Friday, November 7, 2008

एक शिकायत चिट्ठाजगत वालों से


यह क्या है मेरे भाई? मैंने नीचे की पोस्ट हिंदी अंग्रेजी में मिलाकर की लेकिन पिंग करने पर आपने उसे अपने ताजा चिट्ठों की सूची में नहीं दिखाया। माना कि आप सिर्फ हिंदी के लिए ही समर्पित हैं लेकिन इस तरह के चिट्ठों को स्वीकार करने में आपका स्टैंडर्ड तो नहीं गिरेगा? अब तो समय हिंदी अंग्रेजी के मिलजुल कर (देखो भाई लोग गाली मत देने लगना, हमें भी हिंदी से उतना ही प्यार है जितना आपको है) चलने का है। दरअसल, इस तरह का सहारा लेने की जरूरत कभी-कभी तब पड़ती है जब आप अपना नजरिया किसी खास मुल्क के लोगों को पढ़ाना चाहते हैं। चूंकि मेरा ब्लॉग अमेरिका में काफी खोला और पढ़ा जा रहा है, इसलिए मैंने यह कदम उठाया। अन्यथा अपना इरादा खालिस हिंदी में ही बात करने का रहता है।
बहरहाल, यह गलती अगर मेरी ही है तो भी चिट्ठाजगत वालों को इस पर विचार तो करना चाहिए कि क्या यह संभव है। अगर यह संभव नहीं है तो कुछ और उपाय सोचा जाएगा। मैंने यह पोस्ट यहां सार्वजनिक इसलिए भी की शायद किसी और को भी इससे दो-चार होना पड़ा हो। अन्यथा यह बात तो मैं चिट्ठा जगत को ई-मेल के जरिए लिख भेजता। बहरहाल, अब गेंद उनके पाले में है।

5 comments:

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

UNALO MAIL KEEJIE GALATE SUDHAR JAAEGEE
CHITTHA JAGAT MEN YE BAAT NAHEE DIKHI MUJHE KAI DINO SE JUDAA HOON
REGARD

Udan Tashtari said...

सहीहै-गेंद उनके पाले में है तो जबाब भी आता ही होगा.

Anonymous said...

http://masijeevi.blogspot.com/2007/08/blog-post_04.html

Anonymous said...

http://tippanikar.blogspot.com/2007/10/blog-post_1637.html

फ़िरदौस ख़ान said...

हिन्दी के साथ इंग्लिश के अलावा दूसरी भाषाओं को भी जगह दी जा सकती है...