Wednesday, February 21, 2018

पीएनबी महाघोटाला : जेटली तो बोले...अब मोदी की बारी

देश में इतना बड़ा पीएनबी घोटाला हो गया। दो लोग चुप रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरूण जेटली कुछ नहीं बोले। लेकिन अब इनमें से एक बोल पड़ा है। हो सकता है कि मोदी आज बोलें। वह आज लखनऊ में होने जा रही इन्वेस्टर्स समिट में बोल सकते हैं। मोदी का भाषण आज ग़ौर से सुना जाना चाहिए।...क्योंकि आज वहाँ देश के कई बड़े उद्योगपतियों के आने की उम्मीद है।

लेकिन वित्त मंत्री अरूण जेटली इस मुद्दे पर बोल उठे हैं और जेटली का बयान सरकार के घुटने टेकने का सबूत है...

वित्त मंत्री कल शाम को प्रकट हुए और पीएनबी महाघोटाले पर बयान जारी किया । जिसमें उन्होंने पूरे बैंकिंग मैनेजमेंट और ऑडिटर्स पर ज़िम्मेदारी डालते हुए सिस्टम फ़ेल होने को ज़िम्मेदार बता डाला। जेटली ने कांग्रेस या पिछली सरकार पर इस घोटाले की ज़िम्मेदारी नहीं डाली। जिसकी कोशिश कई दिनों से उनके साथी मंत्री कर रहे थे।

जेटली के बयान के बाद आरबीआई का बयान आया कि वह तो 2016 से अब तक तीन बार बैंकों को इस बारे में चेतावनी दे चुका था।

यह दोनों बयान भारत सरकार के घुटने टेकने का सबसे बड़ा सबूत है। उर्जित पटेल यानी अंबानी जी के रिश्तेदार 2016 से आरबीआई गवर्नर हैं। उर्जित को इस पद पर किसने बैठाया था। पीएनबी और दूसरे बैंकों में इतने बड़े ट्रांजैक्शन हो रहे थे तो क्या आप लोग यानी जेटली जी और पटेल जी वहाँ झख मार रहे थे...सरकारी बैंकों के सुपरविजन के लिए कौन ज़िम्मेदार है।

कह दो कि यह झूठ है कि बैंकों के बड़े ट्रांजैक्शन की सूचना वित्त मंत्रालय और आरबीआई के पास नहीं जाती है...
वित्त मंत्रालय के उस बाबू का नाम बताओ जिसके पास यह सूचना जाती थी...जेटली के बयान के बाद मंत्रालय और आरबीआई के कुछ अफ़सरों पर इस मामले में गाज गिरेगी। लेकिन जब मेहुल हमारा भाई है तो अकेले किसी मंत्रालय के बाबू या आरबीआई के सिर्फ़ अफ़सर कैसे दोषी हुए।...

...मामला यहीं फँस रहा है। मंत्रालय के बाबू जब देख रहे हैं कि पीएम के प्रोग्राम में मेहुल भाई समेत कई दलालों को आने के लिए निमंत्रणपत्र व वीआईपी पास जारी किए गए हैं तो उनकी क्या मजाल कि वह उसे किसी काम के लिए मना कर दें। जो पत्रकार मंत्रालय कवर करते हैं उन्हें पता होगा कि हर मंत्री के दफ़्तर के बाहर  दो चार ऐसे लोग दिखाई देते हैं जो मंत्री के बहुत ख़ास होते है और वही लोग मंत्री के लिए दलाली भी करते हैं। यह मेहुल भाई वही दलाल था जिससे पूरा वित्त मंत्रालय डरता था। गुजरात के तमाम व्यापारियों के काम यही मेहुल भाई ही तो कराता था। 


तो सवाल यह है कि मेहुल भाई को सत्ता के गलियारे का रास्ता किसने दिखाया...इस घोटाले पर जब कभी कोई बाबू या नेता सा पत्रकार किताब लिखेगा तो शायद बताए कि मेहुल को दिल्ली में सत्ता के गलियारे किसने दिखाए। बहरहाल, जेटली और आरबीआई के बयान के बाद सरकार ने सारे मामले में घुटने टेक दिए हैं.....

