Tuesday, September 1, 2009

भगवान आप किसके साथ हैं


भगवान जी बहुत मुश्किल में हैं कि आखिर वह एक कॉरपोरेट घराने (corporate house) की आपसी लड़ाई में किसका साथ दें। मुकेश अंबानी को आशीर्वाद दें या फिर छोटे अनिल अंबानी को तथास्तु बोलें। भगवान इतनी मुश्किल में कभी नहीं पड़े। भगवान करें भी तो क्या करें...

अनिल अंबानी इस समय देश के सबसे पूजनीय स्थलों पुरी, सिद्धि विनायक मंदिर और गुजरात के कुछ मंदिरों की शरण में हैं। वह इस समय लगभग हर पहुंचे हुए मंदिर की घंटी बजा रहे हैं। इस यात्रा में वह अकेले नहीं हैं, उनके साथ उनकी मां कोकिला बेन और बहन व बहनोई भी साथ हैं। बड़े भाई मुकेश अंबानी के साथ चल रही उनकी कॉरपोरेट वॉर (corporate war) में वह भगवान जी से समर्थन मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो रही है और अनिल चाहते हैं कि कोर्ट उनके हक में फैसला सुनाए। सगे भाई का अहित हो। इतिहास (history) में मैंने और आप सब ने पढ़ा है कि किस तरह मुगल पीरियड में गद्दी हथियाने के लिए भाई ने भाई का कत्ल करा दिया या बेटे ने बाप को जेल में डाल दिया। ठीक ऐसा ही कुछ अब देखने को मिल रहा है जिसमें सिर्फ दो भाइयों की ही लड़ाई नहीं बल्कि भारत सरकार भी लंबी-लंबी सांसे ले रही है।

मुकेश की कंपनी गुजरात के बेसिन से जिस गैस का उत्पादन करने वाली है, उसकी सबसे बड़ी खरीदार भारत सरकार की कंपनी एनटीपीसी है। आरोप है कि एनटीपीसी को मुकेश मंहगे दाम पर गैस बेचने जा रहे हैं। अनिल ने अपने पावर प्लांट के लिए गैस मांगी थी लेकिन उन्हें गैस देने में आनाकानी की गई। अनिल ने अपने पावर प्लांट इसी उम्मीद में लगाए थे कि भाई से गैस ले लेंगे। लेकिन संपत्ति बंटवारे की लड़ाई में जो कड़वाहट हुई थी तो मुकेश भला अनिल को सस्ती गैस कैसे देते। अनिल ने मीडिया में बड़े भाई की कंपनी के खिलाफ लगातार विज्ञापन अभियान छेड़ा और उनकी कंपनी को सबसे बड़ा चोर बताया। भारत के कॉरपोरेट इतिहास (corporate history) में इतना बड़ा घृणित प्रचार अभियान आज तक मैंने अपने होशोहवास में नहीं देखा और पुराने पत्रकार भी यही बताते हैं कि उन्हें भी इस तरह की कोई घटना याद नहीं आती।

दोनों भाइयों की इस लड़ाई में मैं किसी को पाकसाफ या किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। लेकिन जिस तरह इस कॉरपोरेट वॉर में पूरी राजनीति और मीडिया का बहुत बड़ा वर्ग किसी न किसी भाई के साथ खड़ा नजर आ रहा है वह भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। यह खतरा हालांकि बहुत पहले से है लेकिन अब वह और भी स्पष्ट तरीके से सामने आया है। इन दोनों भाइयों के पिताश्री धीरूभाई अंबानी ने स्व. राजीव गांधी से संपर्कों के बल पर रिलायंस नाम का बिजनेस अंपायर (business empire) खड़ा कर दिया। पिता जी नहीं रहे। उसके बाद राजनीति में पैठ बनाने के तरीके बदल गए। पिता की मौत के फौरन बाद अनिल अंबानी ने आजादी चाही। अपनी बॉलिवुड बैकग्राउंड की धर्मपत्नी टीना मुनीम की बदौलत अमिताभ तक पहुंच बनाई और वहां से अमर सिंह और फिर सीधे मुलायम सिंह यादव। समाजवादी पार्टी में कई ऐसे होनहार थे जिन्हें राज्यसभा में भेजा जा सकता था लेकिन राम मनोहर लोहिया के कथित विरासत वाली इस पार्टी ने खरबपति अनिल अंबानी को राज्यसभा में भेजा। फिर तो उन्होंने दुनिया मुट्ठी में कर ली। यह सब हमने आपने अपनी आंखों के सामने होते हुए देखा।

