, 2015

मेरे समय की कविता

By Himanshu Kumar...

तो , मोदी की जय हो...
 
लो बन जाता हूं मैं भी एक अच्छा नागरिक,
तो , मोदी की जय हो ,
अंकित गर्ग की जय हो ,
चिदम्बरम की जय हो ,
 
मैं कहूँगा ,
मुसलमान गद्दार हैं ,
आदिवासी नक्सली हैं ,
दलित कामचोर और गंदे होते हैं ,
अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं ,
गरीब अपने आलस के कारण गरीब हैं ,
 
तो बोलो , गुजरात के विकास की जय हो,
सलवा जुडूम की जय हो ,
पाकिस्तान को मिटा दो ,
कश्मीरियों को उडा दो,
गुजरात जैसा सबक सारे देश के मुसलमानों को पढ़ा दो ,
सेक्युलरिस्ट बुद्धीजीवियों को जेलों में सड़ा दो ,
 
बाबा रामदेव ,आसाराम बापू की जय हो ,
त्रिशूल की जय हो ,
गोडसे की जय हो ,
 
ब्राम्हणों के शुद्ध् वंश की जय हो,
टाटा की जय हो , अम्बानी की जय हो
फौज की जय हो,
पुलिस की जय हो ,
सरकार की जय हो ,
 
औरतो को सिर चढाने वाले ,
मुसलमानों के सामने हाथ जोड़ने वाले ,
नक्सलियों के एजेंट ,
साले बुद्धिजीवियों को सबक सिखा दो,
 
भाजपा को वोट दो,
संघ से संस्कार सीखो ,
सच्चे भारतीय बनो ,
गो मूत्र पियो ,
मुंह पर गाय का गोबर मलो 
राम मंदिर के निर्माण के लिये खुल कर सहयोग करो ,
 
मोदी को प्रधान मंत्री 
बनाए रखने की 
मुहीम से जुड़ें
और हमारी तरह
देश के अच्छे नागरिक बने .
 
 
नोट - हिमांशु कुमार पालमपुर में संभावना संस्थान चलाते हैं। उनकी फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वह मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं।
 
 

Friday, October 2, 2015

गर्म हवा...

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके जन्म दिन पर समपर्पित मेरी यह कविता, जिसे खास तौर पर मैंने आज ही

लिखी...



                   गर्म हवा...


बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं
पहनते हैं खादी, जुमलेबाजी में उम्दा हैं
                                           
कहता है खुद को अहिंसा का पुजारी
लेकिन जान ले रहा इंसान की दुराचारी

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

कितनी गर्म हवा चल रही है अपने देश में
गली-गली हत्यारे घूम रहे हैं साधू के वेश में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

कर्ज है सिर पर, बेड़ी है किसान के पांव में
बड़े साहब ला रहे हैं इंटरनेट, फेसबुक गांव में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

दाभालोकर, पनसारे शहीद हो गए सच की राह में
अभी और आएंगे कई मसीहा शहादत की चाह में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

राम-रहीम अब न बोले तो कब बोलोगे, अब न निकले घरों से तो कब निकलोगे
मिटा दो खुद को हर जुल्म के खिलाफ, वरना बाद में तो हाथ मलते रह जाओगे

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

   
copyright@yusuf kirmani

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Saturday, September 19, 2015

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो...

हे सलमान खान... तुम गणेश चतुर्थी पर खूब नाचो....ताकि इस देश के मुसलमान एक मूर्ख मंत्री की नजरों में राष्ट्रवादी हो सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता कलाम के अलावा और भी राष्ट्रभक्त मुसलमान तलाश सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता बाकी मुसलमानों को पाकिस्तान न भेज सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता मुसलमानों के बुनियादी सवालों से बाकी देश का ध्यान बंटा सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता आम भारतीय के रोटी-रोजी के मुद्दे को अंध राष्ट्रवाद से जोड़ सकें...नाचो

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता अच्छे दिन के वादों को इस शोर में दबा सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता भारतीय मुसलमानों को आक्रमणकारी न मानें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता महंगे अस्पताल खोलकर, खुद मंत्री बनकर जनता को लूट सकें...नाचो

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता हर मुसलमान को पाकिस्तानी न बता सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता गाय और मुसलमान जैसी किताब न लिख सकें...नाचो...

हे सलमान खान...तुम इसलिए नाचो कि मूर्ख नेता तुम्हारे असर से यह न तय कर सकें कि तुम चिकन खाओगे या मटन...नाचो...