Monday, February 12, 2018

जब आपको मिल जाए फुरसत

जब आपको मिल जाए हिंदू-मुसलमान से फुरसत
...और मिल जाए किसी महिला की हंसी का कोई बेहूदा जवाब
तो फर्जी राष्ट्रवाद पर भी कुछ सोचना जरूर
और सोचना कि शहादत के जख्म कभी जुमलों से नहीं भरते
जब आपको मिल जाए गाय-गोबर से फुरसत
...और मिल जाए पहलू खान की हत्या का कोई नया पहलू
तो गरीबों की भुखमरी पर भी कुछ कहना जरूर
और कहना कि जीडीपी ग्रोथ से किसी के पेट नहीं भरा करते
जब आपको मिल जाए तमाम साजिशों से फुरसत
...और मिल जाए गांधी की हत्या का कोई अफसोसनाक बहाना
तो गोडसे की संतानों पर भी कुछ बोलना जरूर
और बोलना कि नागपुर के एजेंडे से कभी देश नहीं चला करते
जब आपको मिल जाए आवारा पूंजीवाद को बढ़ाने से फुरसत
...और मिल जाए आदिवासियों की जमीन छीनने का भोंडा तर्क
तो उन मेहनतकशों को भी कहीं तौलना जरूर
और तौलना मजदूरों के फावड़ों को, जो कभी रुका नहीं करते
जब आपको मिल जाए इंसाफ को बंधक बनाने से फुरसत
...और मिल जाए कुछ लोगों को घरों में जिंदा जला देने का उत्तर
तो उन पुराने नरसंहारों का जिक्र करना जरूर
और जिक्र करना कि किसी जज के मरने से फैसले टला नहीं करते
जब आपको मिल जाए बेरोजगारी के झूठे वादों से फुरसत
...और मिल जाए अस्पतालों में दवा न होने की कोई कहानी
तो ऐसी कहानी में निर्भया को दोहराना जरूर
और दोहराना कि बेटी बचाने के थोथे नारों से बेटियां नहीं बचतीं



Monday, February 5, 2018

बस फेंकते रहिए....

हमें लंबी फेंकने की आदत है...
कल जब हम वहां लंबी लंबी फेंक रहे थे तो कहीं सीमा पर जवान शहीद हो रहे थे...

और ड्रैगन ज़ोरदार नगाड़ा बजा रहा था, वह बार बार बजाता है 
लेकिन उस नगाड़े की आवाज़ मेरे फेंकने में खो जाती है

हम फेंकते हैं इसलिए कि फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद में और इज़ाफ़ा हो
और सिर्फ़ हमीं बेशर्मी से काट सकें चुनाव में इसकी फसल

सच है, लोग नफ़रतों के संदेश तेज़ी से ग्रहण करते हैं
यही है मेरी लंबी फेंकने की सफलता का राज भी

अब तो छोटे छोटे प्यादे भी ख़ूब अच्छा फेंक लेते हैं
आइए हम सब फेंकने को अपना जीवन दर्शन बनाएं 
 X               X                X                        X
जब कभी हो रोज़गार की ज़रूरत तो बस फेंकने लगिए
अस्पताल में न मिले दवा तो फेंकने की तावीज़ पहनिए

एक छोटे प्यादे ने हवाई जहाज़ में हवाई चप्पल पर फेंका
उससे छोटे ने ट्रेनों के फेलेक्सी किराये पर भी तो फेंका 

झोले में गर न आ सकें गेहूं चावल तो धूल चाट लो 
सब्ज़ी मंडी में महँगा लगे आलू तो धूल फांक लो


Friday, February 2, 2018

फिक्सर्स के देश में बिलबिलाते लोग


देश को फिक्सर्स चला रहे हैं...

वह कोई भी देश हो सकता है। अपना भी हो सकता है। पड़ोस हो सकता है। सात समंदर पार हो सकता है। मतलब कि वह कोई देश है जिसे सब लोग फ़िक्स करने में जुटे हैं।...जी हाँ, वही देश महाराज, जिस आप कहा करते हैं कि यह भी कोई देश है महाराज...

