Sunday, October 19, 2014

कुछ उलझनें...गर तुम सुलझा सको...

 ये कुछ उलझनें हैं...परोस रहा हूं आपको...गर तुम सुलझा सको...


टि्वटर (Twitter) पर आप की पार्टी के सांसद ने एक फोटो पोस्ट किया है...

आप देश के सबसे ब़ड़े उद्योगपति की पत्नी और बेटे से मिल रहे हैं...अपने दफ्तर में...

मिलना ही चाहिए...बुराई क्या है...

...लेकिन तीन दिन बाद गैस के दाम बढ़ा दिए जाते हैं और डीजल के दाम कम कर दिए जाते हैं...लेकिन साथ ही

 डीजल के दाम तय करने का अधिकार खुले बाजार में कंपनियों को दे दिया जाता है...(इसे लेकर मैं क्यो

उलझन में हूं, समझ में नहीं आता...)

मित्रों, ने फेसबुक (Facebook, Youtube) पर आपके चुनावी भाषणों की याद ताजा की ...काले धन की एक-एक पाई वापस लाएंगे...

आपका मंत्री कह रहा है कि...ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा और अगर वैसा हो जाएगा तो ऐसा हो जाएगा...

देश के सबसे बड़े रईस आपके दोस्त हैं...किसका कितना काला धन कहां रखा है, आपके रईस दोस्त को तो

जरूर पता होगा, उन्हीं से पूछ लीजिए...(ये उलझन तो आसानी से सुलझ सकती है)

लव जेहाद के इतने नाटकीय अंत की उम्मीद किसी को नहीं थी, क्या आपको थी...क्या आप भी फिर से लव

और जेहाद दोनों करेंगे...आखिर एकाकीपन तो आपको भी सताता होगा...क्या आपको दोनों की जरूरत नहीं है...

(ये मेरी ही नहीं देश की उलझन है...)


एक साधू बाबा कह रहे हैं कि मंदिरों में दलितों का प्रवेश नहीं होना चाहिए, ऐसा हुआ तो अनर्थ हो

जाएगा...फेसबुक (Facebook) पर तुलसीदास के रामायण की पंक्तियां...शूद्र गंवार, पशु और नारी...पोस्ट की जा रही हैं...

क्या ऐसी बातें करने वाले साधू बाबा को जेल भेजने का कोई कानून है, याद आता है कि गरबा के बयान पर एक

मौलाना को पकड़ कर अंदर कर दिया गया था...इस साधू बाबा का कोई इंतजाम है क्या...(ये बहुत बड़ी उलझन है...)

एक मीट कारोबारी जिस पर हवाला (Money Laundring) का काम करने का आऱोप है, उसके पूर्व सीबीआई डायरेक्टर से संबंधों और

कांग्रेस नेताओं से मिलीभगत की खबर खूब उछली, आपकी पार्टी ने गहन जांच की मांग की थी, अब वही

कारोबारी झाड़ू लगाने के एक कार्यक्रम में शामिल किए गए तथाकथित वीआईपी लोगों की लिस्ट में शामिल है,

क्या अब उसे देशभक्त मान लिया जाए...(इसे लेकर तो अल्पसंख्यक समुदाय भी उलझन में है...)


ब्रैंडिंग, मार्केटिंग, घृणा फैलाने वाली बातों के सहारे कब तक और कितने चुनाव जीते जा सकते हैं, क्या कभी

इस तरह के बेस्ट सेलिंग (Best Selling) विषय पर पुस्तक लिखने का विचार आया...चेतन भगत (Chetan Bhagat) से सलाह की जा सकती है,

तमाम बेस्ट सेलर (Best Seller) लिखने औऱ चापलूसी के सारे गुर इस महान लेखक को आते हैं...(ये उलझन तो चेतन भगत की भी है...)

किसी आईआईएम (IMM) वाले से भी बात की जा सकती है...जब वो लालू को रेलवे के प्रॉफिट पर बोलने के लिए बुला

सकते हैं तो आपको आपके प्रिय विषय...कैसे किसी को चोर और देशद्रोही साबित किया जा सकता है...पर

बोलने के लिए नहीं बुला सकते...हमें आईआईएम प्रशिक्षित लोग ही देश चलाने के लिए भी चाहिए...आप

जाएंगे, समझाएंगे तो नए लीडर पैदा होंगे....जो समाज औऱ देश को बांटने की फसल दोगुनी-चौगुनी ताकत से

पैदा करेंगे...2019 से भी आगे का इंतजाम हो जाएगा...(ये उलझन आपसे हमदर्दी के तहत साझा की जा रही है...)

...और कहां तक गिनाऊं...


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