...तुम खूब नाचो...पतंग उड़ाओ...ताकि मुंबई की सड़कों पर फर्राटे से दोबारा लैंड क्रूसर दौड़ा सको...




Sunday, August 2, 2015

आप भी तो शीशे के घर में रह रहे हैं...



-क्या इस महान देश के अपने ही कुछ लोग कुल्हाड़ी लेकर यहां के लोकतंत्र का गला घोंटना चाहते हैं...

-क्या हमने कुछ बंदरों को ऐसा हथियार थमा दिया है जिससे वे अपना ही गला काटने पर उतारू हैं...

-ताजा हालात इस तरफ इशारा कर रहे हैं। यह अकेले मेरा सरोकार नहीं है। आप अखबार उठाइए...आप टीवी पर खबरें देखिए-सुनिए...आप फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर जाइए...चारों तरफ ऐसा लगता है कि कुछ अंध देशभक्त कुकुरमुत्ते की तरह पैदा हो गए हैं और उन सब ने मिलकर इस महान देश की आत्मा को झिंझोड़ना का ठेका ले लिया है...

-मुंबई बम धमाकों में मुजरिम पाए गए याकूब मेमन को फांसी दे दी गई। आपने मुंबई ब्लास्ट में मारे गए 257 लोगों के साथ इंसाफ भी कर दिया लेकिन उस मुजरिम के जनाजे में शामिल होने वाले 8000 लोगों पर त्रिपुरा का गवर्नर शक जता रहा है...वह कह रहा है कि ये संभावित आतंकवादी हो सकते हैं...इन पर नजर रखी जाए...

-दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में मुजफ्फरनगर दंगों पर एक डॉक्युमेंट्री दिखाई जा रही थी, संघ से जुड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने उसे दिखाने से रोक दिया और कहा कि यह फिल्म राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है...

...सुप्रीम कोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार पी. सुरेंद्रनाथ ने फांसी की सजा का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया। टाइम्स आफ इंडिया ने इस खबर को अपनी वेबसाइट पर लगाया तो कुछ लोगों ने उस पर गालियों की बौछार कर दी। याद रहे कि सुरेंद्रनाथ ने याकूब की नहीं बल्कि फांसी की सजा पर रोक की मांग की है।

-अल्पसंख्यकों को कई बार पाकिस्तान भेजने वाली धमकी इतनी ज्यादा हो गई है कि उसका बार-बार उल्लेख करना बेवकूफी होगा...

-आज सुबह लखनऊ से फोन था...बहुत रंज और गमगीन आवाज। ...उधर से कहा गया...क्या हम लोग एक बार फिर एक और बंटवारे की तरफ बढ़ रहे हैं।...मैं चौंका।...फोन जहां से था, वो लोग कट्टर देशभक्त और सेकुलर माने जाते हैं...मेरा जवाब था...क्या वाकई आपको इस देश के संविधान और अदालत से कोई खतरा महसूस हुआ जो आप लोग इस तरह की बात कह रहे हैं...उन्होंने कहा, शायद आपने त्रिपुरा के गवर्नर का ट्वीट नहीं पढ़ा है... मैंने कहा कि हो सकता है कि वह गलती से या किसी सूचना के आधार पर यह बात कह रहे हों...लेकिन फोन करने वाले बहस को तैयार थे, उन्होंने कहा कि यह बात महाराष्ट्र के गवर्नर या मुख्यमंत्री कहते तो बात समझ में आती कि शायद उनके पास खुफिया सूचना रही होगी लेकिन नॉर्थ ईस्ट में बैठे गवर्नर को यह सूचना भला क्यों और कैसे मिल गई।...मेरे पास उनकी बातों का जवाब नहीं था।...

-फिर मैंने उस रात को याद किया जो याकूब मेमन की फांसी के फैसले की रात थी। देर रात नागपुर औऱ दिल्ली से लगभग सभी न्यूज चैनल लाइव थे। नागपुर से एक टीवी रिपोर्टर ने जो पहली रिपोर्ट लाइव की उसमें वह बता रहा था कि यहां ऐसा लग रहा है जैसे कोई तमाशा चल रहा हो और लोग भारत माता की जय और अन्य नारे लगा रहे हैं, जिससे माहौल बिगड़ सकता है।...

