Monday, March 16, 2009

भूखे पेट को स्मार्ट फोन, क्या आइडिया है

जिस देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों (बीपीएल) की भूख शांत करने के लिए फर्जी तौर पर ही सही तमाम राज्य सरकारों द्वारा अनाज बांटा जाता हो, उन बीपीएल लोगों को बीजेपी के भावी प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सत्ता में आने पर स्मार्ट फोन बांटेंगे। इतना ही नहीं दस हजार का लैपटॉप बिकवाएंगे और सभी स्कूलों में इंटरनेट से पढ़ाई करवाई जाएगी। यह बात बीजेपी नेता ने शनिवार को नई दिल्ली में बीजेपी का आईटी विजन पत्र जारी करते हुए कही।
मैंने यूपी के जिस स्कूल से ग्रासरूट लेवल की पढ़ाई की है, वहां मेरे एक टीचर अक्सर एक कहावत सुनाया करते थे – घर में नहीं दाने और अम्मा चली भुनाने। यह कहावत कोई इतनी गूढ़ नहीं है कि आप को समझ में न आए लेकिन अगर समझ में नहीं आ रही है तो वह है इस देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी, जो मई में केंद्र में सरकार बनाने का दावा अभी से कर रही है। बीपीएल आबादी के मामले में सबसे खराब हालत बिहार की है, जहां बीजेपी नीतीश कुमार के साथ सत्ता में भागीदारी कर रही है। इस राज्य में बीपीएल परिवारों की आबादी 1 करोड़ 21 लाख है। वहां पर बीपीएल आबादी बढ़ रही है और इस आबादी को दो वक्त की रोटी मुहैया कराने के लिए जो सरकारी फंड सरकार से मिलता है, उस पैसे को खा-खाकर सरकारी अफसरों की तोंद निकल आई है। जिस उड़ीसा में अभी हाल तक बीजेपी सत्ता में नवीन पटनायक के साथ सत्ता में भागीदारी कर रही थी, वहीं पर कालाहांडी है और उड़ीसी में भी बीपीएल परिवारों की हालत बिहार के मुकाबले जरा भी अच्छी नहीं है। हालांकि मेरे पास उन राज्यों का भी आंकड़ा है जहां बीजेपी शासित और कांग्रेस शासित सरकारें हैं लेकिन इस लेख को महज आंकड़ो का लेख न बनाने की वजह से उनकी बात नहीं की जा रही है। जब भी इस देश में गरीबी, भुखमरी और आपदाओं का जिक्र आता है तो उसमें सबसे पहले बिहार, उड़ीसा और यूपी की ही चर्चा की जाती है।
मंदी की मार अभी खत्म नहीं हुई है। यूपीए सरकार को काफी हद तक इसके लिए दोषी ठहराया जा रहा है लेकिन बीजेपी या कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दल इस मुद्दे पर बात करने की बजाय भूखे पेटों को स्मार्ट कार्ड देने की बात कर रहे हैं। अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि यह मंदी लंबी चलेगी और कोई-कोई इसके चार साल तक चलते रहने की अटकलें लगा रहे हैं लेकिन ये पार्टियां इससे उबरने के लिए कोई हल या विजन पेश नहीं कर रही हैं। आखिर ये लोग देश के किन लोगों को बेवकूफ बनाना चाहते हैं, यह मेरी भी समझ से बाहर है। क्या यह माना जाए कि देश में कोई टेलीकॉम लाबी सक्रिय है जिसने भूखे और गरीब लोगों को स्मार्ट फोन देने का अनोखा आइडिया बीजेपी को दे दिया हो। और अगर देश के 10 करोड़ बीपीएल परिवारों को सिर्फ पांच रुपया लेकर भी बीजेपी ने स्मार्ट फोन दिया तो जिस टेलीकाम कंपनी को यह ठेका मिलेगा...बस अब अंदाजा लगा लीजिए। कम से कम एक गंभीर नेता से देश को इतने भद्दे मजाक की उम्मीद नहीं थी और विशेषकर जब वह प्रधानमंत्री बनने के सपनों में खोया हो।
जिस देश के सभी स्कूलों में ठीक से पानी पीने का भी इंतजाम नहीं है और बच्चे कई-कई मील चलकर स्कूल पहुंचते हैं, वहां हर स्कूल में इंटरनेट पहुंचाने की बात की जा रही है। यानी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जगह सीधे इंटरनेट पहुंचाने की बात हो रही है। हां, अगर बीजेपी और आडवाणी ने यह बात शहरी स्कूलों के संदर्भ में कही है तो कुछ समझ में आती है लेकिन वहां तो गांव के ऐसे स्कूलों में इंटरनेट पहुंचाने की बात की जा रही है जहां के स्कूल में हेड मास्टर को सामुदायिक फोन जैसी सुविधा भी हासिल नहीं है। अगर किसी गांव में सामुदायिक फोन है भी तो वह वहां के ग्राम प्रधान को ही मिलता है।
कंप्यूटर शिक्षा का जो हाल शहर के पब्लिक स्कूलों और सरकारी स्कूलों में है, वह भी किसी छिपा नहीं है। अगर आपका बच्चा शहर में किसी आलीशान बिल्डिंग वाले स्कूल में पढ़ता है तो हफ्ते में दो-चार दिन कंप्यूटर क्लास भी लगेगी लेकिन क्या मजाल है कि बच्चा स्कूल के कंप्यूटरों को हाथ लगा सके या उस पर अपने किसी बालसुलभ हरकत को व्यक्त कर सके। और अगर गलती से किसी सरकारी स्कूल में कंप्यूटर है तो वहां उसका पढ़ाने वाला टीचर न होने की वजह से वह पड़े-पड़े खराब हो गया होगा। आप कह सकते हैं कि यह सब बातें तो बहुत सामान्य हैं और इस आधार पर इंटरनेट के जरिए पढ़ाई के आइडिया को खारिज नहीं किया जा सकता। आप सही हैं लेकिन अकेले में जरूर सोचिएगा कि क्या यह संभव है बिना बुनियादी सुविधाएं जुटाए?
फिर भी अगर आप सोचते हैं कि बीजेपी का गरीबों और भूखे लोगों को स्मार्ट फोन देने का विजन बुरा नहीं है तो पांच साल पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में जब यही पार्टी पांच साल एनडीए के रूप में राज करने के बाद आपसे कह रही थी कि इंडिया इज शाइनिंग (भारत उदय) तब आपने उसे ठीक से पूरा वोट क्यों नहीं दिया था?