इस दौरान मुकेश ने क्या किया। वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ फाइव स्टार होटल के टैरेस पर ब्रेकफास्ट लेते रहे। सत्ता के गलियारे में संदेश जाना ही थी। पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा और मुकेश के संबंध किसी से छिपे नहीं।
जो कॉरपोरेट वॉर कभी धीरूभाई अंबानी और नुसली वाडिया (बांबे डाइंग के मालिक) के बीच लड़ी गई थी आज वह दो भाइयों के बीच लड़ी जा रही है। ऐसा लगता है कि जैसे दोनों भाइयों ने पूरे भारत को अपने पास गिरवी रख लिया है। हालात ये हैं कि अगर आप किसी राजनीतिक पार्टी में हैं तो आपको एक भाई के साथ खड़ा होना पड़ेगा, मीडिया में हैं तो किसी एक भाई के लिए साफ्ट कार्नर रखना पड़ेगा। और तो और आजकल योग से लेकर भोग तक पर प्रवचन करने वाले भी किसी न किसी भाई के साथ हैं। पंजाब के जालंधर शहर में एक बहुत बड़े बाबा अपने कार्यक्रम में किसी एक भाई के हेलिकॉप्टर से पहुंचते हैं। देश के सबसे ईमानदार नौकरशाह अपनी रिश्तेदारी में जाने के लिए किसी एक भाई का हवाई जहाज मांग लेते हैं। अगर आप स्टॉक मार्केट के दलाल (broker) या राजनीति के दलाल (political broker) हैं तो भी आपको किसी एक भाई के साथ जाना पड़ेगा। आप बॉलिवुड में हैं और फाइनैंस चाहिए तो किसी एक भाई के पास जाना पड़ेगा और वह भाई बदले में आप से अपने बाप, या मां या किसी अन्य रिश्तेदार को महान बताने वाली पिक्चर बनाने को कहेगा, जिसमें उस समय के नामी स्टार काम करेंगे। यह सब क्या है।

न्यायपालिका को लेकर मेरे या इस देश में सभी नागरिक के हाथ बंधे हैं कि वह अदालत के किसी फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकता और न ही किसी जज के खिलाफ कुछ बोल सकता है। जजों के हाल पर इसलिए मैं भी कुछ नहीं कहना चाहता।

...इसीलिए मैंने ऊपर अपनी बात भगवान के जरिए कही कि हो न हो भगवान भी आजकल जरूर पसोपेश में होंगे। उन्हें किसी न किसी भाई के साथ तो खड़ा होना पड़ेगा। अच्छा आप बताइए आप किस भाई के साथ हैं...

1 comment:

varsha said...

सबसे पहले तो बहुत बहुत शुक्रिया इस मामले में अधिक रौशनी डालने व संतुलित विश्लेषण के लिए।
आजकल बिज़नस किस तरह चलते हैं इसमें कोई शक नहीं है, कहने को एक बराबर प्लेटफोर्म है सबके लिए लेकिन 'लॉबी' हर जगह मौजूद है।
और बात रही अम्बानी भाइयों की तो इससे अच्छा धीरुभाई अपनी जायदाद किसी ट्रस्ट के नाम कर देते, भाइयों को जब अपने बल बूते पर पैसा कमाना पड़ता तो यह सब झगडे करने का वक्त नहीं मिलता।