-रात को तमाम फोटोग्राफ देखते हुए, मेरी नजर वायर सर्विस एपी की एक फोटो पर पड़ी, जिस पर लिखा था कि यह फोटो कृपया न छापें, इस पर मुंबई पुलिस ने रोक लगा दी है। ...दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार को छोड़कर किसी ने भी एपी एजेंसी के उस फोटो को छापने की हिम्मत नहीं जुटाई।...वे अखबार जो इमरजेंसी में लगी सेंसरशिप के नाम पर आज तक टेसुए बहाते हैं, वे खामोश रहे या तटस्थ रहे।

...आज वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार आकार पटेल का लेख आया। मेरी नजर में उस लेख को भारत के हर नागरिक को पढ़ना चाहिए।...उस लेख की कुछ चुनिंदा लाइनों को मैं ज्यों का त्यों आप लोगों के लिए यहां पेश कर रहा हूं।...

...ये मुंबई में हुए ब्लास्ट की पृष्ठभूमि है. इस तरह याकूब मेमन की फांसी समाज को बांटने वाली है और साथ ही जहर घोलने वाली भी है. टीवी चैनल्स ने इस बात का कड़ा विरोध किया कि याकूब मेमन को फांसी नहीं होनी चाहिए. इस बीच टाइम्स ऑफ इंडिया के एक रिपोर्ट में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में इसका जिक्र किया गया है कि फांसी पर लटकाए गए 94 फीसदी लोग दलित और मुस्लिम हैं.
इस पूरे मामले में यह बात भी साफ दिखाई पड़ती है कि बीजेपी के माया कोडनानी और बाबू बजरंगी जो कि याकूब मेमन के जैसे ही अपराधों में दोषी है लेकिन वे जमानत पर जेल तक से बाहर हैं.
 …भारत में मुस्लिम होना बड़ी बात है. इंटरनेट पर किसी भी आर्टिकल जिसमें ना केवल आतंकवाद बल्कि मुस्लिमों को विश्वासघाती बताया गया है उसपर आये हुए कमेंट्स को पढ़ने से आप कई बातों को जानेंगे और समझेंगे. हमारे अंग्रेजीदां मिडिल क्लास में कट्टरता और पूर्वाग्रह इस तरह हावी है कि वह भयावह हो चुके हैं…
 
...आकार पटेल की बात को आगे बढ़ाते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि आखिर बीजेपी या उसे पर्दे के पीछे से संचालित करने वाले क्या चाहते है...बीजेपी अगर राष्ट्रभक्ति के चक्कर में या पोलराइजेशन के चक्कर में यह सब कर रही है तो उसे बहुत बड़ा मुगालता है। इस पार्टी के कुछ नेता 35 करोड़ (अगर यह आंकड़ा सही है तो...) मुसलमानों को पाकिस्तान नहीं भेज सकते।...वे चाहे जो कर लें, गली-गली दंगे करा लें...जिन्हें पाकिस्तान जाना था वे जा चुके। मौजूदा लोग कतई नहीं जाएंगे और यहीं रहेंगे। 

...अलबत्ता, अगर इतनी बड़ी आबादी इस महान लोकतंत्र में खुद को असुरक्षित मान रही है तो यह मौजूदा सरकार के लिए भी कम खतरे की घंटी नहीं है।...यकीन मानिए आप भी शीशे के ही घर में रह रहे हैं।...एक लोकतंत्र में क्या देशभक्ति है और क्या राष्ट्रद्रोह इसका आकलन करने के लिए खुद को बदलना होगा।...जब आप सत्ता में नहीं थे तो आपकी बात भी तो लोग सुनते थे।...आज आप दूसरों की बात सुनना नहीं चाहते और उसे राष्ट्रद्रोही ठहरा देते हैं...सच मानिए, अगर आप कोई प्रयोग कर रहे हैं तो वह आगे चलकर बहुत महंगा पड़ने जा रहा है। मैंने नहीं, ...आकार पटेल ने इशारा कर दिया है...

Google Translation of this Article...


You are also Living in a Mirror House
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-By Yusuf Kirmani

What this great country of our own democracy here with some ax to choke ...

What we do some monkeys handed weapon which they are bent on cutting its own throat ...

Fresh Things are pointing to the side. This alone is not my concern. Pick up the newspaper ... see you on the TV news, social media platforms such as Facebook and Twitter-Hey ... You go on ... all around it seems that some are born blind patriot like mushroom and all of them together Jinjodna soul of this great country have taken the contract to ...

Yakub Memon, the criminals were found in the Mumbai blasts were executed. You Mumbai blasts that killed 257 people, but that criminal justice has also 8,000 people who attended the funeral of the governor of Tripura has expressed doubt ... he is saying that there may be potential terrorists ... these to be monitored ...

-Delhi Kirorimal College of Muzaffarnagar riots showed a documentary was being linked to union organization Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad and that it prevented him from showing the film is against national interests ...

