मोदी अपडेटः कौन सही – कौन गलत

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की उस विशेष जांच समिति (सिट) के सामने पेश हुए जो गुलबर्गा सोसायटी नरसंहार के मामले की जांच कर रही है। सिट ने उनसे 5 घंटे तक पूछताछ की।

अपने पिछले लेख में मैंने इस मुद्दे को सामने रखा था। उस वक्त उस लेख पर कमेंट करने वालों ने कहा था कि मोदी को जब उस कमिटी ने तलब ही नहीं किया तो मोदी के पेश होने का मतलब ही नहीं था। बहरहाल, अब उन शीर्ष टिप्पणीकारों को जवाब मिल गया होगा कि मोदी को दरअसल उसी समय तलब किया गया था लेकिन उनकी तैयारी नहीं थी कि वे कमिटी को किस बात का जवाब किस तरह देंगे। उन्होंने अब 6 दिन का समय तैयारी में लगाया और शनिवार को कमिटी के सामने पेश हो गए।

अब वे शीर्ष टिप्पणीकार तय करें कि कौन सही था और कौन गलत।

Comments

युसूफ किरमानी साहब, पहली बात तो यह कि अगर हमारे वे जांचकर्ता जो मोदी जी को समन दे चुके थे ( आपके और अन्य सेक्युलर खबरिया माध्यमो के अनुसार ) तो मोदी जी के खुले पत्र पर चुप क्यों रहे ? दूसरी बात कि जिस देश में २६ साल बाद भी सज्जन कुमार को गैर जमानती वारंट इश्यु होने के बाद खुला छोड़ दिया गया हो, और हमारा सेक्युलर मीडिया चूं न करे ! वहाँ , सिर्फ मोदी जी के लिए इतनी हाय-तोबा क्यों ?
फिर मोदी के खुले पत्र पर चुप्पी क्यों? अगर वे झूठ बोल रहे हैं तो प्रतिवाद न तो एसआईटी की तरफ से आया, न ही सरकार या अभियोग लगाने वालों की और से कुछ कहा गया. क्यों?
पूछने से पहले जवाब दें कि मोदी झूठ बोल रहे हैं तो मोदी जी के खुले पत्र पर प्रतिवाद न तो एसआईटी की तरफ से आया, न ही सरकार या अभियोग लगाने वालों की और से कुछ कहा गया. क्यों?
Yusuf Kirmani said…
आप ही लोग बताएं कि जब जांच कमिटी ने मोदी को नहीं बुलाया था तो क्या मोदी को अचानक सपना आया और वे शनिवार को घूमते-टहलते वहां पहुंच गए। एक ऐसा मुख्यमंत्री जो बहुत व्यस्त रहता हो, उससे कमिटी के लोग 5 घंटे तक पूछताछ करते रहे, वह भी बिना बुलाए...
मोदी को २१ मार्च (रविवार) तक पेश होने का कोई समन नहीं मिला था. मीडिया ने यह खबर यूँ ही उड़ा दी थी, मोदी के खंडन का भी मीडिया, कांग्रेस, सरकार, एस आई टी और अभियोग पक्ष ने कोई जवाब नहीं दिया.

एस आई टी ने समन की उपेक्षा की शिकायत भी नहीं की.

समन २२ मार्च के बाद इसी सप्ताह भेजा गया है. और मोदी बाकायदा पेश हुए.

खैर हिन्दुओं के खिलाफ आपकी नफरत समझ में आती, और जिस समुदाय नफरत हो उसके सदस्यों खिलाफ झूठ बोलना या अफवाह फैलाना आपके हिसाब से सही हो सकता है.
कृपया ये बताने का कष्ट करेगे की गुजरात में दंगे क्यों हुए? पहले आप लोग थप्पड़ मारते है और जब उस थप्पड़ के जवाब में कसकर थप्पड़ पडती है तो शोर मचाते है|
شہروز said…
धर्म या जाति या क्षेत्र के नाम पर हिंसा को बढ़ावा जो भी दे -- मोदी हों, बुखारी हों,ठाकरे हों,मायावती हों या सज्जन ऐसे लोग कदापि सज्जन नहीं हो सकते.
और मीडिया को सिर्फ कोसने से काम नहीं चलता.
@ शहरोज़

मामला अब अदालत में है. धर्म या जाति या क्षेत्र के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप सही हैं या नहीं यह अदालत को तय करने दें. जहाँ तक सज्जन होने की बात है आज राजनीती में क्या कोई सज्जन है?

और मीडिया को कोसने का काम इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि उसने आधारहीन अफवाह उड़ाई, और कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया.
Unknown said…
मुझे लगता है कि पॉलिटिकल पार्टियां सिर्फ आपस में लड-झगड रही है!... कहावत है कि 'जिसकी लाठी उसकी भैस!... लाठी कभी किसी एक पोलोटिकल पार्टी के हाथ में होती है तो कभी किसी दूसरी पोलिटिकल पार्टी के हाथ में होती है...दूध का धुला कोई भी नहीं है!... मोदी, अड्वाणी, सज्जन कुमार.... किस किस का नाम लें!... आम जनता तो पीस ही रही है!.... हाल ही में अमिताभ बच्चन को लेकर बवंडर खडा हुआ!...किस वजह से?...इसका जवाब किसीके पास नहीं है!

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