Saturday, October 31, 2009

हेलोवीन...मुखौटा लगा लो मेरे भाई



अगर आप मौजूदा युवा पीढ़ी के मुकाबले दस साल पहले के लोगों से पूछें कि भाई ये हेलोवीन (Halloween) या हालोवीन क्या बला है तो वे लोग ठीक से इसके बारे में जवाब नहीं दे पाएंगे। लेकिन मौजूदा मोबाइल मार्का पीढ़ी (Mobile Generation) को पता है कि यह हेलोवीन क्या बला है। जब आप यह लेख पढ़ रहे होंगे तो तमाम अमेरिकी लोग (American People) या तो हेलोवीन मना रहे होंगे या मनाने की तैयारी कर रहे होंगे।

हेलोवीन मनाने वाले तरह-तरह के मुखौटे बाजार से खरीद कर उसे चेहरों पर लगाते हैं और फिर एक दूसरे को डराते नजर आते हैं। अपने भारत देश में जो एक मिथ है कि अगले जन्म में इंसान को भूत, चुड़ै़ल, जिन, कुत्ता, सियार और न जाने क्या-क्या बनकर अपने पापों की कीमत चुकानी पड़ती है, यह मामला भी कुछ वैसा ही है। अमेरिकी भाई लोग इसी जन्म में मुखौटे लगाकर इस करतब को कर डालते हैं। उन्हें इस चीज में इतना मजा आता है कि उन्होंने इसे त्योहार का रूप दे दिया है और अब यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है। 31 अक्टूबर को सारे अमेरिकी (बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष) भूत, शैतान या सियार बने नजर आते हैं।

खबरों के मुताबिक अमेरिका हेलोवीन मार्केट (Halloween Market) में इस बार ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden ) के मुखौटे की भारी मांग है। कहते हैं कि अमेरिकी इस मुखौटे की मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। इसके पीछे अमेरिकियों का यह मनोविज्ञान बताया जा रहा है कि जिस खूंखार आतंकवादी को वहां की सरकार जीते जी पकड़ नहीं पाई और अगर उसका मुखौटा लगाकर किसी को डराया जाए तो वे जरूर डरेंगे। क्योंकि 9-11 का जो खौफ अमेरिकियों पर अब तक है वे लादेन का मुखौटा लगाकर उसे दूर भगाना चाहते हैं। बताते हैं कि शुरू में अमेरिकी मुखौटा कंपनियों ने तालिबानी (Taliban) बैतुल्लाह महसूद का मुखौटा बाजार में उतारा और एक सर्वे कराया कि यह प्रोडक्ट कितना कामयाब रहेगा लेकिन अमेरिकियों ने उसे रिजेक्ट कर दिया, तब जाकर उनके मार्केटिंग मैनेजरों ने लादेन के मुखौटे पर ध्यान केंद्रित किया और सर्वे में रिपोर्ट भी पाजिटिव आई।

अपने यहां भी मुखौटे तो खैऱ सदा से रहे हैं और सिर्फ बच्चे ही उनको लगाकर एक-दूसरे को डरा रहे होते हैं और अपने यहां यह सब दशहरा से लेकर दीवाली तक या कभी-कभी होली पर होता है। लेकिन अगर आप किसी गांव में जाएं तो आपको खेतों में जगह-जगह मुखौटे लगे मिल जाएंगे जो पशु-पक्षियों को डराने के लिए लगाए जाते हैं। भारत में पाई जाने वाली छुटभैया से लेकर अक्सफर्ड डिक्शनरी में इसका मतलब बिजूका, धूहा, जूजू, हौव्वा और डरावा लिखा है लेकिन यह सब आपको हेलोवीन का अर्थ खोजने पर नहीं मिलेगा, बल्कि अगर आप स्केयर क्रो का अर्थ खोजेंगे तो यही सब शब्द मिलेंगे। लेकिन कुल मिलाकरर मुखौटा ही इन बिजूकों का बदला हुआ रूप है।