... Supreme Court deputy registrar p. Surendranath resigned in protest against the death penalty. Times of India put the news on their website, so some people have showered abuses on him. Remember that Surendranath of Jacob rather moratorium on capital punishment is sought.
-alpasnkykon A threat to Pakistan many times have become so frequent that it would be foolish to mention ...

This morning was ... very PIP and inconsolable voice calling from Lucknow. ... The states ... What we are heading once again and sharing .... I was shocked .... call where, they are considered staunch patriot and secular .. My answer was ... you really felt any threat from the country's constitution and the court to which you are saying this kind of thing ... he said, maybe you have not read Tripura governor tweeted ... I could have said that he accidentally or on information're saying this ... but the caller was willing to debate, he said that the Governor or Chief Minister of Maharashtra says it makes sense then that Maybe they'd be intelligence but sitting governor in North East, why and how it got the information .... I did not respond to his words ....

-Then I remembered that night was the night of the verdict of execution of Yakub Memon. Nagpur Delhi late night and almost all news channels were live. The first report by a television reporter from Nagpur to live here, so it looks as if he was telling a scene and people running and shouting slogans like Bharat Mata ki Jai, which may lead to the atmosphere ....
Given the all-night photograph, my eye fell on a photo of the AP wire service, please do not print the photo on which was written, the Mumbai police has banned. ... Except for English newspaper published from Delhi to the AP agency dared to print the photos .... they engaged in censorship in the name of the newspaper that emergency Tesua shed today, they are silent or neutral are.

... Today, veteran journalist and columnist size Aakar Patel came article. In my view, every citizen of India should read the article .... few lines of the article intact, I am presenting here for you guys ....

"... This is the background to the Mumbai blasts. Yakub Memon hanging of such divisive society as well as to mix poison too. TV channels opposed this thing that Jacob should not hang Memon. Meanwhile, a report in The Times of India National Law University, a study that has been reported in 94 per cent of the Dalit and Muslim were hanged on the gallows.

... In this case, it also appears that the BJP Maya Kodnani and Babu Bajrangi Memon, like Jacob who is guilty of crimes, but they are out of jail on bail.

 ... To be Muslim in India is a big deal. Any article on the Internet, which not only terrorism but also told him disloyal Muslims who had come several things you will learn and understand from reading comments. English, bigotry and prejudice in our middle class has been the dominating that frightening ... "


So it is a big goof. The party leaders 35 million (if this figure is correct, then ...) Muslims .... They Whatever Pakistan can not, make sure to provide street-street riots ... they have had to Pakistan . People will not necessarily be present here and now...one what democracy is and what patriotism Rashtradroh to assess the need to change itself .... When you were not in power, people were listening to your talk .... Today you do not want to listen to others And let him hold national '... true, assume you are using a very expensive if it is going further. I did not ... size Aakar Patel has indicated ...


 

Thursday, July 30, 2015

याकूब मेमन की अपनी बेटी से आखिरी बातचीत

मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट में मारे गए 257 लोगों की हत्या के जुर्म में आतंकवादी याकूब मेमन को 30 जुलाई 2015 को नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। मरने से पहले याकूब ने अपनी बेटी से फोन पर बातचीत करने की इच्छा जताई थी...



याकूबः बेटी, मेरा आखिरी सलाम, तुम उदास मत होना। दुआओं में याद रखना। अपनी मां का ख्याल रखना।

बेटीः पापा...

याकूबः बेटी रो मत...ये होना था। तुमको अब ऐसे ही रहना होगा। ऐसे ही जीना होगा। इसी तरह ही दुनिया का सामना करना होगा। पर बेटी, तुम ये मत समझना कि मैं गुनहगार था। तुम्हारा पापा गुनहगार नहीं था। मैं आखिरी वक्त में झूठ नहीं बोल सकता। मेरे भाइयों ने यह सब किया था। अगर मैं इसमें शामिल होता तो मैं कभी खुद को सीबीआई के हवाले नहीं करता।




बेटीः पर, पापा ये तो आपके साथ धोखा हुआ न।

याकूबः बेटी, अब इसे जो भी समझो। लेकिन मेरा यकीन तो भारतीय संविधान और यहां की अदालत में मरते दम तक रहेगा। ...और तुम भी इसे बनाये रखना। देखो जज साहबान ने कितनी सुबह तक इस पर सोचा कि मुझे फांसी दी जाए या नहीं। बेटी, ऐसा कहीं और नहीं होता। तमाम मुसलमान देशों में तो मौत का बदला फांसी ही है। यहां भी फांसी की सजा है लेकिन यहां मुलजिम को अपनी बात कहने की पूरी छूट दी जाती है।

