Friday, October 3, 2008

हम हिंदी ब्लॉगर्स







हिंदी में ब्लॉगिंग (blogging in hindi) न करने का अफसोस मुझे लंबे अरसे से रहा है। तमाम मित्रों ने मेरे कहने पर ब्लॉग शुरू किए और काफी बेहतर ढंग से अब भी कर रहे हैं लेकिन मैं उनसे किए गए वायदे के बावजूद इसके लिए वक्त नहीं निकल पा रहा था। बहरहाल, अब किसी लापरवाही की आड़ न लेते हुए मैंने फैसला किया कि अपनी मातृभाषा में तो ब्लॉगिंग करना ही पड़ेगी। हिंदी में जिस तरह से रोजाना नए-नए ब्लॉग आ रहे हैं, उससे हिंदी काफी समृद्ध हो रही है और मेरी कोशिश भी उसमें कुछ योगदान करने है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हिंदी के ब्लॉगों में लिखा क्या जाए? कुछ बहुत बेहतर ब्लॉग हैं जहां तमाम राजनीतिक.सामाजिक और धार्मिक विषयों पर बहस होती है लेकिन कतिपय पत्रकारों द्वारा चलाए जा रहे हैं इन ब्लॉगों का क्या कुल मकसद यही है। आखिर English में विभिन्न विषयों में जो ब्लॉग हैं और जिनको खूब पढ़ा भी जाता है, वैसा कुछ हिंदी में क्यों नहीं है? हालांकि हिंदी में कुछ अच्छी पहल हुई है जिसमें आर. अनुराधा (लिंक – http://ranuradha.blogspot.com) का कैंसर पर पहला एसा ब्लॉग है जो हिंदी में है और कैंसर के मरीजों को संघर्ष की प्रेरणा देता है। लेकिन हिंदी में इस तरह के प्रयोग ऊंगलियों पर ही गिनने लायक हैं। आप यकीन करेंगे कि अंग्रेजी में एसे भी ब्लॉग हैं जहां बच्चों को आर्ट वर्क करने के लिए प्रेरित किया जाता है। एक ब्लॉग मुझे एसा भी मिला जिसमें बच्चे के स्कूल से आने के बाद मां उससे पूरी जानकारी लेती जैसे teacher ने कोई खास comment तो नहीं किया, किसी बच्चे ने उसके लंच पर टिप्पणी तो नहीं की वगैरह और अगर नई स्थिति सामने आने के बाद उस पर अपना observation देते हुए टिप्पणी। एक रोचक घटना का जिक्र यहां करना चाहूंगा। जिसमें एक भारतीय बच्चे का उल्लेख था कि उसने अपनी भारत यात्रा में कहीं देखा था कि जब fire brigade की गाड़ी का सायरन वहां गूंजता है तो समझो कि फायरमैन उस गाड़ी में खाना खा रहे हैं जबकि उसके क्लासमेट ने यूएस के फायर ब्रिगेड का जिक्र करते हुए वहां की गौरवगाथा सुना डाली। उस महिला ने इस बात को गंभीरता से लिया और बच्चे का brainwash करने में पूरा समय दिया कि भारतीय फायर ब्रिगेड के लोग भी उतने ही बहादुर होते हैं और भारत में फायर ब्रिगेड की गाड़ी का सायरन बजने का मतलब यह नहीं है कि फायरमैन खाना खा रहे हैं और आराम फरमा रहे हैं। उसके बाद वह मां बच्चे को खासकर वैकेशन प्लान करके भारत ले आई और फायरब्रिगेड की पूरी working समझाई। बच्चे को भी कुछ समझ में आया और उसने बिना मौका गंवाए अपने स्कूल में जाकर छोटी-मोटी स्पीच दे डाली। आप जानते हैं कि उस पोस्टिंग के कारण ब्लागर में उसे Blog of the note का दर्जा दिया। कहने का आशय यह है कि Hindi Bloggers को भी कुछ इसी तरह की कोशिश करनी पड़ेगी, नए-नए विषयों को सामने रखना होगा, तब हिंदी को और आगे बढ़ाया जा सकेगा। मेरी भी कोशिश रहेगी कि पोस्टिंग का सिलसिला बराबर जारी रहे और तमाम बहस-मुबाहिसों को जगह देने के बावजूद नए विषयों को touch किया जाए। देखते हैं कोशिश कितनी कामयाब रहती है...

1 comment:

DHAROHAR said...

Acha vishay uthaya hai aapne.Swagat.