...तो यक़ीन मानिए यहां सब कुछ फ़िक्स है। यह देश फिक्सर्स के क़ब्ज़े में है।... क्रिकेट मैचों के फिक्सर्स के वक़ील उन्हें सरकार में डिफ़ेंड (बचाव) करते हैं। यही फिक्सर्स इंश्योरेंस लॉबी के गेम को बजट में फ़िक्स करते हैं...यही फिक्सर्स अदालत में खड़े होकर आवारा पूँजीवाद के झंडाबरदारों का केस फ़िक्स करते हैं...आप फँस चुके हैं। फिक्सर्स आपको भागने नहीं देगा।...आप कहाँ तक भागोगे।....

कहीं भी चले जाओ हर जगह छोटा मोटा फिक्सर आपको मिल जाएगा। रेलवे आरक्षण केंद्र पर जाओ फिक्सर हाज़िर मिलेगा। बच्चे का एडमिशन सरकारी स्कूल तक में कराना हो तो फिक्सर की सेवाएँ उपलब्ध हैं। हर मंत्री के दफ़्तर के बाहर तो फिक्सर बाक़ायदा तैयार किए जाते हैं। ...हद तो तब हो गई जब मैं अपने ताऊ जी का मृत्यु प्रमाणपत्र लेने नगर निगम गया तो वहाँ का क्लर्क बिना फिक्सर बात करने को तैयार ही नहीं था। ...कहते हैं कि ज़िला लेवल पर कोर्ट के बाहर सड़क पर फिक्सर खड़े रहते हैं जहाँ आप पहुँचे नहीं कि जेब कटी नहीं।...




...पंजाब में मेरा एक आईपीएस दोस्त था। काम के लिए कहा तो उसने पूरा आदर्शवाद झाड़ दिया। ...उसके दफ़्तर के बाहर मैं एक दरोग़ा को अक्सर मँडराते देखता था। उससे कहा। उसने फ़िक्सिंग की फ़ीस बताई। ...तीन घंटे बाद सब फ़िक्स था। ...मैंने अपने उस आईपीएस दोस्त को कभी नहीं बताया कि वह फिक्सर्स के रिंग में है।...वह झेंप जाता और फिर आगे से क्रांति की बातें नहीं करता।
...अब देखिए एक दरोग़ा किसी राज्य का डीजीपी बनने के लिए जनता के बीच मंदिर बनाने का मामला फ़िक्स कर रहा है। यह दरोग़ा भी उसी रिंग का हिस्सा है जिस रिंग का हिस्सा मेरा वह आईपीएस मित्र था। 

...मैंने कई फुलटाइम कामरेडों को फिक्सर बनते देखा...और देखा कि ट्रेड यूनियनों को उन्होंने कैसे फ़िक्स कर दिया।...

मैंने एक बड़े लेखक को फिक्सर बनते देखा...कई महिला लेखकों को फ़िक्स करते हुए वह अजर अमर हो गया। जिसकी अमर बेलें आज तमाम तरह की फ़िक्सिंग में लगी हुई हैं।

...आप तमाम तरह के फ़िक्सरों से अगर निकल भागना चाहें तो आगे एक बड़ा फिक्सर आपको हाँककर वहीं पहुँचा देगा फिर से फ़िक्स होने के लिए...

...क्योंकि आगे मीडिया बैठा है इनकी तरफ़ से फ़िक्स करने को...सबसे बड़े फिक्सर ने मीडिया की ड्यूटी इसी काम पर लगाई है...कि तुम हमारी फ़िक्सिंग का मुखौटा हो।

मीडिया तमाम फ़िक्सरों का मुखौटा है।

...एक दो दिन में फिक्सर मीडिया फ़र्ज़ी प्रायोजित पोल लेकर आता ही होगा। जिसमें बताया जाएगा कि ख़राब बजट, मिडिल क्लास की नाराज़गी व फलाने राज्य में उपचुनाव हारने के बावजूद फलाना अभी भी बहुत लोकप्रिय है। अगर अभी चुनाव हो तो फलाने फिक्सर की सरकार बनना तय है...उसे इतने फ़ीसदी फ़िक्स वोट मिलेंगे। 

...आइए चलें फ़िक्सिंग करते हैं। जय फ़िक्सिंग जय फिक्सर!!!!!


(फिक्सर का मतलब दलाल से है...यानी वह शख़्स जो सबकुछ किसी भी तरह किसी ख़ास ग्रुप के लिए हालात को अनुकूल बना दे...सेट कर दे)