बेटीः पर, पापा इस नाटक का फायदा क्या है।

याकूबः बेटी, ये तुमको नहीं समझ में आएगा। इसी को तो सियासत कहा जाता है। पर बेटी, ये फांसी मुझे इसलिए अच्छी लग रही है कि बहुत जल्द मेरी रूह अल्लाह के पास परवाज कर जाएगी। मैं दुनिया से आजाद हो जाऊंगा। बेटी, पिछले 20 साल से मैं जेल में सड़ रहा था। अब मौत मेरे सामने है तो यह एक आजादी ही है। बेटी, मैं तो डरा हुआ था कि कहीं मेरी फांसी टल न जाए और मुझे इस जेल में हर पल तड़प-तड़प कर मरना पड़े।

बेटीः पापा, टीवी वाले बता रहे थे कि आपने फांसी की माफी के लिए पिटिशन लगाई। अब नहीं चाहते थे कि फांसी हो...
याकूबः बेटी, ये बहुत उलझी हुई बातें हैं। इस देश के सेकुलर लोग और फांसी विरोधी लोग नहीं चाहते थे कि मुझे फांसी हो। मैंने सीबीआई की मदद की थी, इस केस को हल करने में। रमन साहब जिंदा होते तो वह भी आज मेरे हक में खड़े होते। इन लोगों का कहना है कि जिसने कानून की मदद की हो, उसे फांसी नहीं होनी चाहिए।...और बेटी इन्हीं लोगों की वजह से तो मैं अपने देश भारत लौटा था यह बताने के लिए कि मुंबई में 257 निर्दोष लोगों की जान लेने वाला मेरा ही सगा भाई है।

बेटीः पापा...पापा...वो लोग टीवी पर यह भी कह रहे थे कि गुजरात में जो दंगा हुआ, उसके आरोपियों को आज तक फांसी नहीं हुई।...वो लोग किसी जकिया जाफरी का नाम ले रहे थे कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला।...और न जाने क्या-क्या कह रहे थे...पर उनकी बातें मुझे अच्छी लग रही थीं पापा।

याकूबः बेटी, भारत में होने वाले दंगों में हत्यारों को कभी फांसी नहीं होती और न आगे कभी होगी। क्योंकि इन दंगों में गरीब मारे जाते हैं। उन बेचारों के लिए कहां इतने महंगे वकील खड़े होते हैं। न अपील होती है और न तारीख पर तारीख पड़ती है...बेटी, वो जकिया जाफरी, उन एहसान जाफरी की बीवी हैं, जिनके घर में दंगों के दौरान 57 लोगों ने पनाह ली थी। उस घर में पेट्रोल छिड़कर कर सभी को जिंदा जलाकर मार डाला गया था। पूरे गुजरात में इस तरह के दंगे हुए थे। नरोदा पाटिया में भी ऐसा हुआ था...तमाम जगहों पर। इन घटनाओं की साजिश करने वाले आज भी जिंदा हैं। मजबूत हैं, उनके पास पावर है।... बेटी, जकिया मैडम को इंतजार है कि शायद एक दिन हत्यारों को फांसी होगी। पर, वो भोली हैं। उन्हें मालूम नहीं कि उनकी यह चाहत कभी पूरी नहीं होने वाली है।...बेटी, ऐसे तमाम मामले हैं।

बेटीः पर पापा, गुजरात और बाकी मामलों में अदालतों ने ऐसी तेजी क्यों नहीं दिखाई...

याकूबः बेटी, और बड़ी हो जाओ। कानून की पढ़ाई करना। तब तुम नजदीक से जान पाओगी कि अदालतें ऐसा क्यों नहीं कर पातीं...बेटी जज साहबान भी तो आखिर इंसान ही हैं न।...बस अभी इतना ही समझो। हो सके तो जब तुम वकील बनना तो मेरे जैसे या दंगों में प्रभावित गरीब लोगों की मदद करना। उनसे कोई फीस न लेना।....बेटी जेलर साहब कह रहे हैं, बातचीत लंबी हो रही है। फांसी का वक्त भी आ पहुंचा है। इसलिए बेटी...अब अलविदा।

बेटीः पापा...आप फिक्र न करें। मैं अम्मीजान का ख्याल रखूंगी।...इसी मुल्क में रहूंगी और भारतीय संविधान पढ़कर यहां के जजों और अदालतों को नजदीक से जानने की कोशिश करूंगी।...जकिया जाफरी को इंसाफ मिलते देखूंगी...अल्लाह हाफिज पापा...
     