इन अमेरिकियों को मानना पड़ेगा कि इनके परदादा हमारे यहां खेतों में टहलने के दौरान यह कॉसेप्ट लेकर गए होंगे और अपने देश में इसकी आड़ में रोजगार के इतने अवसर पैदा कर दिए कि वह हेलोवीन ड्रिवेन मार्केट हो गया है। यहां किसी भारतीय समाज विज्ञानी या पत्रकार की नजर खेतों में खड़े इन मुखौटों पर पता क्यों नहीं पड़ी, वरना चांस यहां भी बन सकता था। लेकिन हम लोग चूंकि अमेरिकियों की जूठन खाने के आदी हैं तो छोटे-मोटे लेवल का हेलोवीन ड्रिवेन मार्केट यहां भी खड़ा कर देंगे।

बहरहाल, वह तो भला हो बीजेपी का, जब इस पार्टी के किसी नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी का मुखौटा कहा तो भारत में भी मुखौटों का पहली बार सम्मान होना शुरू हुआ और देखते ही देखते बाजार तरह-तरह के मुखौटों या बिजूके से पटने लगा। अब यह तो पता नहीं कि फिलवक्त बीजेपी का नया मुखौटा या बिजूका कौन है लेकिन बीजेपी की राजनीति पर बारीक नजर रखने वाले बताते हैं कि निकट भविष्य में यह सेहरा नरेंद्र मोदी के सिर बांधा जा सकता है यानी उन्हें बीजेपी के नए मुखौटे के रूप में पेश किया जा सकता है। लेकिन राजनीतिक मुखौटों पर अभी बात नहीं करना चाहता।

अपने देश में भी बाकायदा मुखौटा ड्रिवेन मार्केट (यानी मुखौटा आधारित बाजार Halloween Driven Market) है। भारतीय चाहे अमेरिका से प्रेरणा लें या बीजेपी के मुखौटे से लेकिन उन्होंने इसे अपनी संस्कृति में बाकायदा ढालना शुरू कर दिया है। हर साल भारतीय मुखौटा बाजार तरक्की पर है। अब मुझे यह तो ठीक से नहीं पता कि भारतीय मुखौटा बाजार का सबसे बड़ा ब्रैंड (Big Brand) कौन है लेकिन अंदाजा है कि शायद भारतीय कंपनियां मोदी या मुख्तार अब्बास नकवी टाइप लोगों को ही अपना ब्रैंड एंबेसडर बनाना चाहेंगी। हालांकि इसमें अपने बॉलिवुड के शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान, सैफ अली खान, इमरान खान या आने वाला कोई और खान फिट रहता लेकिन उनकी रुचि हेलोवीन में ज्यादा न होने के कारण भारतीय कंपनियां उन्हें मौका देना नहीं चाहतीं। हालांकि अमिताभ बच्चन से अगर बात करते तो वे शायद खुद या अमर सिंह को आगे करके इस काम को आसान कर देते लेकिन भारतीय कंपनियों के ब्रैंड स्टैंडर्ड शायद बहुत टफ मालूम पड़ते हैं।

एक खबर के मुताबिक दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में हेलोवीन क्लब बने हुए हैं जिनमें मोटी फीस भरकर कोई इनकी मेंबरशिप ले सकता है। बताया जाता है कि उस क्लब की हेलोवीन पार्टी में जाकर आप कुछ भी कर सकते हैं। यानी अगर गलती से आपका पड़ोसी उस पार्टी में मिल जाए और आप उसे पसंद नहीं करते तो आप उसे भूत, शैतान या आपकी पत्नी उसे चुड़ैल या डाइन (Witch) बनकर डरा सकती हैं। सोचिए कितना मजा आता होगा जब इस बहाने आप अपनी खुन्नस निकाल रहे होते हैं।

तो चलिए अपन लोग भी हेलोवीन जैसा कुछ मना डालते हैं...

4 comments:

Arvind Mishra said...

हैलोवीन पर विस्तृत और रोचक जानकारी बहुत आभार

Suman said...

nice

शरद कोकास said...

लादेन का मुखौटा ....हाहाहाहा

Ahteram said...

हेलोवीन के भारतीय रूप से परिचित करने के लिए युसूफ साहब को बहुत बहुत धन्यवाद