नीचे दो खबरें अंग्रेजी में हैं, जिनसे आपको इस लेख का संदर्भ समझने में मदद मिलेगी-

Two trillion on IT Vision if BJP wins

Source : DNA INDIA March 15 2009

New Delhi: Change through information technology (IT) is the new mantra of the Bharatiya Janata Party (BJP) to woo young voters, after its `Shining India' campaign failed five years ago. If implemented, the party's IT Vision would mean an estimated investment of Rs 2 trillion (Rs 200,000 crore) over a period of five years, though there's no official comment on the project cost.
The party has promised fully-loaded laptop computers worth Rs 10,000 for 10 millionstudents if it comes to power, as opposed to the "under-powered Net-top" that was recently launched by the UPA government. It also wants to give out smart mobile phones free to every BPL (below poverty line) family, overcome the economic slowdown through use of technology, create 1.2 crore IT-enabled jobs in rural areas, provide broadband internet across all towns and villages, strengthen e-banking facility, roll out unrestricted voice over internet protocol (VoIP) for making cheap long-distance calls, offer health insurance scheme for all using the IT platform, introduce multi-purpose national identity card, and support open-source software. Not just that, India must equal China in every IT parameter in five years. All this and more was part of the ambitious IT Vision of the biggest Opposition Party of the country.
On Saturday, BJP's Prime Ministerial candidate LK Advani, flanked by other leaders including Rajnath Singh, Sushma Swaraj, Ravi Shankar Prasad, Arun Shourie, Jaswant Singh and Arun Jaitley, launched the party's IT Vision. Somemajor software companies havebacked the BJP's mega plan.

BPL population declines, says Centre; 8 states refute claim

Source: DNAINDIA march 17 2008

NEW DELHI: Eight states, including Bihar, Orissa and Punjab, have sought additional food grain from the Centre to feed their increasing BPL population, which is in contrast to the Centre's claim that the number of people under this category has declined by 8.5 per cent.
"A number of state governments have requested to enhance allocation of foodgrain to their states on the basis of the higher number of BPL cards issued by them," Food Minister Sharad Pawar said in a written reply to Lok Sabha.
According to the list, Bihar, Kerala, Orissa, Karnataka, West Bengal, Punjab, Madhya Pradesh, Chhattisgarh and the union territory of Daman and Diu have requested the Centre to increase allocation of foodgrain for BPL families.
While Bihar has requested allocation of foodgrain for 1.21 crore BPL families, the Centre says only 65.23 lakh families are covered under BPL in the state. Similarly, Karnataka wants food grains for 63 lakh BPL families, but the Centre pegs the number at 31.29 lakh.
According to Planning Commission, the percentage of BPL population has come down to 27.5 per cent in 2004-05 from 36 per cent in 1993-94. However, the Centre continues to allocate food grain on 1993-94 estimate and there has been no reduction in the PDS subsidised kerosene oil after 2004-05, he said.

5 comments:

Mired Mirage said...

सरकारी स्कूलों के बारे में तो नहीं जानती परन्तु हमारे स्कूल में जहाँ की फीस शहरों के मुकाबले काफी कम ही है, कम्प्यूटर का उपयोग बच्चे खूब करते हैं और सभी बच्चे करते हैं।
कोई भी दल सरकार अच्छे से चला ले वही बहुत है, क्या बाँटेगी कहना बेकार है।
घुघूती बासूती

Udan Tashtari said...

बुनियादी सुविधाओं को संजोते ही अभी एक लम्बा अंतराल लगेगा.

अच्छा चिन्तन!!

विष्णु बैरागी said...

हाथों को काम और पेट को रोटी दिला पाना जब मुमकिन नहीं रह गया तो जो मुमकिन है, वही दिलाएंगे। अपने भूखों मरने की खबर अब मोबाइल के जरिए अधिक आसानी से पहुचाई जा सकेगी।

Dr. Amar Jyoti said...

हक़ीकत यह है शासक वर्गों और प्रतिनिधि दलों से जनता का मोह भंग हो चुका है और ये राजनीतिक दल भी इस तथ्य से भली भांति अवगत हैं। राम-मन्दिर,राम-सेतु से लेकर स्मार्ट फोन तक सब सत्ता पर कब्ज़ा बनाये रखने की इनकी छटपटाहट के लक्षण हैं।

Anonymous said...

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