(यह काल्पनिक बातचीत है। इसे सच न समझें। यह महज एक उद्गार है)

 
 
Yakub Memon last conversation with his daughter Zubaydah.................................................. ..................Mumbai serial blasts that killed 257 people, Jacob Memon terrorist murder July 30, 2015 were executed in Nagpur Central Jail. Before he died, Jacob expressed a willingness to negotiate on the phone with her daughter ...Yakubः daughter, my last salute, you do not get dejected. Remember compliments. Take care of your mother.
Betiः Papa ...
Yakubः daughter Do not Cry ... They had to be. You have to be like that now. Would like to live. Likewise, the world will face. But dear, you do not understand it I was the culprit. Your father was not guilty. At the last moment I could not lie. My brothers had it all. I would if I never involved myself quoting CBI does not.
Betiः, the father that you are not deceived.
Yakubः daughter, now also understand. But believe me, the Indian Constitution and the court will be to the death. ... And you maintain it. Look how the judge Sahban thought this morning that I should be hanged or not. Daughter, it is not anywhere else. In many Muslim countries, the revenge of the death is hanging. It also sentenced to death but the accused is given the freedom to have their say.
Betiः, the father is the point of this drama.
Yakubः daughter, that you will not understand. That is called the politics. But dear, I'm so looking good is the execution that very soon will be the springboard to my soul to Allah. I will be free from the world. Daughter, the last 20 years I've been rotting in jail. Now death in front of me, so this is a freedom. Daughter, I was afraid that something is not broken my hanging and I have to die in prison every moment yearning-yearning.
Betiः father, were told TV Pitisn put you to death for forgiveness. Now did not want to be hanging ...Yakubः daughter, these are complicating things. The country's secular people hanging anti-people did not want to hang me. I had to help the CBI, to solve the case. Raman sir alive today he is standing on my right. These people say that the law be of help, should not hang him .... and daughter because of these people, so I let my country had returned to India in Mumbai, which killed 257 innocent people is my brother.
Betiः Dad ... Dad ... They were saying on TV that even rioting in Gujarat, the accused has not executed until today .... Those guys were named Zakia Jafri them justice .... and what did not go ... but they were saying things I was good-looking father.
Yakubः daughter, in riots in India and ever further will not hang killers ever. The poor are killed in these riots. Where such an expensive lawyer to those poor fellows are standing. There is no appeal and no date has to date ... Daughter Zakia Jaffery, wife of Ehsan Jaffrey those whose home during the riots, 57 people had taken shelter. Chidkr gasoline burned alive in that house all had been killed. Such riots across Gujarat. Naroda Patiya also happened ... all places. The plot of these events are still alive today. Are strong, they have the power .... daughter, Zakia Madam wait that maybe one day the killers would hang. However, they are naive. They do not know that his desire is never to be fulfilled .... daughter, all such cases.
Betiः Papa, Gujarat and in other cases by the courts, why not show such rapid ...
Yakubः daughter, and get bigger. To study law. Then you will get to know closely the courts are not as ... Why, after all, are human, not Sahban daughter judge .... just so understand. If this can be when you become a lawyer like me or to help poor people affected in the riots. Do not take any fees from the jailer's daughter, sir ..... are saying, conversation is getting longer. Also hanging time is come. So ... Now goodbye daughter.
Betiः Dad ... You do not worry. I take care of Ammijan ....'ll be in the same country and its judges read the Constitution and the courts will try to close to the Zakia Jafri justice .... There'll see ... Allah Hafiz father ...

     
(This is a hypothetical conversation. It's true, do not. It's just an exclamation)
 

Thursday, June 18, 2015

भूल गए मेरी करामात...

एक साल में यह हाल
कि दुनिया करे सवाल
उस बुड्ढे की ये मजाल
कि अपने साक्षात्कार से मचाए भौकाल

क्या भूल गए सब लोग मेरा गुजरात
क्या याद नहीं मेरी पुरानी करामात
अरे ओ मोटू जरा बता मेरी औकात
और हां नागपुर को भेज नई सौगात

मैं हिंसक हूं, विंध्वसक हूं, मैं काल हूं
मैं राजा विक्रमादित्य का बेताल हूं
मैं देश का जीता जागता संक्रमणकाल हूं
मैं मानवीयता से बेहद कंगाल हूं

मेरे नवधनकुबेर मित्रों को कुछ न कहना
अभी तो कई साल यही सब होगा सहना
इस सोने की चिड़िया को होगा बार-बार मरना

दाढ़ी, टोपी, तसबीह टांग दो सब खूंटी पर
मुल्ला जी, नमाज पढ़ो जाकर किसी चोटी पर

फिक्र न करना, याद रखना ये होगी अस्थायी हिजरत
गिरना, उठना, फिर जुटना है इंसान की फितरत

भरोसा रखो, आगे बढ़ो, छा जाओ भारत पर

@copyright2015Yusuf Kirmani 

Thursday, June 4, 2015

आजतक बहुत घटिया चैनल है...क्या सचमुच

यह कैसे तय होगा कि कौन सा न्यूज चैनल सबसे अच्छा है और फलां सबसे खराब...यह कैसे तय होगा कि कौन से खबरिया चैनल का पत्रकार सबसे अच्छा है और फलां सबसे खराब...क्या किसी खबरिया चैनल को घटिया कह देने से आप मेरी बात मान लेंगे...

केंद्रीय मानव संसाधन (एचआरडी) मंत्री स्मृति इरानी को लेकर आजतक चैनल ने इसी सोमवार को एक शो दिखाया जिसका शीर्षक था – स्मृति की परीक्षा। इस शो में रिपोर्टर के सवाल औऱ बीजेपी समर्थकों द्वारा रिपोर्टर के खिलाफ नारेबाजी ने इस बहस को फिर जन्म दे दिया है कि क्या टीवी न्यूज के पत्रकारों को अपने गिरेबान में झांकने का वक्त आ गया है। उस शो में आजतक के रिपोर्टर अशोक सिंघल ने स्मृति से ऐसा सवाल पूछा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ था औऱ सीधे-सीधे स्मृति के चरित्र पर चोट करता था। उनका सवाल थानरेंद्र मोदी ने सबसे कम उम्र की मंत्री बनाया आपको, एचआरडी जैसा बड़ा पोर्टफोलियो दिया और डिग्री का भी विवाद है, आप ग्रैजुएट हैं या अंडर ग्रैजुएट...लेकिन क्या खूबी लगी आपमें...क्या वजह थी...

बात इससे पहले आगे बढ़ाई जाए, उससे पहले साफ कर दूं कि मैं किसी पार्टी या नेता विशेष का समर्थक नहीं हूं। मेरे मित्र जो मुझसे पहले से वाकिफ हैं, इसे जानते हैं लेकिन ये लाइन इसलिए दोहरा रहा हूं कि जो पहली बार पढ़ेंगे, उन्हें भी इसकी जानकारी होनी चाहिए।

...तो आपने अशोक सिंघल का सवाल पढ़ लिया होगा, जो उन्होंने स्मृति इरानी से पूछा। वाकई यह सवाल आपत्तिजनक है। अगर आजतक और उसका रिपोर्टर यही सवाल स्मृति से उनके फौरन मंत्री बनने के बाद पूछते तो शायद समझ में आता कि उचित अवसर पर पूछा गया। लेकिन आज तक को एक साल बाद होश आया, ऐसा सवाल करने का। लेकिन एक साल पहले बीजेपी सरकार बनने के वक्त तो इसी रिपोर्टर के हवाले से आजतक पर खबर चल रही थी कि सिर्फ आजतक ही यह बता रहा है कि कौन-कौन मंत्री बनेगा, किसको क्या मिलेगा। लेकिन ऐसी खबरों को नरेंद्र मोदी ने पटखनी दे दी और जो चेहरे सामने आए, उसका अंदाजा मीडिया को भी नहीं था।

आजतक रिपोर्टर के बेतुके सवाल पर स्मृति ने बहुत ही बचकाने ढंग से जवाब दिया। उन्होंने दर्शकों में बैठे अपने बीजेपी समर्थकों को ललकारा और कहा कि वे इसे देखें...समर्थक मोदी-मोदी की धुन बजाकर चिल्लाने लगे। रिपोर्टर और उनकी सहयोगी महिला रिपोर्टर वहां से दुम दबाकर निकल गए।

इस घटना के बाद फेसबुक और टिवटर पर समर्थकों और विरोधियों की फौज निकल पड़ी और मामले को शालीनता की सीमा से आगे ले गए। आजतक में कभी नौकरी करते थे। दीपक शर्मा वहां से नौकरी छोड़ने के बाद खबरों का पोर्टल इंडिया संवाद चला रहे हैं और नारा दे रहे हैं कि देश से भ्रष्टाचार हटाकर रहेंगे, नई पत्रकारिता देंगे...वगैरह...वगैरह। दीपक ने अपनी फेसबुक वॉल पर स्मृति के खिलाफ और सिंघल के समर्थन में लंबा-चौड़ा भाषण लिख मारा। हो सकता है, इसे उन्होंने अपने न्यूज पोर्टल पर भी लगाया हो।

पहले, दीपक शर्मा के बारे में थोड़ा जानिए...इस शख्स को आजतक वाले बहुत बड़ा खोजी पत्रकार और आतंकवाद व डी कंपनी (दाउद इब्राहीम) का एक्सपर्ट बताते थे। आजतक ने इनके हवाले से बहुत लंबे समय तक डी कंपनी पर कार्यक्रम दिखाकर अपनी टीआरपी बढ़ाई। यह शख्स रोजाना चिल्ला-चिल्लाकर दाऊद के यहां-वहां छिपे होने की जानकारी देता था। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की कई फर्जी कारगुजारियों को इस शख्स ने बढ़ाचढ़ाकर आजतक पर पेश किया...यह मेरा आरोप है कि ऐसे कार्यक्रम एक समुदाय विशेष को बेइज्जत करने, नीचा दिखाने के लिए, बीजेपी को संतुष्ट करने के लिए पेश किए जाते रहे...आजतक उन्हें दिखाता रहा। इस रिपोर्टर या उस चैनल ने कभी सच्चाई जुटाने और तथ्यों की पड़ताल की कोशिश नहीं की।

...दीपक शर्मा की फेसबुक वॉल पर आजतक के समर्थन में लिखे गए उनके भाषण या पोस्ट पर लोगों की जो प्रतिक्रिया आई, वह पढ़ने योग्य है। तमाम खबरिया चैनलों के लिए यह खतरे की घंटी है कि अगर अब भी नहीं सुधरे तो हालात बदतर होंगे।

यहां एक घटना का जिक्र जरूरी है। बीजेपी शासित हरियाणा के फरीदाबाद जिले में दंगा हुआ। अटाली गांव के मुसलमान अपनी जान बचाकर बल्लभगढ़ थाने में आ पहुंचे। देशभर का मीडिया इस घटना को कवर कर रहा है। एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार उस गांव में पहुंचे, थाने में पहुंचे और जो रिपोर्ट पेश की, उसकी सोशल मीडिया पर इतनी तारीफ हुई और हो रही है कि उसे बताना विषय से भटकना होगा। मैंने चैनल पर वह रिपोर्ट नहीं देखी थी लेकिन जब वह यूट्यूब पर आई तो देखने के बाद मैं रवीश की काबलियत की तारीफ किए बिना न रह सका। हालांकि कुल मिलाकर रवीश भारत के सबसे बेहतरीन टीवी पत्रकार हैं।...कहने का आशय यह है कि एक तरफ तो अशोक सिंघल, दीपक शर्मा जैसों की पत्रकारिता है तो दूसरी तरफ रवीश कुमार की पत्रकारिता है।

किसी चैनल की टीआरपी कैसे तय हो...मेरा मानना है कि यह पब्लिक पर छोड़ देना चाहिए कि वह टीवी पत्रकारिता की कसौटी को कैसी मापेगी न कि कोई तथाकथित कंपनी टीआरपी-टीआरपी का खेल खेलती और आप खुद को देश का नंबर 1 चैनल बताते रहें।  

कुछ टीवी चैनलों के मालिक हर तरह की धंधेबाजी, सौदेबाजी करके जिस तरह चैनल चला रहे हैं और कभी-कभार पुरस्कार भी पा जाते हैं...उन्होंने टीवी पत्रकारिता को दांव पर लगा दिया है। 


इसे पढ़ने के बाद टीवी के तमाम पत्रकार यही कहेंगे या नतीजा निकालेंगे कि चूंकि यूसुफ किरमानी प्रिंट जर्नलिज्म से हैं तो उन्हें टीवी चैनल में कभी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने अपना गुस्सा इस बहाने उतारा है। लेकिन इस संबंध में मैं कोई सफाई नहीं देने वाला...भाई लोग कुछ भी मतलब और मकसद निकालते रहें। मेरे कई मित्र और सहपाठी टीवी में हैं, लेकिन वे सभी टीवी की मौजूदा एंकर जमात या तथाकथित टीवी जर्नलिस्ट स्टार्स की तरह नहीं हैं और न इतना राग अलापते हैं। सुधरो...मित्रो सुधरो। यह प्रिंट बनाम टीवी पत्रकारिता की लड़ाई नहीं है, यह जवाबदेही की लड़ाई है। मिशनरी पत्रकारिता मत करो, कर भी नहीं पाओगे...लेकिन आत्मनिरीक्षण तो करो। गलती कहां हुई और आगे कैसे रोका जा सकता है...